eMag_March 2021_Dalit Andolan | Página 27

घरों को धिसत कर दिया गया था , मैंने तथरों के साथ आपको यह सूचिना दी थी । ढाका में नौ दिनों के प्रवास के दौरान मैंने दंगा प्रभावित इलाकों का दौरा किया । नारायणगंज और चिंटिगाँव के बीचि रेल पटिरियों पर मनदवोष हिनदुओं की हतराओं ने मुझे अंदर से झकझोर दिया । मैंने पूिटी बंगाल के मुखरमंत्ी से मुलाकात कर दंगा रोकने के लिये जरूरी कदमों को उठाने का आग्रह किया । 20 फरवरी 1950 को मैं बरिसाल पहुंचिा । यहां की घटिनाओं के बारे में जानकर में चिमकत था । बड़ी संखरा में हिंदुओं को जिंदा जला दिया गया और महिलाओं से बलातकार किया गया । मैंने जिले के सभी दंगा प्रभावित इलाकों का दौरा किया , मधापाशा के जमींदार के घर में 200 लोगों की मौत हुई और 40 घायल थे । मुलादी में एक प्रतरक्दशटी ने बताया कि वहां 300 हिंदुओं का कतलेआम हुआ । मैंने खुद वहां नर कंकाल देखे जिनहें गिद्ध और कुत्े खा रहे थे । वहां पुरुषों की हतराओं के बाद
लड़मकरों को आपस में बांटि लिया गया । राजापुर में 60 लोग मारे गये । बाबूगंज में हिंदुओं की सभी दुकानों को लूटिकर आग लगा दी गयी । पूिटी बंगाल के दंगे में 10,000 से अधिक हिंदुओं की हतराएं हुई । अपने आसपास महिलाओं और बच्चो को विलाप करते हुए देख मेरा दिल पिघल गया और मैंने अपने आपसे पूछा , ‘ ्रा मै इसलाम के नाम पर पाकिसतान आया था '। मंडल ने अपने खत में आगे लिखा , ' पूिटी बंगाल में आज ्रा हालात हैं ? विभाजन के बाद 5 लाख हिंदुओं ने देश छोड़ दिया है । मुसलमानों द्ारा हिंदू वकीलों , हिंदू डलॉ्टिरों , हिंदू वरापारियों , हिंदू दुकानदारों के बमह्कार के बाद उनहें आजीविका के लिये पलायन करने के लिये मजबूर करना पड़ा । मुझे मुसलमानों द्ारा हिंदुओं की बच्चियों के साथ बलातकार की लगातार जानकारी मिल रही है । हिंदुओं द्ारा बेचिे गये सामान की मुसलमान पूरी कीमत नहीं दे रहे हैं । पाकिसतान में इस समय न कोई नरार है , न कानून का
राज , इसीलिए हिंदू अतरमधक मचिंतित हैं । पूिटी पाकिसतान के अलावा पश्चिमी पाकिसतान में भी ऐसे ही हालात हैं । विभाजन के बाद पश्चिमी पंजाब में एक लाख पिछड़ी जाति के लोग थे उनमे से बड़ी संखरा को बलपूर्वक इसलाम में परिवर्तित किया गया । मुझे एक लिस्ट मिली है , जिसमें 363 मंदिर और गुरूद्ारे मुशसलमों के कबजे में हैं । इनमे से कुछ को मोचिी की दुकान , कसाईखाना और होटिलों में तबदील कर दिया है । मुझे जानकारी मिली है सिंध में रहने वाली पिछड़ी जाति की बड़ी संखरा को जबरन मुसलमान बनाया गया है । इन सबका कारण एक ही है । हिंदू धर्म को मानने के अलावा इनकी कोई गलती नहीं है ' I
जोगेंद्र नाथ मंडल ने अंत में लिखा , ' पाकिसतान की पूर्ण तसिीर तथा उस निर्दयी एवं कठोर अनरार को एक तरफ रखते हुए मेरा अपना अनुभव भी कम दुखदायी और पीड़ादायक नहीं है । आपने प्रधानमंत्ी और संसदीय पार्टी के पद का उपयोग करते हुए मुझसे एक ि्तवर जारी करवाया था , जो मैंने 8 सितमबर को दिया था । आप जानते हैं मेरी ऐसी मंशा नहीं थी कि मैं ऐसा असतर और असतर से भी बुरा अर्धसतर ि्तवर जारी करूं । जब तक मै मंत्ी के रूप में आपके साथ और आपके नेतृति में काम कर रहा था मेरे लिये आपके आग्रह को ठुकरा देना मुमकिन नहीं था , पर अब मैं और अधिक झूठ दिखावा तथा असतर को अपनी अंतरातमा पर नहीं थोप सकता । मैंने अब निश्चय किया कि मंत्ी के तौर पर अपना इसतीिा दूँ । मुझे उममीद है आप बिना किसी देरी के इसे सिीकार करेंगे । आप इसलामिक सटिेटि के उद्े्र को धरान में रखते हुए अब इस पद को किसी को भी देने के लिये सितंत् हैं '।
पाकिसतान में मंमत्मंडल से इसतीिे के बाद जोगेंद्र नाथ मंडल भारत आ गये । कुछ वर्ष गुमनामी की जिनदगी जीने के बाद 5 अक्टूबर , 1968 को पश्चिम बंगाल में उनहोंने अंतिम सांस ली , लेकिन अंत समय तक उनको एक ही अफ़सोस था कि उनहोंने मुशसलम नेताओं द्ारा दिखाए सपनों पर भरोसा ्रों किया था ? �
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