अधिकार समझते है और अपने आपको अहिंसा महातमा बुद्ध का मश्र बताते हैं । यह क्मीर के पाक समर्थक आतंकियों को क्रांतिकारी और भारतीय सेना को बलातकारी बताते हैं । इनके लिए होली , दिवाली तो प्रदूषण का पर्व होता है , जबकि ईद-बकरीद भाईचिारे का पर्व है । यह रोहिंगरा और बांगलादेशियों को देश बसाने
की वकालत करते हैं , पर देश के सिणयों को विदेशी आर्य बताते हैं । इनको हिनदू समाज की सभी मानरता अनधमि्िास और इसलाम / ईसाइयत में विज्ञान दिखता है । हिनदू देवी देवताओं की अ्लील तसिीरों को अभिवरश्त की सितंत्ता और मकबूल फ़िदा हुसैन को महान बताने वाले इस वर्ग को विदेशियों के
वेदों के अनर्गल अथयों को सही और सिामी दयाननद कृत वेदों के भा्र को असंगत एवं अपूर्ण लगता है ।
शहरी न्समलरों की निगाह में आर्य विदेशी है और मुसलमान का इस देश के संसाधनों पर पहला अधिकार है । गौमांस खाना मानवीय अधिकार , गौरक्कों को गुंडा , भगवान श्ीराम
और श्ी कृ्ण को मिथक और मुग़ल शासकों को महान और नरारमप्रर बताने में कोई शर्म नहीं आती है । इन सभी के लिए इसलामिक आक्रांता महान और छत्पति शिवाजी डरपोक / भगोड़ा हैं । यह सभी ईसाईयों के छल-कपटि से किये गए धर्मानतरण को उमचित और धर्मानतरित हिनदुओं की घर वापसी को अत्याचार
बताते हैं । इनके लिए लव जिहाद प्रेम की अभिवरश्त है और उसका विरोध अत्याचार की श्ेणी में आता है । मुसलमानों की दर्जनों औलाद पैदा होने को अधिकार और हिनदुओं द्ारा जनसँखरा नियंत्ण कानून बनाने को पिछड़ी सोचि है । यह सभी मौलवियों के अनाप- शनाप फतवों का समर्थन और तीन-तलाक पर कानून बनाने का विरोध करते हैं ।
शहरी न्समलरों के अनुसार भारत में ब्रिटिश हुकूमत को नरारमप्रर शासन एवं हिनदू सिराज की सोचि को कालपमनक हैI नवरात् के व्रत को ढोंग और इसलामिक रोज़े को महान कृतर बताते हैं , सरकार को अत्याचारी और माओवादी न्समलरों को संघर्ष करने वाला योद्धा बताते हैं । यह सभी भारत तेरे टिुकड़े होंगे , क्मीर की आज़ादी ऐसा नारा लगाने वालों का समर्थन और इनका विरोध करने वालों को भ्त कहते हैं । एनजीओ के नाम पर विदेशों से चिंदा लेकर भारत में लगने वाली बड़ी परियोजनाओं को प्रदूषण के नाम पर बंद करवाते हैं , वनवासियों को निर्धन रखकर भड़काते हैं और उनहें न्सली बनाते हैं । संयम / सदाचिार यु्त जीवन को पुरानी सोचि एवं शराब पीने , चिररत्हीन और भ््टि बनने को आधुनिक बताने वाला यह वर्ग देश , संसकृमत और सभरता के विरुद्ध जो भी कार्य हो , उसका हर संभव समर्थन करते हैं ।
यह छोटिी से सूचिी है । आप अपने समाज में रह रहे इन ' शहरी न्सलीयों ' को पहचिाने । भेड़ की खाल ओढ़े इन भेड़ियों को पिछले 70 िषयों से पोषित किया जा रहा हैं । इनके अनेक रूप है-मानवाधिकार कार्यकर्ता , वि्िमिद्ालय में मशक्क , एनजीओ धंधे वाले , लेखक , पत्कार , राजनीतिज्ञ , शोधकर्ता , छात् नेता , मचिंतक , बुद्धिजीवी , शोधकर्ता आदि । इनके समूल को नष्ट करने के लिए हिनदू समाज को संगठित होकर नीतिपूर्वक संघर्ष करना पड़ेगा ्रोंकि इनकी जड़े बहुत गहरी हैं । इस लेख को पढ़कर शहरी न्सली कौन है ? पता चिल जायेगा । पर रोमिला थापर जैसी रानी म्खी को अब भी समझ न आये ! �
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