Jankriti International Magazine/ जनकृसत अंतरराष्ट्रीय पसिका
सामामजक और सांस्कृ मतक समस्याओ ं पर भी गहरी
नज़र रखते हैं। उन्हें अपनी प स् ु तक टेम्स में बहती गंगा
की धार के मलए पहले पद्मानंद सामहत्य सम्मान स
अलंकृत मकया गया। सत्येन्द्र श्रीवास्तव की
कमवताओ ं में गहराई है तो लेखों में मवर्षय की पकड़
एवं भार्षा का मनवााह। ममसेज जोन्स और वह गली एव
मवन्सटन चमचाल मेरी मां को जानते थे जैसे उदाहरि
इस बात का सब त ू है मक सत्येन्द्र श्रीवास्तव सही
मायने में मिमटश महन्दी सामहत्य का प्रमतमनमधत्व करत
हैं।
ISSN: 2454-2725
और संस्कृ मत के आलोक में हमारे मह द ं ी सामहत्य क
मवकास में सहयोग प्रदान कर रहे हैं।
ि द ं भ
प्रवासी सामहत्य एवं सामहत्यकार प स् ु तकें ।
इ ट ं रनेट और Wikipedia माध्यम
स्वयं लेखक और लेखक संघ स्रोत
२४)
सोहन राही मिटेन मे बसे भारतीय म ल
के मह द ं ी लेखक
है। सरे मनवासी सोहन राही इ ग ं लैण्ड में गीत और
ग़ज़ल मवधा के बेहतरीन कलाकार हैं। वे इस देश क
पहले सामहत्यकार हैं मजनकी ग़ज़लों एवं गीतों क
कै सेट एवं सी. डी. तैयार हुए। इ न ं लैण्ड के कई गायक
एवं गामयकाएं उनके गीत एवं ग़ज़लों को म च ं से भी
गा च क
े हैं। सोहन राही के अन स ु ार गीत मवधा सामहत्य
की सबसे कमठन एवं श्रेष्ठ मवधा है। उनका कहना ह
मक जब तक कोई कमव गीत नहीं रच लेता तब तक
उसका सृजनात्मक मवकास प ि ू ा नहीं माना जा सकता।
सोहन राही म च ं से अपने गीत एवं ग़ज़लों का स्वयं भी
स र ु में पाठ करते हैं। उद ा ू के अमतररक्त उनके ग़ज़ल एव
गीतों का एक स ग्र ं ह महन्दी में भी प्रकामशत हो च क
ा
है।
मनष्ट्कर्षातः इस प्रकार हम देखते हैं की प्रवासी
सामहत्यकार मिटेन में रहकर मह द ं ी परंपरा को मनरंतर
समृमद्ध कर रहे हैं और मिटेन में रहकर वहां की परंपरा
Vol. 3 , issue 27-29, July-September 2017.
वर्ष 3, अंक 27-29 जुलाई-सित ब ं र 2017