Jankriti International Magazine / जनकृ सत अंतरराष्ट्रीय पसिका ISSN: 2454-2725
उदय प्रकाि की रचना िृसि का राजनीसतक आयाम
नाम: सिनय कु मार समश्र vinaymishra. cu11 @ gmail. com
9748085097 पता: 6 / 1, क्षेत्रा चटजी लेन,
सालमकया, हावड़ा । मपन- 711106
मपछले तीन दशकों से भारत की तथाकमथत लोकतांमत्रक राजनीमत का स्वरूप पहले से कई मायनों और कई रूपों में बदला है । इस दौरान भारतीय राजनीमत में क्षेत्रीय छोटे दलों का वचास्व तेजी से बढ़ा है । सरकार के गठन में दूसरे और तीसरे मोचे ने अहम भूममका मनभाई । मबना मकसी ठोस मुद्दे, कायाक्रम और नीमत के गठजोड़ की राजनीमत और जोड़-तोड़ की राजनीमत ही राजसत्ता का चररत्र बन गया । धमा, जामत और स्थानीय मुद्दों के सहारे राजनीमत में क्षेत्रीय दलों का उभार हुआ । जन प्रमतमनमधसांसद-मवधायक खरीदे जाने लगे । व्यमक्तगत तुच्द स्वाथों के वश राजनेता सरकारें बनाने-मगराने लगे । सरकारी नीमतयों को कॉरपोरेट, देशी-मवदेशी पू ंजीपमत घराने तय करने लगे । राजनीमत का अपराधीकरि हो गया । मामफयाओं का अवैध मशकं जा, राजनीमत, प्रशासन और दैमनक नागररक जीवन पर कसता चला गया । इनमें संमदनध मकस्म के मबल्डसा और ठेके दार हैं, छोटे- बड़े उद्यमी और उद्योपमत हैं, सटोररये और प्रॉपटी का धंधा करने वाले दलाल हैं । यही लोग राजनेताओं के चहेते बन गए हैं । ये अनौमतकता, बबारता और महंस्रता की मकसी भी सीमा को लांघ सकते हैं । मकशन पटनायक ने ठीक लमक्षतत मकया है मक“ व्यापाररयों, राजनेताओं और अपरामधयों का गठजोड़ हमारी राजनीमत की मुख्यधारा बन गया है ।” 1 प्रश्न है क्या
राजनीमत में शुमचता कायम हो सके गी? सरकारी नीमतयों में पू ंजीपमतयों का हस्तक्षेप कब बंद होगा? उदय प्रकाश की रचनात्मक प्रमतबद्धता ऐसे कई सवालों से रुबरु होती है । इस दौर के राजनीमतक कलेवर और तेवर पर साथाक, सुमचंमतत, पारदशी, बेबाक और यथोमचत मटप्पिी उदय प्रकाश की कथा ्टमसे की एक महत्त्वपूिा मवशेर्षता है । यह एक प्रधान राजनीमतक लक्षि बन गया है मक राजनीमतक दल अपने वायदों, घोर्षिाओं या मेमनफे स्टों की बातों को शायद ही पूरा करते हों । इनकी बातें प्रायः खोखली होती हैं । इनकी बातें राजनीमतक लफ्फाजी से अमधक कु छ नहीं होती हैं । इसी कारि जन सामान्य के बीच राजनेताओंकी मवश्वसनीयता मनरंतर घटती जा रही है । रोचक बात यह है मक इस तथ्य से ये राजनीमतक भी पूरी तरह वामकफ होते हैं । मफर भी आत्मशोधन की बजाय जनमत को प्रभामवत करने के मलए कई हथकं डे अपनाते हैं । इस राजनीमतक मवडंबनाओं पर एक मटप्पिी में उदय प्रकाश मलखते हैं-“ मतदाता तो हर बार मकसी एक राजनीमतक दल को सजा देता है, मजसका फायदा दूसरी राजनीमतक पाटी को अपने आप ममल जाता है और वह सरकार बना लेता है । यह सच्चाई हर राजनीमतक नेता जानता है मक शायद ही कोई नागररक उस पर मवश्वास करता हो, इसमलए वह स्वयं जनता पर अमवश्वास करता है । उसके प्रमत संदेह और शंका से भरा होता है । यही कारि है मक उसे जनता का वोट पाने के मलए मसनेमा, खेल, टीवी, फै शन-नलौमर आमद इलाकों से उन लोगों को अपने प्रचार में उतारना पड़ता है, मजनकी मवश्वसनीयता, साख और लोकमप्रयता जनता के बीच उन राजनीमतक पाटी के नेताओं से ज्यादा होती है ।” 2 समाज के मवमवध क्षेत्रों में समक्रय मशहूर लोगों का राजनीमतक इस्तेमाल एक प्रचलन सा हो गया है । ऐसे लोग भी भारतीय लोकतंत्र के प्रमत अपेमक्षत दामयत्व का
Vol. 3, issue 27-29, July-September 2017. वर्ष 3, अंक 27-29 जुलाई-सितंबर 2017