Legacy India-June 2021 | Page 45

उसने विभिनन क्ेत्रीय भाषाओं में पाठ्य-सामग्ी का अनुवाद करना शुरू कर दिया है ।
सवभाषा एवं मातृभाषा में शिक्ा अधिक प्रभावी एवं उपयोगी है , कयोंकि विद्ा्थी मातृभाषा में शिक्ा को आसानी से ग्हण करता है , इसमें विद्ा्थी की ग्हण क्रता जयादा होती है । कयोंकि अपनी भाषा के साथ जो मजबूत मनोबल एवं आतरीयता जुड़ी होती है , उसी से विद्ा्थी का सरग् वयपक्ततव विकास होता है , उसकी तार्कि क दृपटि भी विकसित होती है । शोध के निषकषमा बताते हैं कि मातृभाषा में विद्ा्थी का पशक्ण उसके मानसिक , भावनातरक , बौद्धिक और नैतिक विकास को भी प्रभावित करता है । मातृभाषा में पशक्ण सरल और सहज बन जाता है । परिणाम विद्ा्थी शनैः-शनैः रुचिकर क्ेत्रों में दक्ता हासिल कर अपने क्ेत्र में महारत हासिल कर लेते हैं । विद्ा्थी में यह दक्ता ही नए विचारों को पनपाने में और उसकी अंतदृमापटि को विकसित करने में काम आती है ।
वर्तमान समय में सव-भाषा एवं मातृभाषा का महतव एवं वयपक्ततव-निर्माण की जिमरेदारी अधिक प्रासंगिक हुई है । कयोंकि सर्वतोमुखी योगयता की अभिवृद्धि के बिना युग के साथ चलना और अपने आपको टिकाए रखना अतयंत कठिन होता है । नई शिक्ा नीति ने इस बात को गंभीरता से सवीकारा है , पनपचित ही यह भारत को एक ज्ानमय समाज में रूपांतरित करने वाली सफल योजना साबित होगी । हमारे पास आज दुनिया तक पहुंचने का शानदार सु-अवसर है जो अब से पहले शायद कभी नहीं था । हमारे पास आज ऐसा नेतृतव है , जो इन तमाम बदलावों को साकार करने के लिए दृढ़ प्रपतज् है । हमें सिर्फ सकारातरक प्रयासों के साथ सही दिशा में बढ़ने एवं मातृभाषा में पशक्ण को प्राथमिकता देने की आवशयकता है । हमारा देश दुनिया का सबसे युवा देश है । अपनी इस युवा जनशक्ति का सदुपयोग कर हम महाशक्ति बनने की दिशा में सार्थक हसतक्ेप कर सकते हैं । अपने युवाओं को नये कौशलों और नये ज्ान से लैस कर दुनिया में परचम लहरा सकते हैं । जिसमें सवभाषा , सव-संसकृ पत एवं सव-पहचान की सार्थक भूमिका है ।
भारत सुपर पावर बनने के अपने सपने
आज आर्थिक विकास के कारण , प्रकृ ति के संरक्ण के लिए अंतरराषरिीय संघ ( इंटरनेशनल यूनियन फॉर कनजववेशन ऑफ़ नेचर ) के अनुसार दुनिया भर में 37,400 प्रजातियां विलुप्ति के कगार पर है । इसमें सतनधारी 26 फीसदी , उभयचर 41 प्रतिशत , पक्ी 14 प्रतिशत , कोनिफर 34 फीसदी आदि शामिल हैं ।
को साकार कर सकता है । इस महान उद्ेशय को पाने की दिशा में विज्ान , तकनीक और अकादमिक क्ेत्रों में नवाचार और अनुसंधान करने के अभियान को तीव्रता प्रदान करने के साथ मातृभाषा में पशक्ण को प्राथमिकता देनी होगी । गुणवत्तापूर्ण शिक्ा का आधार बनने वाली इस नयी शिक्ा नीति से इस दिशा में बड़ी उमरीद है । नयी शिक्ा नीति के साथ जुड़े नए आयाम , नए मुकाम हासिल कराने में मातृभाषा में पशक्ण की महती भूमिका होगी । नई शिक्ा नीति जिस तरह से मातृ भाषा के प्रति प्रतिबद्धता के साथ नए भारत के निर्माण का आधार प्रसतुत करती है , इससे नव-सृजन और नवाचारों के जरिए समाज एवं राषरि में नए प्रतिमान उभरेंगें । मातृभाषा जब शिक्ा का माधयर बनेगी तो मौलिकता समाज में रचनातरकता का अभियान छेड़ेगी । भाषा और गणित को नई नीति में प्राथमिकता मिलना बचचों में लेखन के कौशल और नवाचार का संचार करेगा । सृजनातरक गतिविधियों का वातावरण पैदा करेगा । पशक्ण के परमपरागत तौर-तरीकों को नई टैकनोलॉजी के जरिए नवोनरेष के साथ कहानी , नाटक , समूह चर्चाएं , लेखन और सराटमा डिसपले बोर्ड , अधययन , अधयापन और संवाद की नई संसकृ पत का विकास नई शिक्ा नीति को वाकई नया तो बनाता है , सव-संसकृ पत से जोड़ता भी है । तकनीकी के इसतेराल को प्रोतसापहत करने की
पहल कोरोना संकट के कारण नई नीति को इस दृपटि से और अधिक प्रभावी बनाने की दिशा में ले जायेगी । इसके लिए कं पयूटर , लैपटॉप व फोन आदि के साथ मातृभाषा के जरिए पशक्ण को रोचक बनाने में टैकनोलॉजी शिक्ा के भावी परिदृशय को बहुत हद तक बदल भी देगी ।
मातृभाषा समपूणमा देश में सांसकृ पतक और भावातरक एकता स्ापित करने का प्रमुख साधन है । भारत का परिपकव लोकतंत्र , प्राचीन सभयता , समृद्ध संसकृ पत तथा अनूठा संविधान पवश् भर में एक उचच स्ान रखता है , उसी तरह भारत की गरिमा एवं गौरव की प्रतीक मातृ भाषाओं को हर कीमत पर विकसित करना हमारी प्राथमिकता होनी ही चाहिए । प्रधानमंत्री नरेनद्र मोदी के शासन में हिनदी सहित अनय क्ेत्रीय भाषाओं को सकू लों , कॉलेजों , तकनीकी शिक्ा में प्रतिष्ठा मिलनी चाहिए , इस दिशा में वर्तमान सरकार के प्रयास उललेखनीय एवं सराहनीय है , लेकिन उनमें तीव्र गति दिये जाने की अपेक्ा है । कयोंकि इस दृपटि से महातरा गांधी की अनतववेदना को समझना होगा , जिसमें उनहोंने कहा था कि भाषा संबंधी आवशयक परिवर्तन अर्थात् हिनदी को लागू करने में एक दिन का विलमब भी सांसकृ पतक हानि है । मेरा तर्क है कि जिस प्रकार हमने अंग्ेज लुटेरों के राजनैतिक शासन को सफलतापूर्वक समाप्त कर दिया , उसी प्रकार सांसकृ पतक लुटेरे रूपी अंग्ेजी को भी ततकाल निर्वासित करें । लगभग सात दशक के आजाद भारत में भी हमने हिनदी एवं क्ेत्रीय भाषाओं को उनका गरिमापूर्ण स्ान न दिला सके , यह विडमबनापूर्ण एवं हमारी राषरिीयता पर एक गंभीर प्रश्नचिनह है ।
शिक्ा में हिनदी एवं अनय क्ेत्रीय भाषाओं की घोर उपेक्ा होती रही है , इन त्रासद एवं विडमबनापूर्ण पस्पत को नरेनद्र मोदी सरकार कु छ ठोस संकलपों एवं अनूठे प्रयोगों से दूर करने के लिये प्रतिबद्ध है , उनको मूलयवान अधिमान दिया जा रहा है । ऐसा होना हमारी सांसकृ पतक परतंत्रता से मुक्ति का एक नया इतिहास होगा । इसके लिये अखिल भारतीय तकनीकी शिक्ा परिषद का इंजीनियरिंग की शिक्ा मातृभाषा में देने के निर्णय का सवारत होना ही चाहिए । �
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