Feb 2026_DA | Page 10

fo ' ks " k

कि बरािरी आडंबर से ।
भक्त आंदोलन में संत रविदास का योगदान
संत रतव्रास भसकत आंदोलन के प्मुख सतंभों में से एक थे । उनिोंने सरल भरािरा में ऐसे पदों की रचनरा की जो आम जनमरानस को सहज ही समझ में आ जराते थे । उनके भजन और दोहे आज भी उतने ही प्रासंगिक हैं । उन्रा प्तसधि कथन—“ मन चंररा तो ््ठौती में गंररा”, यह संदेश देतरा है कि मन की पवित्रतरा ही सबसे बड़ा तीर्थ है । गुरु ग्रंथ सरातिब में भी संत रतव्रास के अनेक पद संकलित हैं, जो उनकी मिरानतरा और व्यापक प्भराव को ्शरा्मते हैं । वे केवल हिं्दू समराज तक सीमित नहीं रहे, बल्् उनके विचरारों ने सभी धमगों और वरगों के लोगों को प्भरातवत कियरा ।
सामाजिक समानता और मानवता का संदेश संत रतव्रास ्रा सबसे बड़ा योर्रान
सरामरातज् समरानतरा ्रा संदेश है । उनिोंने खुलकर जरातिवरा्, छुआछूत और सरामरातज् भेदभराव ्रा विरोध कियरा । उनके अनुसरार सभी मनुषय समरान हैं और ईशवर की दृष्टि में कोई ऊँच-नीच नहीं है । उनिोंने ऐसे समराज की ््पनरा की जिराँ प्ेम, समरानतरा और न्याय हो । उन्रा“ बेगमपुररा” ्रा विचरार एक आदर्श समराज की परर््पनरा करतरा है, ऐसरा नगर जिराँ कोई दुख, भय यरा भेदभराव न हो । आज के समय में, जब समराज में फिर से असमरानतरा और वैमनसय की प्वृत्तियराँ दिखराई देती हैं, संत रतव्रास के विचरार हमें सही दिशरा दिखराते हैं ।
रतव्रास जयंती के अवसर पर देशभर में प्भरात फेरियराँ, भजन-कीर्तन, सतसंर और शोभरायरात्रराएँ तन्राली जराती हैं । श्रद्धालु संत रतव्रास के मंदिरों में जरा्र पदूजरा-अर्चनरा करते हैं । उनके जीवन और उपदेशों पर प्वचन होते हैं तथरा लंगर और सेवरा कार्यों ्रा आयोजन कियरा जरातरा है । इस दिन लोग आपसी भराईचरारे और सेवरा भरावनरा को विशेष रूप से अपनराने
्रा सं््प लेते हैं । वरारराणसी ससथत श्री गुरु रतव्रास जनमसथली मंदिर में इस दिन विशेष आयोजन होते हैं, जिराँ देश-विदेश से श्रद्धालु पहुँचते हैं ।
आज के संदर्भ में रविदास जयंती का महति
रतव्रास जयंती केवल एक धरातम्म् पर्व नहीं है, बल्् यह सरामरातज् चेतनरा ्रा उतसव है । यह हमें यरा् दिलराती है कि सच्ची भसकत वही है जो मरानव को मरानव से जोिती है । संत रतव्रास ्रा जीवन इस बरात ्रा प्मराण है कि परिससथतियराँ चरािे जैसी भी हों, यदि विचरार ऊँचे हों तो वयसकत समराज को नई दिशरा दे सकतरा है । संत रतव्रास ने अपने विचरारों, भसकत और आचरण से समराज में प्ेम, समरसतरा और समरानतरा की अलख जरराई । रतव्रास जयंती हमें उनके दिखराए मरार्ग पर चलने, भेदभराव त्यागने और मरानवतरा को सववोपरि रखने की प्ेरणरा देती है । �
10 iQjojh 2026