eMag_June 2026_DA | Page 40

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देने ्वालरी पुसतक लगे । ्यह सब ्योजनाबद्ध रूप में लक्या ग्या । इसरी समबनध में ्वेदों में आ्य्ष- द्रल्वड ्युद्ध करी कलपना कररी गई जिससे ्यह सिद्ध हो करी आ्य्ष लोग ल्वदेशरी थे ।
बौद्ध मत को बढ़ावा
्वेदों के ल्वर्य में भ्रासनत फैलाने के पशचात ईसाई्यों ने सोचा कि दलित समाज से ्वेदों को तो छरीनकर उनके हाथों में बाइबिल पकड़ाना इतना सरल नहीं है । उनकरी इस मान्यता का आधार उनके पिछले 400 वर्षों के इस देश में अनुभ्व था । इसलिए उनहोंने इतिहास के पुराने पा्ठ को समरण लक्या । 1200 वर्षों में इसलालमक आक्रानतों के समक्ष धर्म परर्वत्षन हिनदू समाज में उतना नहीं हुआ जितना बौद्ध मता्वलरी में हुआ । अफगानिसतान, पाकिसतान, बांगलादेश इंडोनेलश्या, जा्वा, सुमात्ा तक फैला बुद्ध मत तेजरी से लोप होकर इसलाम में परर्वलत्षत हो ग्या । जबकि इसलाम करी चोट से बुद्ध मत भारत भूमि से भरी लोप हुआ, मगर हिनदू धर्म बलिदान देकर, अपमान सहकर किसरी प्रकार से अपने आपको सुरक्षित रखा । ईसाई मिशनररी ने इस इतिहास से ्यह निषकर्ष निकाला कि दलितों को पहले बुद्ध बना्या जा्ये और फिर ईसाई बनाना उनके लिए सरल होगा । इसरी कडरी में डलॉ अमबेडकर द्ारा बुद्ध धर्म ग्रहण करना ईसाई्यों के लिए ्वरदान सिद्ध हुआ । डलॉ अमबेडकर के नाम के प्रभा्व से दलितों को बुद्ध बनाने का का्य्ष आज ईसाई करते है । इस का्य्ष को सरल बनाने के लिए ल्वदेशरी ल्वसश्वद्याल्यों में महातमा बुद्ध और बुद्ध मत पर अनेक परी्ठ सथालपत लक्ये गए । ्यह दिखाने का प्र्यास लक्या ग्या कि भारत का गौर्वशालरी इतिहास महातमा बुद्ध से आरमभ होता है । उससे पहले भारतरी्य जंगलरी, असभ्य और बर्बर थे । पतंजलि ्योग के सथान पर बुद्धिसट ध्यान अर्थात ल्वपश्यना को प्रचलित लक्या ग्या । कुल मिलाकर ईसाई मिशनरर्यों का ्यह प्र्यास दलितों को महातमा बुद्ध के खूंटे से बांधने का था ।
सम्ाट अशोक को बढ़ावा
इस चरण में ईसाई मिशनरर्यों द्ारा श्री राम
चंद्र के सथान पर सम्राट अशोक को बढ़ा्वा लद्या ग्या । राजा अशोक को मौ्या्ष ्वश का सिद्ध कर दलितों का राजा प्रदर्शित लक्या ग्या और राजा राम को आर्यों का राजा प्रदर्शित लक्या ग्या । इस प्र्यास का उद्ेश्य श्री राम आर्यों के ल्वदेशरी राजा थे और अशोक मूललन्वालस्यों के राजा था । ऐसा भ्रामक प्रचार लक्या ग्या । इस प्रकार का मुख्य लक््य श्री राम से दलितों को दूर कर सम्राट अशोक के खूंटे से जोड़ना था । इस का्य्ष के लिए अशोक द्ारा कलिंग ्युद्ध के पशचात बुद्ध मत स्वरीकार करने को इतिहास बडरी घटना के रूप में दिखाना था । अशोक को महान समाज सुधारक, जनता का से्वक, कल्याणकाररी प्रदर्शित लक्या ग्या । कुएं बन्वाना, अतिथिशाला बन्वाना, सड़कें बन्वाना, रुगणाल्य बन्वाना जैसरी बातों को अशोक राज में महान का्य्ष बता्या ग्या । जबकि इससे बहुत काल पहले राम राज्य के सलद्यों पुराने न्या्यलप्र्य ए्वं चिरकाल से समरण लक्ये जा रहे उच्च शासन करी कसौटरी को भुलाने का प्र्यास लक्या ग्या । ्यह बहुत बड़ा छल था । जबकि अशोक राज के इस तथ्य को छुपा्या ग्या कि अशोक ने राज सेना को भंग करके सभरी सैनिकों को बौद्ध भिक्षुक बना लद्या ग्या और राजकोष को बौद्ध ल्वहार बनाने के लिए खालरी कर लद्या था । अशोक करी इस सनक से तंग आकर मंलत्मंडल ने अशोक को राजगद्दी से हटा लद्या था और अशोक के पौत् को राजा बना लद्या था । अशोक के छदम अहिंसा्वाद के कारण संसार का सबसे शसकतशालरी राज्य मगध कालांतर में कलिंग के राजा खार्वेला से हार ग्या था । ्यह था क्षत्रियों के हलथ्यार छरीनकर उनहें बुद्ध बनाने का नतरीजा । इस प्रकार से ईसाई्यों ने श्री राम करी महिमा को दबाने के लिए अशोक को खड़ा लक्या ।
आययों को विदेशी बताना
्यह चरण सफ़ेद झू्ठ पर आधारित था । पहले आर्यों को ल्वदेशरी और सथानरी्य मूल लन्वालस्यों को स्वदेशरी प्रचारित लक्या ग्या । फिर ्यह कहा ग्या कि ल्वदेशरी आर्यों ने मूललन्वालस्यों को ्युद्ध में परासत कर उनहें उत्र से दक्षिण भारत में भगा
लद्या । उनकरी कन्याओं के साथ जबरदस्ती ल्व्वाह लक्या । इससे उत्र भारतरी्यों और दक्षिण भारतरी्यों में दरार डालने का प्र्यास लक्या ग्या । इसके अतिरिकत नाक के आधार पर और रंग के आधार पर भरी तोड़ने का प्र्यास लक्या । इससे दाल नहीं गलरी तो हिनदू समाज से अलग प्रदर्शित करने के लिए सवर्णों को आ्य्ष और शूद्रों को अना्य्ष सिद्ध करने का प्र्यास लक्या ग्या । सत्य ्यह है कि इतिहास में एक भरी प्रमाण आर्यों के ल्वदेशरी होने और हमला्वर होने का नहीं मिलता ।
ब्ाह्मणवाद और मनुवाद का जुमला
्यह चरण बेहद आक्रोश भरा था । दलितों को ्यह दिखा्या ग्या कि सभरी स्वण्ष जालत्वादरी है और दलितों पर हज़ारों वर्षों से अत्याचार करते आ्ये है । जालत्वाद को सबसे अधिक रिाह्मणों ने बढ़ा्वा लद्या है । जालत्वाद कि इस ल्वर लता को खाद देने के लिए रिाह्मण्वाद का जुमला प्रचलित लक्या ग्या । हमारे देश के इतिहास में मध्य काल का एक अंधकारम्य ्युग
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