चरनदासी सम्प्रदाय को इसके अनुयायी शुक | ||
सम्प्रदाय ही कहते हैं । इस सम्प्रदाय के संस्थापक |
ही प्रशाखा माना है । 37 परन्तु यह राजस्थान में |
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व्यास पुत्र |
शुकदेव माने जाते हैं, तथा प्रचारक, |
आमवभू
ात एक स्वतंत्र सम्प्रदाय है, मकसी मत की
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सम्प्रदाय के प्रवताक आचाया के रूप में चरनदास की |
शाखा नहीं, इस सम्प्रदाय की अपनी अलग मान्यताएँ |
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ही प्रमतष्ठा हुई है, इनका जन्म सं० 1760 में माना गया |
हैं । 38 इस सम्प्रदाय मे‘ मनरंजन‘ शब्द का प्रयोग संत |
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है । 34 चरनदास ने मदल्ली को प्रमुख के न्द्र बनाकर |
कमवयों ने मनगु
ाि िह्म के अथा में मकया है । यह मनरंजनी
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उत्तर प्रदेश, मबहार, बंल, मध्यप्रदेश, राजस्थान तथा |
शब्द इस सम्प्रदाय के सन्तों के नाम के अन्त में |
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पंजाब में प्रचार के न्द्र स्थामपत मक,, मजनमें 52 के न्द्रों |
अवश्यमेव व्यवहृत मकया जाता हैं, जैसे हररदास |
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को प्रमुख के न्द्रों या‘ बड़ा थांभा‘ के रूप में मान्यता |
मनरंजनी, भगवानदास मनरंजनी, जगजीवन दास |
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प्राप्त हुई । इनके लगभग 52 मशष्ट्य कहे जाते हैं मजनमें |
मनरंजनी, मनोहरदास मनरंजनी प्रभृमत । हररदास |
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जुगतानंद, सहजोबाई, दयाबाई आमद प्रमुख हैं । |
मनरंजनी इस सम्प्रदाय के प्रवताक थे । इनके कई मशष्ट्य |
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चरनदास ने अपना उत्तरामधकारी जुगतानंद को बनाया |
प्रमसद्ध हुए इनके मशष्ट्यों-प्रमशष्ट्यों में जगजीवनदास, |
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था, इस सम्प्रदाय का स्थापना काल सं ॰ 1781 माना |
ध्यानदास, मोहनदास, र्षेमदास बड़े, भगवानदास, |
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गया है तथा सं० 1781 में ही चरनदास द्वारा मशष्ट्य |
मनोहरदास, पीपा, हरररामदास, अमरपुरूर्ष, सेवादास |
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परम्परा का प्रारम्भ कर इसे सम्प्रदाय का स्वरूप मदया |
प्रभृमत सन्तों के नाम उल्लेखनीय हैं । 39 |
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गया । 35 इनके द्वारा प्रवता सम्प्रदाय एक ऐसा समन्वय
का रूप था जहां दादू, दररया, मनरंजनी आमद मवमभन्न
मत, क ही मंच पर ममलते थे । इस सम्प्रदाय में मभक्षा
वृमत का, पंचदेव( मवष्ट्िु, सूया, मशव, देवी गिेश) युक्त
पूजा का मनर्षेध था परन्तु पंचदेवों में वे िह्मा, मवष्ट्िु,
महेश को मवशेर्ष प्रधानता देते थे । वास्तव में यह
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मशवनारायिी सम्प्रदाय:
सन्त मशवनारायि द्वारा मशवनारायिी
सम्प्रदाय प्रवता हुआ, मशवनारायि का आमवभ ाव
गज़ीजीपुर मजले( बमलया) में हुआ था, सम्प्रदाय के
प्रारमम्भक के न्द्र भी इसी मजले में है, इस सम्प्रदाय का
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सम्प्रदाय मनगु
ाि एवं सगुि
समन्वयात्मक स्वरूप
Vol. 3, issue 27-29, July-September 2017.
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मवस्तार प्रायः सम्पूिा भारत के प्रमुख नगरों में हो चुका
वर्ष 3, अंक 27-29 जुलाई-सितंबर 2017
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