Jankriti International Magazine Jankriti Issue 27-29, july-spetember 2017 | страница 427

Jankriti International Magazine/ जनकृसत अंतरराष्ट्रीय पसिका ISSN: 2454-2725 म ब ं ु ई के मफल्म जगत से ज ड़ ु े मवमलजी को वर्षा 2003 के मलए अपने उपन्यास `सोन मछली' के मलए पद्मानंद सामहत्य सम्मान प्राप्त हो च क ा है। वे मकसी भी ग ट ु बाज़ी या वाद-मववाद का महस्सा नहीं बनते और मकसी शांत कोने में आराम से अपना काम करते रहत हैं। मवमलजी मिटेन भर के बहुत से कमव सम्मेलनों का कुशल संचालन भी कर च क े हैं। कमवताएँ मस्थमतयों पर तात्कामलक प्रमतमक्रया मात्र नहीं होती हैं। वे पहले अपने भीतर के कमव और कमवता के मवर्षय में एक तटस्थ द र ू ी पैदा कर लेते हैं। मफर होता है सशक्त भावनाओ ं का नैसमगाक मवस्फोट। उनकी कमवता पढ़कर महस स ू होता है मक जैसे वे सच की एक मनरंतर खोज यात्रा कर रहे हों।[1][2] १९) कमव-आलोचक नंदमकशोर आचाया के अन स ु ार - मह द ं ी कमवता की नई पीढ़ी में मोहन रािा की कमवता अपने उल्लेखनीय वैमशसेय के कारि अलग स पहचानी जाती रही है , क्योंमक उसे मकसी खाते म खमतयाना संभव नहीं लगता। यह कमवता यमद मकसी मवचारात्मक खाँचे में नहीं अँटती तो इसका यह अथ नहीं मलया जाना चामहए मक मोहन रािा की कमवता मवचार से परहेज करती है – बमल्क वह यह जानती ह मक कमवता में मवचार करने और कमवता के मवचार करने में क्या फका है। मोहन रािा के मलए काव्य रचना की प्रमक्रया अपने में एक स्वायत्त मवचार प्रमक्रया भी है।[1] महावीर शमाा (२० अप्रैल १९३३-१७ नवम्बर २०१०) आप्रवासी मह द ं ी लेखक थे , मजन्होंने मिटेन को अपना कायाक्षेत्र बनाया। उन्होंने मह द ं ी में एम.ए. मकया तथा लंदन य म ू नवमसाटी तथा िाइटन य म ू नवमसाटी में मॉडना गमित, ऑमडयो मवज़ अ ल एड्स तथा स्टमटमस्टक्स की मशक्षा ली। उन्होंने उद ा ू भी पढ़ी थी और वे कुशल गजलकार के रूप में भी जाने जाते थे। २०) जन्म 9 माचा 1964 (आयु 53 वर्षा) मदल्ली, भारत प्रकामशत कृ मतयाँ स प ं ामदत कर नस्ल भारतीय व्यवसाय कमव कमवता स ग्र ं ह- मोहन रािा का जन्म 1964 में मदल्ली में हुआ। व मिटेन में बसे भारतीय म ल के मह द ं ी कमव हैं और बाथ (इ न ं लैंड की समरसेट काउंटी में एक रोमन शहर) म मनवासी हैं।[1]}} उनकी कमवताओ ं में जीवन क स क्ष् ू म अन भ ु व महस स ू मकये जा सकते हैं। बाज़ार संस्कृ मत की शमक्तयों के मवरुद्ध उनकी सोच भी कमवता में उभरकर सामने आती है।[1] उनकी 'जगह' (1994), जयश्री प्रकाशन Vol. 3 , issue 27-29, July-September 2017. 'जैसे जनम कोई दरवाजा' (1997), सारा श प्रकाशन 'स ब ु ह की डाक' (2002), वािी प्रकाशन ‘इस छोर पर' (2003), वािी प्रकाशन वर्ष 3, अंक 27-29 जुलाई-सित ब ं र 2017