जनकृ ति अंिरराष्ट्रीय पतिक
( बाबा साहब डॉ. भीमराव
जनकृ ति अंिरराष्ट्रीय पतिका / Jankriti International Magazine( बाबा साहब डॉ. भीमराव अम्बेडकर की 125वीं जयंिी पर समतपिि अंक)
ISSN 2454-2725
माखिलाल चिुवेदी
सृष्टि में सजीव-ष्टनजीव सभी अपनी प्रष्टतपादन भारतीय मनीष्टियों ने प्राचीन काल ही गहनता से ष्टवचार-ष्टवमर्श ष्टकया है । परंपर र्ुरुआत से ही जुडी हुई हैं । भारत के प्रत्येक में ही है । लोग ष्टजसे अपनी पररपाटी कहते ह संवष्टहत होती है, वहीं लोक-परंपराओं को वतशमान में माध्यमों का जो स्वरूप देखने क पारंपररक माध्यम हमारे जीवन में महत्वपूणश आष्टद के ष्टलए सेतु का काम करते हैं । पारंपर बष्टकक सामाष्टजक संवाद तथा सामाष्टजक सह मान्यताओं की एक ष्टवर्ाल श्ृ ंखला ष्टमलती है । परंपराएं हर ष्टस्थष्टत-पररष्टस्थष्टत में अनुकरण
संस्कृ ष्टत मानव की वह जीवन र्ैली सजाया और संवारा है । लोक-संस्कृ ष्टत, लोक बौष्टिक कु र्लता के साथ-साथ रृदय की स गया है । डा. श्यामाचरण दुबे ने भी अपनी प प्रकृ ष्टत के सामान्य रूप से संतुि नहीं रहा ह प्रवृष्टि रही है ।” 2 मानवीय इष्टतहास में र्ायद अलग-थलग रहा हो । वहीं कोई भी ष्टचंतन सकता । ‚ सौन्दयश के प्रष्टत मानव का रुझान संसार के प्रत्येक भाग में उसने कला का क ष्टकया है । मानव की कलात्मक चेतना के र्ा
Vol. 2, issue 14, April 2016. व ष 2, अंक 14, अप्रैल 2016.
Vol. 2, issue 14, April 2016.