July 2026_DA | Page 38

रिपोर्ट

करके सेना को एकरस और राष्ट्भ्त बनाना हरी बुद्धिमानरी होगरी, अपनरी मातृभूमि करी रखा हम स्वयं करेंगे ।
डा. आंबेडकर ने जनसंखरा सथानांतरण के लिए एक ल्वसतृत कार्य योजना भरी बनाई थरी, जो उनहोंने अपनरी पुसतक " पाकिसतान और द पार्टीशन ऑफ इंडिया " के माधरम से 1940 में हरी सबके सामने रख दरी थरी । डा. आंबेडकर करी योजना थरी कि ऑ्टोमन साम्राजर के पशचात जिस प्रकार से ग्रीक, टर्की और बुलगारिया के मधर जनसंखरा का जिस प्रकार सथानांतरण हुआ, उसरी प्रकार भारत में भरी यह संभ्व हो सकता है । अपनरी योजना में डा. आंबेडकर ने समपलत्त तथा पेंशन आदि के अधिकारों करी अदला-बदलरी के समबनध में भरी कार्ययोजना बना कर सामने रखरी थरी । लेकिन कांग्ेस, जो अपनरी नरीलत के अनुसार हिनदू-मुकसलम एकता में ल्वश्वास करतरी थरी, ने इस योजना को असंभ्व कहकर ठुकरा दिया । कांग्ेस के नेता हिनदू- मुकसलम एकता करी झूठरी कलपनाओं में भ्टक रहे थे ।
ल्वखरात लेखक कोनराड एस्ट( Kocnraad Eist) ने अपनरी पुसतक में उस समय करी कांग्ेसरी मानसिकता का ्वर्णन करते हुए लिखा कि ल्वभाजन के समबनध में कांग्ेसरी नेतृत्व और डा. आंबेडकर के ल्वचारों में बड़ा मतभेद था । महातमा गांधरी और ि्वाहरलाल नेहरू, दोनों हरी अंत तक ल्वभाजन के स्थायी और अप्वत्यनरीर तातरा को नकारने के लिए असामानर समझौते करते रहे तथा शर्मनाक छू्ट देने में हरी वरसत रहे । गांधरी िरी और नेहरू ने अपने आप को मुकसलम गुंडों के आगे ल्वनत भा्व से आतमसमर्पित हरी कर दिया था । डा. आंबेडकर ने एक साफ़- सुथरे स्थायी समझौते का स्वरुप सामने रखा परनतु गांधरी िरी और नेहरू ने अपनरी नष््ट हुई, परनतु सुनदर दिखने ्वालरी हिनदू-मुकसलम एकता को छोड़ने से मना कर दिया था । साथ हरी भारत के ल्वभाजन और लद्राष्ट् के सिद्धांत को पूररी तरह स्वरीकारने के बाद भरी जनसंखरा के सथानांतरण के प्रस्ताव का पूररी ताकत से ल्वरोध किया ।
डा. आंबेडकर का मानना था कि पाकिसतान बनने पर हिनदू लोग पाकिसतान के अंदर घिर जाएंगे, इसलिए ल्वभाजन से पहले उनहें सुरक्षित निकलने करी व्यवसथा होनरी चाहिए । तमाम प्रयासों के बा्विूद डा. आंबेडकर करी योजना और प्रस्ताव को किसरी ने भरी स्वरीकार नहीं किया । डा. आंबेडकर करी चेता्वनरी को गंभरीरता से न लेते हुए 1947 में बं्ट्वारे के बाद, पाकिसतान के अंदर बडरी संखरा में अनुसूचित जातियों के लोगों के अला्वा अनर हिनदू जनसंखरा ्वहरी रुक गई । ्वह किनहीं कारणों करी ्विह से भारत नहीं आए और फिर कथित हिनदू-मुकसलम एकता करी कालरी असलियत सामने आई । हिनदुओं पर शुरू हुए जानले्वा हमलों और मुकसलम धर्म स्वरीकार करने के लिए बनाए जाने ्वाले लनद्यररी दबा्वों ने पाकिसतान में रहने ्वाले हिनदुओं करी कसथलत को बदतर बना दिया । देश ल्वभाजन के समय जनसंखरा करी पूर्ण अदला-बदलरी नहीं होने करी ्विह से आधे से अधिक मुसलमान भारत में हरी रुक गए थे, जिनकरी संखरा बढ़कर अब पंद्रह करोड़ से अधिक हो चुकरी है, ्वहरी पाकिसतान में रहने ्वाले हिनदुओं करी संखरा एक करोड़ से र्टकर महज चंद हजार रह गररी । यह उन गलत नरीलतरों का परिणाम भरी कहा जा सकता है, जिसके बारे में डा. आंबेडकर ने ल्वभाजन करी प्रलकरा शुरू होने से पहले हरी सचेत कर दिया था ।
सेना में मुकसलमों करी बढ़तरी संखरा पर डा. आंबेडकर का कहना है कि अंग्ेिों ने मुसलमानों को सेना में इतना महत्व ्रों दिया ्रोंकि अंग्ेि चाहते थे कि इससे अंग्ेिों से सत्ता छरीनने के लिए हिनदुओं के आंदोलन के खिलाफ अ्वरोध खड़ा कर दिया जाए । डा. आंबेडकर ने जब " पाकिसतान ऒर द पार्टीशन ऑफ इकणडरा " नामक पुसतक लिखरी, उन दिनों भारत करी पकशचमरी सरीमा पर अफगानिसतान था, जहां से अनेकों आकमण भारत पहले हरी झेल चुका था । डा. आंबेडकर करी चिंता का मुखर कारण यहरी था कि ्रा अफगानिसतान के आकमण के समय भारतरीर सेना के अंदर मुकसलम सैनिक देशभक्त का परिचय देंगे या अफगानिसतान करी मुकसलम
सेना से जाकर मिल जाएंगे? डा. आंबेडकर ने लिखा कि हिनदू कहां तक, इन मुकसलम सरीमा रक्षकों पर देश करी सुरक्षा और स्वतंत्ता करी रक्षा के लिए निर्भर रह सकते हैं? डा. आंबेडकर कहते है कि पंजाबरी और पकशचमरी-उत्तर में रहने ्वाले मुसलमान अपने आपको इसलाम का धमा्य्वलम्बी मानते हैं । ऐसे में ्रा कोई साहसरी हिनदू इस बात को स्वरीकार कर सकता है कि भारत पर मुकसलम देशों का आकमण होने पर ्वह मुकसलम सेनाएं देशभ्त रहेगरी और भारत करी रक्षा सच्चे दिल से करेगरी? डा. आंबेडकर कहते है कि अब ्वास्तविक प्रश्न तो यह है कि भारतरीर सरकार अफगानिसतान में ल्वरुद्ध ऐसरी सेना का उपयोग कर सकतरी है? इस ल्वरर में मुकसलम लरीग के इस दृकष््टकोण करी तरफ भरी धरान देना चाहिए, जिसने यह घोषणा करी है कि भारत करी सेना किसरी मुकसलम शक्त के ल्वरुद्ध काम में नहीं लाररी जाएगरी । देखा जाए तो मुकसलम सैनिकों करी मानसिकता का जो ल्वशलेरर डा. आंबेडकर ने लनभगीकता के साथ किया, ्वह बहुत कम हरी लोग कर सकेंगे । जो लोग राजनरीलतक स्वाथ्य्वश यह तर्क देते हैं कि सुरक्षा बलों से मुकसलमों के प्रतिशत को बढ़ाया जाए, उनके
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