ऐतिहासिक रूप से पूंिरी और व्यावसायिक ने्ट्वक्क तक सरीलमत पहुंच के कारण इस क्षेत् में प्रतिनिधित्व कम रहा है, लेकिन शिक्षा, सरकाररी पहलों और डिजि्टल कांलत ने इस परिदृशर को बदलना शुरू कर दिया है । उद्लमता और स्टा ्टअप में भागरीदाररी, तकनरीकरी उद्म और न्वाचार क्षेत् में दलित उद्मरी अब पारंपरिक व्यवसायों से आगे बढ़कर सलॉफ्ट्वेयर डे्वलपमें्ट, एआई और ई-कलॉमर्स जैसे तकनरीकरी क्षेत्ों में कदम रख रहे हैं । ' स्टैंड अप इंडिया ' जैसरी योजनाओं ने अनुसूचित जाति के उद्लमरों को बिना गारं्टरी के लोन उपल्ध कराकर तकनरीकरी व्यवसायों करी शुरुआत को आसान बनाया है । इस दिशा में दलित इंडियन चैंबर ऑफ कलॉमर्स एंड इंडसट्री तकनरीकरी और मुखरधारा के उद्ोगों में दलित यु्वाओं को ' नौकररी मांगने ्वाले के बजाय नौकररी देने ्वाला ' बनने के लिए प्रेरित कर रहा है । सरकाररी खररीद नरीलत के तहत सा्व्यिलनक उपकमों में दलित और आलद्वासरी उद्लमरों के लिए को्टा सुलनकशचत कर उनहें बाजार का एक लनकशचत हिससा प्रदान किया जा रहा है । हालांकि तकनरीकरी स्टा ्टअपस के लिए ्वेंचर कैलप्टल फंड सबसे महत्वपूर्ण होते हैं और इन पारंपरिक ने्ट्वकयों और लन्वेशकों तक दलित संसथापकों करी पहुंच में अभरी भरी कुछ बाधाएं हैं । लेकिन कौशल ल्वकास के साथ हरी तकनरीकरी संसथानों से लेकर कॉर्पोरे्ट लरीडरशिप तक दलित प्रतिनिधित्व बढ़ाने पर ल्वशेष धरान दिया जा रहा है, जो भल्वष्र के तकनरीकरी नेतृत्व के लिए नीं्व का काम कर रहा है । डिजि्टल सा्व्यिलनक अ्वसंरचना और किफायतरी इं्टरने्ट करी पहुंच ने दलित यु्वाओं को नए जमाने करी तकनरीकों का लाभ उठाने और इनो्वे्टर बनने के वरापक अ्वसर दिए हैं । मोदरी सरकार के निरंतर लन्वेश ने देश करी तकनरीकरी क्षमता को न के्वल ल्वसतार दिया है, बकलक ल्वश्व में भारत करी ल्वश्वसनरीरता को भरी मजबूत किया है ।
बारह ्वर्ष पहले, देश ने ' ल्वकसित भारत ' के संकलप को सिद्ध करने के लिए तकनरीक को अपना मुखर आधार बनाने करी एक दृढ़ यात्ा शुरू करी थरी । इसके बाद देश ने डिजि्टल
इंफ्ासट््चर के निर्माण, न्वाचार को सश्त बनाने और हर नागरिक तक तकनरीक करी पहुंच सुलनकशचत करने के लिए एक निरंतर और एकजु्ट राष्ट्रीय प्रयास किया और इसका बड़ा लाभ दलित आलद्वासरी ्वग्य के यु्वाओं को मिलने लगा है । भारत ने पूररी दुनिया के सामने यह सिद्ध करके दिखाया है कि कैसे समा्वेशन, सुलभता और किफायत को सुलनकशचत करते हुए भारत के दलित, ्वंचित ए्वं आलद्वासरी ्वग्य के साथ इतनरी बड़ी जनसंखरा के सतर पर तकनरीक का सफल उपयोग किया जा सकता है । आज भारत न के्वल ्वैश्विक तकनरीकों को अपना रहा है, बकलक एक भरोसेमंद, समा्वेशरी और मान्व-
केंद्रित तकनरीकरी ल्वकास को लेकर ्वैश्विक ल्वमर्श और बहसों को नया आकार भरी दे रहा है । ्वास्तव में देखे तो गत बारह वर्षों में भारत एक ऐसे ्टेक्ोललॉिरी इकोसिस्टम का निर्माण कर रहा है जो न्वाचार, समा्वेशिता और आतमलनभ्यरता पर आधारित है और जिसका लक्र देश के सभरी ्वग्य को साथ में लेकर चलते हुए भारत करी ' ल्वकसित भारत ' करी यात्ा को गति प्रदान करना है । पिछले बारह वर्षों करी उपलब्ध के्वल पड़ा्व नहीं हैं, बकलक यह दलित, आलद्वासरी ए्वं ्वंचित ्वग्य के साथ हरी पूरे देश को ' ल्वकसित भारत ' करी एक मजबूत तकनरीकरी आधारशिला हैं ।
नकसल मुकत भारत में दलित एवं वनवासी कलया् को मिला नया आयाम
आंतरिक सुरक्षा करी दृकष््ट से भारत ने दशकों बाद 31 मार्च 2026 को भारत ने एक ऐतिहासिक उपलब्ध हासिल करी । लगभग छह दशकों करी हिंसा के बाद, देश ्वामपंथरी उग्रवाद के चंगुल से प्रभा्वरी रूप से मु्त हो गया । यह उपलब्ध सरकार के बारह वर्षों के निरंतर प्रयासों का परिणाम है और इसका सबसे बड़ा लाभ न्सल प्रभाल्वत क्षेत्ों में रहने ्वाले दलित, आलद्वासरी, गररीब और ्वंचित ्वग्य करी जनता को मिला है ।
इस परर्वत्यन का मार्गदर्शन‘ ल्वश्वास’,‘ निर्माण’ और‘ जन कलरार’ के सतंभों द्ारा किया गया । एक संतुलित रणनरीलत के तहत निर्णायक सुरक्षा कार्य्वाइयों को दलित-आलद्वासरी बहुल ्वाले क्षेत्ों में ल्वकास और कलरारकाररी पहलों के साथ जोडा गया । प्रौद्ोलगकरी-सक्षम उपायों ने खुफिया जानकाररी, निगरानरी और समन्वय को मजबूत किया । पुन्वा्यस नरीलतरों ने हजारों न्सलियों को आतमसमर्पण कर समाज करी मुखरधारा में लौ्टने के लिए प्रेरित किया, जिनमे अधिकांश आलद्वासरी या दलित ्वग्य के थे । न्सल मु्त भारत करी यह सफलता दरीर्घकालिक शांति और ल्वकास के लिए समग् सरकार के
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