eMag_June 2026_DA | Seite 37

अनुचछेद-343 पंचा्यत और नगरपालिका चुना्व में आबादरी के अनुपात में अनुसूचित जाति के लिए आरक्षण करी सं्वैधानिक सुरक्षा देता है । अनुचछेद-330 में अनुसूचित जाति ए्वं जनजाति के लिए लोकसभा करी सरीटों में आरक्षण का प्रबंध । अनुचछेद-332 में राज्य करी ल्वधानसभाओं करी सरीटों में अनुसूचित जाति और जनजाति के लिए आरक्षण का प्रा्वधान करता है । अनुचछेद-335 में संघ और राज्य करी से्वाओं और लन्युक्तियों अनुसूचित जाति और जनजाति के सदस्यों का ध्यान रखा जाएगा ।
इसके साथ हरी साथ हाथ से मैला साफ करने और सिर पर मैला ढोने करी प्रथा को खतम करने के लिए 2003 में The Prohibition of Employment as Manual Scavengers and their Rehabilitation act-2013 बना्या ग्या । जिसमें हाथ से मैला साफ करने और सिर पर मैला ढोने करी प्रथा को खतम कर लद्या ग्या । अनुसूचित जनजाति में अलगा्व करी भा्वना प्रबल होतरी है । ्वह अपने सथान, भाषा, संस्कृति आदि को लेकर सं्वेदनशरील रहतरी हैं ऐसे में उनकरी इस ल्वशेषता को मद्ेनजर रखते हुए भारत सरकार कुछ क्षेत् के भ्रमण और खोजरी
गलतल्वलध्यों के लिए प्रतिबंधित कर देतरी है ्या फिर कुछ ल्वशेष लन्यम और ल्वलन्यम के तहत सहमति देतरी है जैसे कि उत्र-पू्व्ष के कुछ हिससों में घूमने के लिए आपको सरकार से स्वरीककृलत करी जरूरत होतरी है और कुछ प्रदेश ्या सथान को घूमने करी लगभग मनाहरी हरी है जैसे सेंट- सटेनलरी द्वीप समूह पर । ्यह सब लन्यम और निर्धारण जनजालत्यों के प्राककृलतक अधिकार, उनकरी सं्वेदनशरीलता और सुरक्षा को ध्यान में रखकर बनाए जाते हैं ।
अनुसूचित जालत्यों और जनजालत्यों के लिए संघ और राज्य सतर पर अनेक कल्याणकाररी ्योजनाएं संचालित हैं फिर चाहे ्वह शैक्षिक सुल्वधा मुहै्या करातरी हो अथ्वा फिर आर्थिक, राजनरीलतक और सामाजिक सहा्यता । केन्द्री्य सरकार अनुचछेद 275( 1) के अंतर्गत सहा्यता तथा अनुदान ककृलर, बाग्वानरी, लघु-सिंचाई, मृदा-संरक्षण, पशुपालन, ्वन, सहकारिता, मतस्य, गाँ्व और लघु उद्योग के लिए उपलबध करातरी है ।
आदिम जनजातरी्य समूह ल्वकास ्योजना को 17 राज्यों और एक संघ शासित प्रदेश को मिलकर 75 प्रतिशत आलद्वासरी समूह के लिए 1998-
1999 में केंद्ररी्य क्षेत् ्योजना शुरू लक्या ग्या था । इसमें आ्वास, बुलन्यादरी ढांचे का ल्वकास, शिक्षा स्वासथ्य, भूमि-ल्वकास, ककृलर-ल्वकास, पशुपालन, सामाजिक सुरक्षा, बरीमा आदि को ससममलित लक्या ग्या । 2007 और 2008 के दौरान‘ संरक्षण ए्वं ल्वकास ्योजना’ तै्यार लक्या ग्या । इसमें राज्य सरकार तथा गैर-सरकाररी संग्ठनों के बरीच प्र्यास और तालमेल करी परिकलपना करी गई । जनजातरी्य अनुसंधान संसथान ्योजना के तहत 14 अनुसंधान संसथान सथालपत किए गए । ्यह संसथान राज्य सरकार को ्योजना संबंधरी जानकाररी, अनुसंधान, मूल्यांकन, आंकडों का संग्रहण, प्रशिक्षण, संगोष्टी और का्य्षशाला का आ्योजन और सहा्यता करना । अन्य ्योजनाओं और सहा्यता में, शिक्षा में आरक्षण, छात्रवृलत्, से्वा ्व पदों में आरक्षण, आ्यु में छूट, शुलक में रर्या्यत, अनुभ्व संबंधरी अर्हता में छूट, पदोन्नति में रर्या्यतें, प्रलक्र्यातमक संरक्षण, आ्वासरी्य सुल्वधा, स्वैक्षिक संग्ठनों को सहा्यता आदि शामिल हैं ।
इस तरह आजादरी के बाद भारत के दो प्रमुख आर्थिक, सामाजिक, राजनरीलतक और सांककृलतक ्वंचित और पिछड़े समुदा्य को जिसकरी कुल- मिलाकर आबादरी लगभग 25 प्रतिशत के आस- पास है, देश के ल्वकास और मुख्यधारा में ससममलित करना बहुत जरूररी हो ग्या, क्योंकि ्यह आर्थिकरी करी परिभाषा में राषट् करी जनसंख्या ्या लोगों का समूह भर नहीं है अपितु ्यह राषट् करी पूंजरी भरी है जिसको ससममलित किए बिना न तो राषट् ल्वकास के तरफ कदम हरी रखा सकता है और न हरी सं्वैधानिक उपबंधों के तहत समानता को प्रापत लक्या सकता है । इसरीलिए आजादरी के बाद ्यह जरूररी हो ग्या कि देश करी एक-चौथाई जनसमूह के पिछड़ेपन और ्वंचना को दूर करके एक बेहतर राषट् करी कसौटरी पर खरा उतरा जाए जिसमें भारतरी्य संल्वधान के उपबंध न सिर्फ अनुसूचित जाति और जनजालत्यों को अ्वसर करी समानता देते हैं अपितु उनके लिए संल्वधान में अनेक सामाजिक, सांस्कृतिक और राजनरीलतक प्रा्वधान कर सुरक्षा भरी प्रदान करते हैं ।
( साभार)
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