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भीमराव रामजी आंबेडकर जोकि बाबासाहेब आंबेडकर के नाम से लोकवप्र्य हैं, भारती्य संविधान के मुख्य निर्माताओं में से एक थे । डलॉ. आंबेडकर एक प्रसिद्ध राजनीतिक नेता, दार्शनिक, लेखक, अर्थशासत्ी, न्या्यविद्, बहु-भाषाविद्, धर्म दर्शन के विद्ान और एक समाज सुधारक थे, जिनहोंने भारत में असपृ््यता और सामाजिक असमानता के उनमूलन के वल्ये अपना जीवन समर्पित कर वद्या ।
भारती्य संविधान के मुख्य निर्माता: बाबासाहेब आंबेडकर की कानूनी विशेषज्ञता और विभिन्न देशों के संविधान का ज्ञान संविधान के निर्माण में बहुत मददगार साबित हुआ । वह संविधान सभा की मसौदा समिति के अध्यक्ष बने और उनहोंने भारती्य संविधान को तै्यार करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई । इसके अलावा उनका सबसे महत्वपूर्ण ्योगदान मौलिक अधिकारों, मज़बूत केंद्र सरकार और अ्पसंख्यकों की सुरक्षा के क्षेत् में था ।
अनुचछेद 32 का उद्े््य मूल अधिकारों के संरक्षण हेतु गारंटिी, प्रभावी, सुलभ और संक्षेप उपचिारों की व्यवस्ा से है । डलॉ. आंबेडकर ने
सामाजिक-राजनीतिक विचारक डॉ. भीमराव आंबेडकर
अनुचछेद 32 को संविधान का सबसे महत्वपूर्ण अनुचछेद बताते हुए कहा था कि इसके बिना संविधान अर्थहीन है, ्यह संविधान की आतमा और हृद्य है । उनहोंने एक मज़बूत केंद्र सरकार का समर्थन वक्या । उनहें डर था कि स्ानी्य और प्रांती्य सतर पर जातिवाद अधिक शक्तशाली है तथा इस सतर पर सरकार उच्च जाति के दबाव में निम्न जाति के हितों की रक्षा नहीं कर सकती है । क्योंकि रा्ट्रीय सरकार इन दबावों से कम
प्रभावित होती है, इसवल्ये वह वनचिली जाति का संरक्षण सुनिश्चित करेगी ।
उनहें ्यह भी डर था कि अ्पसंख्यक जो कि रा्ट् का सबसे कमज़ोर समूह है, राजनीतिक अ्पसंख्यकों में परिवर्तित हो सकता है । इसवल्ये ' वन मैन वन वोटि ' का लोकतांवत्क शासन प्या्षपत नहीं है और अ्पसंख्यक को सत्ा में हिससेदारी की गारंटिी दी जानी चिावह्ये । वह ' मेजररटिेरर्यवनज़म सिंड्ोम ' के खिलाफ थे और
उनहोंने अ्पसंख्यकों के वल्ये संविधान में कई सुरक्षा उपा्य सुनिश्चित वक्ये ।
भारती्य संविधान वव्व का सबसे अधिक व्यापक और विशाल संविधान है क्योंकि इसमें विभिन्न प्रशासनिक विवरणों को शामिल वक्या ग्या है । बाबासाहेब ने इसका बचिाव करते हुए कहा कि हमने पारंपरिक समाज में एक लोकतांवत्क राजनीतिक संरचिना बनाई है । ्यवद सभी विवरण शामिल नहीं होंगे तो भविष्य में
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