Jankriti International Magazine / जनकृ सत अंतरराष्ट्रीय पसिका ISSN: 2454-2725
इस पंथ का वंश वृक्ष अत्यंत समृद्ध है और इस पंथ का महन्दी संत सामहत्य में अमूल्य योगदान है । इसमें यारीसाहब, उनके पाँच मशष्ट्य, के सोदास, हस्तमुहम्मद, सूफी शाह, शेखनशाह, बूलासामहब के नाम उल्लेखनीय हैं । इनके पिात् बूला सामहब के दो मशष्ट्य जगजीवन साहब तथा गुलाल सामहब का नाम आता है । गुलाल सामहब के प्रमसद्ध मशष्ट्यों में भीखा सामहब,, वं हरलाल सामहब प्रमुख हैं । इसके पिात भीखा सामहब के मशष्ट्य गोमवन्द सामहब तथा गोमवन्द सामहब के मशष्ट्य पलटू सामहब अत्यंत प्रमसद्ध रहे ।
मलूक पंथ:
इस पंथ के प्रवताक मलूकदास कहे जाते हैं, मलूक दास नाम से, एकामधक संतों का उल्लेख मवद्वानों ने मकया है, डॉ ॰ श्यामसुन्दर दास ने कबीर ग्रंथावली की भूममका में कबीरपंथी मलूकदास का विान मकया है । 16 मथुरादास की‘ मलूक पररचई‘ के
मशष्ट्यों में रामसनेही, गोमतीदास, सुथरादास, पूरनदास, दयालदास, मीरमाधव मोहन दास, हृदयराम आमद उल्लेखनीय हैं । इनके पिात् मशष्ट्य वंशावली में कृ ष्ट्िस्नेही, कान्हनवाल, ठाकु रदास, गोपालदास, कु ं जमबहारीदास, रामसेवक, मशवप्रसाद, गंगाप्रसाद, अयोध्याप्रसाद18 आमद के नाम उल्लेखनीय हैं । इनके अनंतर गद्दी समाप्त हो गई ।
सत्तनामी सम्प्रदाय:
सत्तनामी सम्प्रदाय, भाव सत्यनाम या ईश्वर से पररचय कराने वाला सम्प्रदाय है । इस सम्प्रदाय के मूल प्रवताक के मवर्षय में मनमित मववरि का अब तक अभाव है, मवद्वानो द्वारा इनका सम्बंध‘ साध- सम्प्रदाय‘ से जोड़ा गया है तो कहीं इसके प्रवताक के रूप में दादू पंथी जगजीवन दास का नाम मलया जाता है । मवद्वानो द्वारा सत्तनामी मवद्रोह की चच ा की गई है, मजसमें भाग लेने वाले अमधकतर ग्रामीि कृ र्षक थे, ये सत्तनामी लोग थे, इन लोगों का स्वभाव उत्तम था । मवद्रोह के समय ये सत्तनामी नारनौल के समीप क्षेत्र में थे, औरंगजेब ने इनका समूल मवनाश करने का प्रयत्न मकया । नारनौल क्षेत्र को सत्तनाममयों की नारनौल वाली शाखा माना जाता है । इस सम्प्रदाय का पुनःसंगठन उत्तर प्रदेश में जगजीवन साहब द्वारा हुआ, इनका बावरी पंथ के बुला सामहब तथा गोमवन्द सामहब से प्रभामवत होना चमचात रहा है लोगों की ईष्ट्य ा भावना को देखते हुए जगजीवन साहब कोटावा गए । यहीं उनका देहावसान हुआ । 19 जगजीवन साहब के चार प्रधान मशष्ट्य दूलनदास, गोसाईदास, देवीदास, एवं
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अनुसार प्रयाग
के मनकट कड़ा नामक कस्बे में
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मलूकदास का आमवभााव वैशाख कृ ष्ट्ि पंचमी सं० |
1631 में और मतरोभाव सं० 1739 में हुआ । 17 इनके |
मपता सुन्दरदास खत्री थे । बाल्यकाल से ही मलूक |
भगवद् भजनी थे, परमहत मचन्तन की उदार मचत्तवृमत्त |
के स्वामी थे । इनका मववाह भी हुआ था और एक पुत्री |
भी हुई थी, परन्तु पत्नी और पुत्री दोनों की मृत्यु हो गई |
थी । मलूकदास सांसाररक अनुभव से युक्त प्रमसद्ध |
महात्मा थे, आपकी प्रमसद्धी से प्रभामवत होकर ही गुरु |
तेगबहादुर एवं औरंगजेब ने इनसे भेंटकर इन्हें |
सम्मामनत मकया । आपके अनुयामययों की संख्या भी |
कम नहीं थी, पूवा में पुरी तथा पटना से लेकर पमिम |
खेमदास, चारपावा नाम से प्रमसद्ध हुए । दूलनदास के |
की ओर काबुल तथा मुल्तान तक इनके अनुयायी |
मशष्ट्य मसद्धदास हुए |
इनके पिात् इनके मशष्ट्य |
देखे जा सकते हैं । इनकी गद्दी एवं मत, प्रयाग, |
पहलवान दास हुए हैं, तीसरी शाखा, छत्तीसगढ़ी के |
लखनऊ, मुल्तान, आंध्र, काबुल, जयपुर, गुजरात, |
प्रवताक घासीदास कहे जाते हैं, इनके उत्तरामधकारी के |
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वृ
ंदावन, पटना, नेपाल आमद क्षेत्रों में मस्थत हैं । इनके
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रूप में उन्हीं का बेटा बालकदास सामने आता है और |
मशष्ट्यों की सही संख्या तो ज्ञात नहीं है परन्तु प्रमुख |
इनके बाद अज्जबदास का नाम आता है । 20 |
Vol. 3, issue 27-29, July-September 2017. |
वर्ष 3, अंक 27-29 जुलाई-सितंबर 2017 |