की प्तक्रयरा है, जो आजीवन चलती रहती है । तशक्षरा जनम के सराथ ही प्रारंभ हो जराती है । तशक्षरा, संस्कृत, संस्कार और संस्कृति भरारतीय परिवेश में तव्रास ्रा आधरार हैं । इनमें से किसी की भी उपेक्षरा करके हम वयसकत और राष्ट्र ्रा तव्रास नहीं कर सकते । यही ्रारण है कि तशक्षरा संस्थानों में ऐसे किसी भी नियम-्रानदून को लरारदू नहीं कियरा जरानरा चरातिए जो िरात्रों को जराति के आधरार पर बरां्टने में किसी भी प्रकार से सिरायक हो ।
समानता और समावेशी वशषिा
समरानतरा और समरावेशी तशक्षरा यह दोनों तशक्षरा के अतध्रार ्रा वह मदूलभदूत अंग हैं, जो एक समरावेशी, सफल एवं गतिमरान समराज ्रा तनमरा्मण करते हैं । समरानतरा और समरावेशी तशक्षरा
मिलकर एक ऐसी तशक्षरा प्णराली ्रा तनमरा्मण करते हैं, जिरां शरारीरिक, मरानसिक, आर्थिक यरा सरामरातज् पृष्ठभदूतम पर विचरार किए बिनरा सभी बच्चों को एक ही छत के नीचे समरान अवसर, संसराधन और गुणवत्तरापदूण्म तशक्षरा मिलती है । यह सरामरातज् न्याय को बढ़ावरा देती है और िरातशए पर पिे समदूिों को मुखयधराररा में लरा्र एक समरावेशी समराज बनराती है । लेकिन समरानतरा एवं समरावेशी तशक्षरा की अवधरारणरा के सतर पर यदूजीसी के नए नियम कहीं से भी स्राररातम् नहीं प्तीत होते हैं । वरासतव में उच्च तशक्षरा क्षेत्र में समरानतरा के नराम पर लरारदू किए जराने वराले नए नियमों ने ' समरानतरा ' और ' समरावेशी तशक्षरा ' के सराधन के रूप में प्सतुत की नीति एक वर्ग के तीव्र विरोध, व्यापक असंतोष और बढ़ते सरामरातज् तनराव ्रा स्ोत बन गई । ससथति
इतनी तबरि गई कि उच्चतम न्यायरालय को हसतक्षेप करते हुए नए नियमों पर अंतरिम रोक लररानी पिी । यह न्यायिक विरराम यह रेखरांकित करतरा है कि तशक्षरा जैसे संवेदनशील क्षेत्र में अतयतध् यरा असंतुलित प्योग किस प्रकार देश को खतरनरा् दिशरा में ले जरा सकते हैं । ऐसे में उच्चतम न्यायरालय के हसतक्षेप को नीति ्रा प्तयक्ष समर्थन यरा अस्वीकृति नहीं मरानरा जरानरा चरातिए । बल्् यह एक संवैधरातन् चेतरावनी है कि समरानतरा के नराम पर बनराए गए नियम यदि असपष्ट हों, दुरुपयोग की संभरावनरा हो और सरामरातज् सद्भराव को भंग करते हों-तो न्यायिक जरांच से परे नहीं रह सकते । यह निर्णय केंद् सर्रार को आतमतनरीक्षण ्रा ऐसरा अवसर प्रदान करतरा है, जिसे सुधरार के रूप में देखरा जरा सकतरा है । �
iQjojh 2026 23