कवर स्टोरी
सशकत युवा-सशकत राष्ट्- सशकत दलित समाज: विकसित भारत का लक्य और दलित वर्ग के लिए भारत का दमृकष्टकोण
' ल्वकसित भारत ' का लक्र तब तक अधूरा है, जब तक दलित ्वग्य सहित समाज का हर अंतिम छोर पर खडा वरक्त आर्थिक और सामाजिक रूप से मुखरधारा में शामिल न हो । इस लक्र के मूल में समा्वेशरी ल्वकास, समान भागरीदाररी और बाबासाहब डा. बरी. आर. आंबेडकर के सामाजिक लोकतंत् के स्वप्न को साकार करना निहित है । ' ल्वकसित भारत ' करी इस परिकलपना में दलित ्वग्य करी भूमिका और उनके उतथान को आर्थिक सशक्तकरण और उद्लमता ए्वं रोजगार सृजन, दलित उद्लमरों को प्रोतसाहन, सामाजिक समानता और समा्वेशन के साथ हरी ल्वकसित भारत का दृकष््टकोण जातिगत भेदभा्व और असमानता के अंत पर जोर देता है । शिक्षा और कौशल ल्वकास के साथ हरी तकनरीकरी और उच्च शिक्षा तक दलित ए्वं ्वंचित ्वग्य करी समान पहुंच सुलनकशचत करना हरी होगा ।
गत बारह वर्षों के दौरान मोदरी सरकार इस दिशा में लगातार कार्य कर रहरी है और दलित, आलद्वासरी ए्वं ्वंचित ्वग्य के लोगों करी ऊर्जा, प्रतिभा और श्म राष्ट् निर्माण में अतरंत महत्वपूर्ण भूमिका निभा भरी रहरी है । 2014 और 2026 के बरीच, सरकार ने शिक्षा, कौशल ल्वकास, उद्लमता, खेल, स्वास्थर और नागरिक भागरीदाररी जैसे क्षेत्ों में यु्वाओं पर केंद्रित कई पहल शुरू कीं, जिसके परिप्रेक्र में दलित-्वंचित ्वग्य को प्राथमिकता प्रापत हो रहरी है । अपनरी लगभग 65 प्रतिशत आबादरी के 35 ्वर्ष से कम उम्र के होने के कारण, भारत अपने इतिहास के एक अहम मोड पर है । सरकार इस जनसांकखरकरीर लाभांश करी अपार क्षमता को पहचानतरी है, जिसमें दलित-्वंचित ्वग्य के यु्वाओं करी प्रतिभाओं पर धरान दिया जा रहा है ।
पिछले 12 वर्षों में, देश ने यु्वाओं के साथ
सरकार के जुड़ाव के तररीके में एक बुनियादरी बदला्व देखा है । यह दौर भारत के यु्वाओं को राष्ट्रीय ल्वकास करी ताकत में बदलने के लिए किए गए वर्वकसथत और परर्वत्यनकाररी प्रयासों को दर्शाता है । यह बदला्व शिक्षा, कौशल ल्वकास, खेल और उद्लमता सहित हर क्षेत् में दिखाई देता है । यु्वाओं को अब के्वल लनकष्कर लाभाथगी नहीं माना जाता, बकलक उनहें " अमृत परीढ़री " के रूप में पहचाना जाता है । ्वह ' ल्वकसित भारत @ 2047 ' के मुखर निर्माता और सह-रचनाकार के रूप में उभरे हैं ।
गत बारह वर्षों में भारत करी अर्थव्यवसथा का औपचारिक होना पिछले दशक के सबसे महत्वपूर्ण आर्थिक बदला्वों में से एक रहा है । यु्वाओं को संगठित क्षेत् में लाने में काफरी प्रगति हुई है । ईपरीएफओ के आंकडों से पता चलता है कि अप्रैल 2020 से जून 2025 के बरीच 18-28 साल करी उम्र के 3.45 करोड से जऱादा यु्वा औपचारिक कार्यबल में शामिल हुए हैं, जिसमे बडरी संखरा दलित ए्वं ्वंचित ्वग्य के लोगों करी
रहरी है ।
पिछले बारह वर्षों में भारत ने दुनिया के सबसे वरापक और एकरीककृत यु्वा ल्वकास तंत् में से एक को तैयार किया है । यह स्वतनत् भारत में कांग्ेस सहित अनर दलों करी सरकारों के बिखरे हुए प्रयासों से ह्टकर एक वर्वकसथत, कई क्षेत्ों को जोडने ्वाले ढांचे करी ओर बढ़ा है, जो शिक्षा, कौशल, रोजगार, स्वास्थर, खेल और नागरिक भागरीदाररी जैसे क्षेत्ों में यु्वाओं को सश्त बनाता है और इसका असर हर पैमाने पर देखा जा सकता है ।
विकास की विरासत और रषिा का दशक
पिछले 12 वर्षों के दौरान भारत के हर नागरिक के कलरार करी दिशा में कार्य कर रहरी मोदरी सरकार ने रक्षा और सुरक्षा दृकष््ट से जो कार्य किया है, उसका लाभ दलित, आलद्वासरी, ्वंचित, गररीब सहित देश के हर सामाजिक ्वग्य को मिला है और यह भारत के वरापक
16 tqykbZ 2026