July 2026_DA | Seite 28

विशेष

गां्व-गां्व पहुँचाया गया । यह किसरी एक समुदाय का नहीं, बकलक अनरार के ल्वरुद्ध संगठित जनप्रतिरोध का उदरोर था । आंदोलन के प्रारंभिक चरण में ब्रिटिश पोषित उन महाजनों और साहूकारों को लक्र बनाया गया, जिनहोंने छल और अतराचार के माधरम से जनजातरीर समाज का आर्थिक शोषण किया था । शरीघ्र हरी यह संघर्ष अंग्रेजी शासन के ल्वरुद्ध वरापक युद्ध में परर्वलत्यत हो गया । अंग्ेिों करी ओर से आधुनिक हथियारों से लैस सेना मैदान में उतररी, जबकि संताल ्वरीरों के हाथों में के्वल तरीर- कमान, फरसा और पारंपरिक असत् थे । संसाधनों करी असमानता के बा्विूद संताल योद्धाओं ने अनेक अ्वसरों पर अंग्रेजी सेना को पराजित किया ।
संघर्ष का मौन साषिी मार्टिलो टावर
इतिहासकारों के अनुसार संताल ्वरीरों ने अंग्रेजी सेना को परीछे ह्टने पर ल्व्वश कर दिया और पाकुड क्षेत् तक अपना प्रभा्व सथालपत किया । संतालों के साहस से भयभरीत अंग्ेिों ने पाकुड में सुरक्षा के लिए प्रसिद्ध माल ्टलो ्टा्वर का निर्माण कराया, जो आज भरी उस संघर्ष का मौन साक्षरी है । अंग्रेजी शासन ने पूरे क्षेत् में मार्शल ललॉ लागू कर दिया और वरापक दमनचक आरमभ किया ।
अंततः आधुनिक हथियारों और भाररी सैनर बल के सामने संघर्ष करी दिशा बदलने लगरी । अंग्ेिों ने ' फू्ट डालो और राज करो ' करी नरीलत अपनाई । चांद और भैर्व ्वरीरगति को प्रापत हुए । सिदो और कानहू को पकडकर भोगनाडरीह में सा्व्यिलनक रूप से फांसरी दे दरी गई । इस संघर्ष में लगभग 20 हजार से अधिक संताल ्वरीरों ने अपने प्राणों करी आहुति दरी । उनके बलिदान ने यह सिद्ध कर दिया कि स्वतंत्ता के्वल राजनरीलतक अधिकार नहीं, बकलक स्वाभिमान और अकसतत्व का प्रश्न भरी है ।
संताल हूल का प्रभा्व के्वल भारत तक सरीलमत नहीं रहा । प्रसिद्ध अंग्ेि इतिहासकार ड्लरू. ड्लरू. हं्टर ने अपनरी पुसतक Annals of Rural Bengal में लिखा—
'' संतालों को आतमसमर्पण जैसे किसरी श्द का ज्ान नहीं था । जब तक उनका ड्म बजता रहता था, ्वे लडते रहते थे । जब तक उनमें से एक भरी िरील्वत रहा, ्वह लडता रहा । ब्रिटिश सेना का कोई भरी सैनिक उनके साहस और बलिदान से प्रभाल्वत हुए बिना नहीं रह सका ।''
कार्ल मा्स्य ने भरी अपनरी पुसतक Notes on Indian History में संताल हूल को जनकांलत करी संज्ा दरी । Illustrated London News( 1856) ने इसे ब्रिटिश शासन के लिए चेता्वनरी बताया । ्वहीं मेजर िल्व्यस ने स्वरीकार किया कि संताल योद्धाओं को आतमसमर्पण का अर्थ तक ज्ात नहीं था; ्वे नगाडों करी थाप पर गोलियों के सामने ड्टे रहते थे ।
प्रखरात इतिहासकार डलॉ. बरी. परी. केशररी के अनुसार संताल हूल ने हरी 1857 के स्वाधरीनता संग्ाम करी आधारभूमि तैयार करी । इस आंदोलन के बाद अंग्ेिों को प्रशासनिक ढांचे में परर्वत्यन करना पडा । संताल परगना को पृथक प्रशासनिक इकाई का स्वरूप दिया गया तथा आगे चलकर सरदाररी आंदोलन और बिरसा मुंडा के उलगुलान जैसे आंदोलनों के लिए भरी यह संघर्ष प्रेरणा बना ।
स्तंत्ता का बीजारोपण
्वास्तव में हूल के्वल 1855 करी एक र्टना नहीं है । यह भारतरीर स्वाधरीनता चेतना का ऐसा शाश्वत प्रतरीक है, जिसने यह संदेश दिया कि अनरार चाहे कितना भरी शक्तशालरी ्रों न हो, संगठित समाज उसकरी चुनौतरी स्वरीकार कर सकता है । यह संघर्ष जल, जंगल, जमरीन, अकसमता, स्वायत्तता और सांस्कृतिक स्वाभिमान करी रक्षा का घोष था । इसलिए हूल को के्वल '' संताल ल्वद्रोह '' कहना उसके वरापक राष्ट्रीय
स्वरूप के साथ अनरार होगा ।
आज, जब हम हूल लद्वस मनाते हैं, तब यह के्वल अतरीत का समरण नहीं, बकलक राष्ट् के उन अनाम और उपेक्षित नायकों के प्रति ककृतज्ता वर्त करने का अ्वसर भरी है, जिनहोंने अपने प्राणों करी आहुति देकर स्वतंत्ता करी मशाल प्रज्वलित करी । रद्लप हूल अपने ततकालरीन राजनरीलतक लक्र को पूर्णतः प्रापत नहीं कर सका, किनतु उसने अंग्रेजी सत्ता करी अजेयता के मिथक को ध्वसत कर दिया और भारतरीर जनमानस में स्वतंत्ता का जो बरीि रोपा, ्वहरी आगे चलकर राष्ट्रीय स्वाधरीनता आंदोलन का ्व्ट्वृक्ष बना । इसलिए हूल को के्वल अतरीत करी र्टना मान लेना इतिहास के साथ अनरार होगा । हूल आज भरी िरील्वत है— हर उस संघर्ष में, जो अनरार के ल्वरुद्ध खडा होता है; हर उस आ्वाज में, जो स्वाभिमान और अधिकारों करी रक्षा का संकलप लेतरी है ।
इसरी सतर को अभिवर्त करतरी ये पंक्तरां आज भरी हूल करी अमर चेतना का सपंदन बनकर सुनाई देतरी हैं— '' खाली जगह दिखे जहां, जहां से भी निकले कराहती हुई आवाज़ें, दबी हुई चीख का जहां हो अहसास, उन कंपकंपाते हाथों को पकड़ खड़े हैं सिदो-कान्हू, आंसुओं को पोंछ रही हैं फूलो-झानो, कांवत रूपी सखुआ की डाल थामे हैं चांद- भैरव । वहीं मौजूद है हूल की चिंगारी … हूल कभी समापत नहीं होता, हर कालखंड नए स्रूप में जन्म लेता है हूल ।''
( लेखक सुपरिचित पत्कार हैं एवं जनजातीय विषयों के अधयेता है ।)
28 tqykbZ 2026