Legacy India-June 2021 | Page 38

साक्षात्ार

साक्षात्ार

उत्तर प्रदेश में भाजपा की ऐतिहासिक जीत सुनिश्चित होगी

उत्तर प्रदेश के सीतापुर संसदीय क्ेत्र के सांसद राजेश वर्मा चार बार से लोकसभा के सदसय हैं । इनहें हाल ही में पिछड़ा वर्ग के कलयाण संबंधी संसद की स्ायी समिति का चेयरमैन बनाया गया है । राजेश वर्मा 1999 में पहली बार बसपा के टिकट पर लोकसभा पहुंचे थे । वर्ष 2004 में उनहोंने दोबारा फिर बसपा के टिकट पर जीत दर्ज की और उनहें पाटथी ने लोकसभा में अपना नेता घोषित किया । बाईस साल तक बसपा के संगठन में काम करने के बाद राजेश वर्मा 2014 में भाजपा में शामिल हुए और 2014 और 2019 में भाजपा के टिकट पर लोकसभा पहुंचे । राजेश वर्मा को पाटथी ने एक ओबीसी नेता के रूप में देखा और उनहें उत्तर प्रदेश में पिछड़ा वर्ग मोर्चा का अधयक् बनाया । इस जिमरेदारी से वह हाल ही में मुक्त हुए हैं । राजेश वर्मा आजादी के बाद सीतापुर लोकसभा से सर्वाधिक बार चुने जाने वाले सांसद हैं । उनसे लेगेसी इंडिया के कॉपी एडिटर अक्त मित्तल ने लंबी बातचीत की । पेश है उनसे बातचीत का मुखय अंश : -
प्रश्न : आपको हाल ही में अनय पिछड़ा वर्ग ( ओबीसी ) के कलयाण से संबंधित संसद की स्ायी समिति का चेयरमैन बनाया गया है , आप इस नयी जिमरेदारी को किस रूप में देखते हैं ?
उत्तर- 2014 में मैं भारतीय जनता पाटथी में शामिल हुआ और तभी से पाटथी ने मुझे उत्तर प्रदेश में पिछड़े वर्ग के नेता के रूप में प्रोजेकट किया है । पाटथी ने मुझे उत्तर प्रदेश में पाटथी के पिछड़े वर्ग मोर्चा के प्रदेश अधयक् की जिमरेदारी दी और अब जो मुझे ये नई जिमरेदारी दी गई है , इसको भी मैं उसी श्रद्धा और विश्ास के साथ निभाऊं गा , जैसा कि अब तक निभाते आया हूं । जब भी मुझे कोई भी नयी जिमरेदारी मिलती है तो मैं उसे कु छ नया सीखने और जन-कलयाण के अवसर के रूप में ही देखता हूं ।
प्रश्न : आपने अपने राजनीतिक कै रियर की शुरुआत बहुजन समाज पाटथी ( बीएसपी ) से की थी , 2014 में आप भारतीय जनता पाटथी ( भाजपा ) में शामिल हो गए । बसपा और भाजपा की विचारधारा और ‘ वे ऑफ थिंकिं ग ’ में जमीन आसमान का फर्क है , ऐसे में आपको नई पाटथी में आने के बाद सामंजसय बिठाने में
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कया-कया दिककतें आई ंऔर आप उस पर कै से पार पा सके ?
उत्तर : मैंने अपने राजनीतिक जीवन की शुरुआत बसपा से की थी । सन् 1999 में मैं बसपा से ही पहली बार सांसद बनकर लोकसभा पहुंचा । वर्ष 2004 में भी मैं बसपा के टिकट पर लोकसभा पहुंचा । सबसे जरूरी बात
यह है कि मैंने 22 साल तक बसपा के संगठन में बतौर कार्यकर्ता अपनी सेवाएं दीं । वर्ष 2009 में जब मैं लोकसभा का चुनाव हार गया , उसके बाद बसपा में मैं पांच साल तक उपेपक्त पड़ा रहा । बसपा में कार्यकर्ताओं को उपेपक्त किया जाना एक आम बात हो गई है । वर्ष 2014 में मैंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जी के कु शल
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