eMag_March 2021_Dalit Andolan | страница 37

2005-06 के अनुसार इनकी कुल जनसंखरा 34122 थी । वर्तमान में इनकी जनसंखरा बढ़कर लगभग 40 हजार से अधिक हो गई है । पहाड़ी कोरवा जनजाति की उतपमत् के संबंध में ऐतिहासिक प्रमाण उपलबध नहीं है । कालोनिल डाॅल्टन ने इनहें कोलारियन समूह से निकली जाति माना है । किवदंतियों के आधार पर अपनी उतपमत् राम-सीता से मानते हैं । वनवास काल में राम-सीता व लक्मण धान के एक खेत के पास से गुजर रहे थे । पशु-पमक्रों से फसल की सुरक्ा हेतु एक मानवाकार पुतले को धनुष-बाण पकड़ाकर खेत के मेढ़ में खड़ा
कर दिया था । सीता जी के मन में कौतुहल करने की सूझी । उनहोंने राम से उस पुतले को जीवन प्रदान करने को कहा । राम ने पुतले को मनु्र बना दिया यही पुतला कोरवा जनजाति का पूर्वज था । एक अनर मानरता के अनुसार शंकर जी ने सृष्टि का निर्माण किया । ततप्चिात् उनहोंने सृष्टि में मनु्र उतपन् करने का विचिार लेकर रेतनपुर राजर के काला और बाला पर्व से मिट्ी लेकर दो मनु्र बनाये । काला पर्वत की मिट्ी से बने मानव का नाम कइला तथा बाला पर्वत की मिट्ी से बने हुये मानव का नाम घुमा हुआ । ततप्चिात् शंकर जी ने दो नारी मूर्ति
का निर्माण किया जिनका नाम सिद्धि तथा बुद्धि था । कइला ने सिद्धि के साथ विवाह किया , जिनसे तीन संतानें हुईं पहले पुत् का नाम कोल , दूसरे पुत् का नाम कोरवा तथा तीसरे पुत् का नाम कोडाकू हुआ । कोरवा के भी दो पुत् हुये । एक पुत् पहाड़ में जाकर जंगलों को काटिकर दहिया खेती करेन लगा , पहाड़ी कोरवा कहलाया । दूसरा पुत् जंगल को साफ कर हल के द्ारा सथाई कृषि करने लगा , डिहारी कोरवा कहलाया ।
भुंजिया : भुंजिया जनजाति का संकेनद्रण प्रमुख रूप से राजर के गरियाबंद , धमतरी एवं महासमुंद जिले मे है । जनगणना 2011 अनुसार छत्ीसगढ़ राजर मे भुंजिया जनजाति की जनसंखरा 10603 है । इनमें सत्ी-पुरूष लिंगानुपात 1029 है । इनकी साक्रता दर 50.93 प्रतिशत है जिसमे पुरूष साक्रता 64.19 एवं सत्ी साक्रता 38.04 प्रतिशत है । भुंजिया जनजाति की चिैखुमटिरा भुंजिया एवं मचिंदा भुंजिया दो उपजातियां है । मानरता अनुसार चिैखुमटिरा भुंजिया जनजाति की उतपमत् हलबा पुरूष एवं गोंड महिला के विवाह से माना जाता है वही रिज़ले ने मचिंदा भुंजिया की उतपमत् बिंझवार एवं गोंड जनजाति से मानी है । अनर अवधारणा अनुसार आग मे जलने के कारण इनहें भुंजिया कहा जाने लगा ।
भुंजिया जनजाति ग्रामों मे क्ेत् की गोंड , कमार आदि समुदायों के साथ निवासरत है । इनके घर सामानरतः 02-03 कमरों के होते है । घर प्रायः मिट्ी के बने होते है । फर्श की लिपाई गोबर मिट्ी से प्रतिदिन की जाती है । भुंजिया जनजाति अपने आवास की साफ-सफाई एवं सिचछता का विशेष धरान रखते है । चिैखुमटिरा भुंजिया लोग अपने घरों में पृथक से रांधा घर बनाते है जिसकी छत प्रायः घास-फूंस की होती है व दिवारे क्ेत् मे पायी जाने वाली विशिष्ट प्रकार की लाल मिट्ी से पुताई की हुई होती है । जो पृथक से दिखाई पड़ती है । इनमे रांधा घर को ’’ लाल बंगला ’’ कहा जाता है । लाल बंगला के संबंध में माना जाता है कि यहां इनका देव सथान होता है । इस रांधा घर को गोत्ज सदसर के अतिरर्त अनर कोई सपश्य नही कर सकते है । �
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