वर्ग की महिलाओं की राजनीति में भागीदारी बढ़ाएगा, जिससे नीति निर्माण में लैंगिक समानता, सशशकतकरण और जमीनी सतर पर सकारातमक सामाजिक बदलाव को बढ़ािा मिलेगा । इससे अनुसूचित जाति एवं अनुसूचित जनजाति वर्ग की महिलाएं भी सामाजिक- राजनीतिक रूप से राष्ट्र एवं समाज कार्य के लिए प्रतिबद्धता के साथ कार्य करने में सक्षम होंगी । महिला आरक्षण विधेयक लागू होने के बाद संसद और विधानसभाओं में अनुसूचित जाति एवं अनुसूचित जनजाति वर्ग की महिलाओं के कम प्रतिनिधिति की समसया दूर होगी । इसके साथ ही कानून निर्माण और नीतिगत फैसलों में महिलाओं की सहरिय भागीदारी बढ़ेगी, जिससे ऐसे मुद्ों पर धयान केंद्रित किया जा सकेगा जो महिलाओं और बच्चों के लिए महतिपूर्ण हैं । यह विधेयक देश की अनुसूचित जाति एवं अनुसूचित जनजाति वर्ग की महिलाओं को समान प्रतिनिधिति देकर लोकतंत्र को अधिक समावेशी और समग् बनाएगा ।
अनुसूचित जाति एवं जनजाति की महिलाएं ही देगी विपषि को कड़ा जवाब
महिला आरक्षण को जिस तरह से विपक्ष ने रोकने का काम किया है, उसे अनुसूचित जाति एवं अनुसूचित जनजाति वर्ग की महिलाएं भी देख और समझ चुकी हैं । विपक्षी दलों की सिाथ्यपूर्ण राजनीति के कारण 2029 के लोकसभा चुनाव से जिस महिला आरक्षण वयिसथा को लागू किया जाने का लक्य था, वह फिलहाल खटाई में पड़ चुका है । राजनीति में बड़े अवसर के रूप में अनुसूचित जाति एवं अनुसूचित जनजाति वर्ग की महिलाओं के लिए जो दरवाजे खुलने जा रहे था, वह नहीं खुल सके हैं ।
देश में अनुसूचित जाति एवं अनुसूचित जनजाति वर्ग की महिलाओं का राजनीतिक क्षेत्र में प्रभाव तेजी से बढ़ता जा रहा है । पंचायतीराज संसथाओं में संविधान के अनुचछेद-
243डी के अंतर्गत महिलाओं के लिए नयूनतम एक-तिहाई आरक्षण का प्रावधान है, लेकिन 21 राजयों एवं दो केंद्र शासित प्रदेशों ने इस प्रावधान को और मजबूत करते हुए महिलाओं के लिए 50 प्रतिशत तक आरक्षण लागू किया है, जिससे पंचायतों में अनुसूचित जाति एवं अनुसूचित जनजाति वर्ग की महिलाओं की भागीदारी तेजी से बढ़ी है । मोदी सरकार ने भी अनुसूचित जाति एवं अनुसूचित जनजाति वर्ग की महिलाओं में नेतृति विकास के लिए भी ठोस रणनीति के साथ काम किया है ।
इसी रणनीति के अंतर्गत महिला आरक्षण विधेयक के माधयम से राजनीति में अनुसूचित जाति एवं अनुसूचित जनजाति वर्ग की महिलाओं की हिससेदारी बढ़ाने के लक्य को हासिल करने की दृष्टि से किए जा रहे प्रयासों को जिस तरह से विपक्ष ने रोकने का काम किया है, उसके नकारातमक परिणाम विपक्ष को भोगने ही होंगे, इसमें किसी को भी कोई संदेह नहीं होना चाहिए है । �
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