समाज
भी वंचित हो सकतरा है, किनतु एक ब्राह्मण कभी दलित नहीं हो सकतरा । इसलिए दलित शब् वंचित शब् के समरानराथ्म् नहीं प्योग हो सकतरा है ।
डॉ शास्त्री के अनुसरार दलित समस्या आर्थिक समस्या इसलिए नहीं है कयोंकि करोड़ों की संपत्ति ्रा स्वामी होते हुए भी एक दलित जराति के वयसकत को धनवरान दलित अथवरा पैसे वरालरा दलित ही ्िरा जरातरा है । इसी प्रकार पढ़-लिखकर एक उच्च मेरर्ट को प्रापत दलित जराति के वयसकत को पढ़रा- लिखरा दलित, दलित िराक्टर, दलित इंजीनियर के ही रूप में समबोतधत कियरा जरातरा हैI डॉ बी आर आंबेडकर को एक पढ़रा-लिखरा दलित के सराथ दलितों ्रा मसीिरा ही ्िरा गयरा । रराजनीतिक रूप से यदि देखरा जराए तो दलित जराति ्रा एक सदसय सरांसद, विधरायक, रराजनीतिक दलों ्रा प्रातध्रारी, मंत्री यरा राष्ट्रपति इत्यादि भी बन जरातरा है किनतु फिर भी उसकी पहचरान दलित ही बनी रहती है । ््पनरा कीजिए कि राष्ट्रपति जैसे पदों पर पहुंचने के उपररांत भी एक दलित जराति ्रा सदसय“ दलित राष्ट्रपति” के रूप में ही चचरा्म ्रा विषय बनरा रहतरा है ।
डॉ शास्त्री ने ्िरा कि यदि तव्रास को भी आधरार मरान लियरा जराए तो दलित समस्या ्रा
उन्मूलन उपर् युकत उ्रािरणों द्वाररा सपष्ट रूप से असफल प्तीत होतरा हैI इसलिए यह तथ्यातम् निष्ि्म है कि दलित समस्या आर्थिक, शैक्षणिक यरा रराजनीतिक नहीं बल्् सरामरातज् है । ऐसे में दलित समस्या ्रा समराधरान सरामरातज् सीमरा के अंतर्गत समराज में स्थापित मरानसिकतराओं को बदलने के उपररांत ही निकल सकेररा । इसलिए सर्रार हो यरा नेतरा, उनिें दलित समस्या के समराधरान के लिए सरामरातज् ्राय्मक्रमों, उपबंधों एवं समराज की मरानसिकतराओं को परिवर्तित करने की दिशरा में चिंतन करने की आवशय्तरा है । सव्मप्थम दलित शब् भरारत में 1931 की जनगणनरा में अंग्रेजों द्वाररा " डिप्ेसि क्लास " के रूप में प्योग हुआ । ्रालरांतर में डॉ आंबेडकर ने इसे मररा्ठी में " दलित " शब् के रूप में प्योग कियरा । असपृशय यरा असवचि वयवसराय आज भी भले ही समराज ने स्वीकार कर लियरा हो किनतु सैकड़ों वर्ष पहले स्वाभिमरानी हिन्ुओं( ब्राह्मण एवं क्षत्रियों) को विदेशी शरासकों के दुभरा्मवनरा और आक्रोशवश इस श्रेणी में लरायरा गयराI असीमित उतपीिन एवं अत्याचरार सहकर भी हिन्दू बने रहे मिरान हिन्दू स्वाभिमरानी एवं धमरा्मतभमरातनयों को मध्यकाल के सवतंत्रतरा सेनरानी की मरानयतरा मिलनी चरातिए, न कि उनिें निम्न जराति ्रा कहकर
उनके त्याग, बतल्रान एवं हिन्दू धर्म रक्षरा के मिरान योर्रान को न्रारने अथवरा उसकी उपेक्षरा की आवशय्तरा है ।
्राय्मक्रम की अधयक्षतरा िराँ बी आर आंबेडकर सरामरातज् विज्ञान विशवतवद्यालय की कुलपति श्रीमती आशरा शुक्ला ने की । कुलपति ्रा पदभरार ग्रहण करने के उपररांत श्रीमती शुक्ला लररातरार विशवतवद्यालय को जनतरा के मधय पहुंचने ्रा ्राय्म कर रही हैं । उनिोंने विशवतवद्यालय में ऐसे कई शोध और अन्यानय कार्यं करराये हैं जो सीधे और स्टीक रूप से जनकल्याण की अपेक्षराओं को पदूण्म करते हैं और विशवतवद्यालय को भी जनकल्याण में सराथ्म् बनरा रही हैं । उनके ्राय्म्राल में ऐसे सैकड़ो शोध ्राय्म हुए हैं, जिस्रा सरामरातज् रूप से मदू्यराङ्कन यदि कियरा जराये तो विशवतवद्यालय के सरामरातज् सरो्रार को प्रकट करतरा हुआ दिखराई देतरा है । उनिोंने डॉ शास्त्री ्रा स्वागत करते हुए ्िरा कि डॉ शास्त्री के विचरारों के मराधयम से विशवतवद्यालय में डॉ आंबेडकर पी्ठ विविध दृश्टिकोणो से शोध ्राय्म करेगी और डॉ आंबेडकर के विचरारों के आधरार पर सुसंरत्ठत समराज की संरचनरा में अपनी भदूतम्रा तय करेगी ।
्राय्मक्रम में एम एस तवसशवद्यालय के पदूव्म प्ोफ़ेसर देवल्रास गुप्ता ने ्िरा कि डॉ. आंबेडकर के चिंतन एवं नीतियों में हमेशरा राष्ट्र एवं समराज ्रा सर्वांगीण तव्रास ही रिरा है । सरामरातज् कुरीतियों एवं बुरराइयों को ि्टरा्र वे एक सवसथ समराज ्रा तनमरा्मण करनरा चरािते थे जिसके लिए उनिोंने अपनी संवैधरातन् नीतियों में समरसतरा ्रा समरावेश करने ्रा पदूररा प्यरास कियरा । हमें उनके सपनों ्रा राष्ट्र बनराने के लिए उनके ्कृतितव को अचिे से समझने एवं पढ़ने की जरूरत है । ्राय्मक्रम में संयुकत राष्ट्र ह्यूमन से्टेलमें्ट ्राय्मक्रम के वरिष्ठ सलराि्रार मरा््फणिेय रराय, विवि के कुलसचिव डॉ. अजय वमरा्म, डॉ. मनीिरा सकसेनरा, डॉ. मनोज कुमरार गुप्ता ने भी अपने विचरार रखे । ्राय्मक्रम में डॉ. ररामशंकर सहित, सिरायक कुलसचिव संध्या मरालवीय, डॉ. दीपक ्रारभरारी सहित कई शिक्षक, अतध्रारी मौजदू् रहेI �
28 iQjojh 2026