eMag_June 2026_DA | Page 36

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है । इसरी तरह अनुसूचित जनजालत्यों के लिए एक‘ राषट्री्य अनुसूचित जनजाति आ्योग’ करी सथापना, जिसका प्रा्वधान भारतरी्य संल्वधान के अनुचछेद 338 ए में लक्या ग्या है । ्यह दोनों आ्योग एक सं्वैधानिक आ्योग हैं जो भारतरी्य संल्वधान के अनुचछेद में उपबंधित ्या ्वलण्षत है । इसरी को मद्ेनजर रखते हुए पहला अनुसूचित जाति आ्योग भारतरी्य संल्वधान संशोधन 89 के तहत 2004 में सूरज भान करी अध्यक्षता में गल्ठत लक्या ग्या और अनुसूचित जनजाति आ्योग के प्रथम अध्यक्ष कुं्वर सिंह बनाए गए ।
अन्य संरक्षण और सुरक्षातमक उपबंध में‘ नागरिक अधिकार संरक्षण अलधलन्यम- 1955’( The protection of civil right act-1955) और‘ अनुसूचित जाति और
जनजाति( अत्याचार लन्वारण) अलधलन्यम-1989’( Scheduled Caste and Scheduled Tribe( Prevention of Atrocities) act-1989) प्रमुख हैं । नागरिक संरक्षण अधिकार अलधलन्यम जिसे पहले असपृश्यता( अपराध) अलधलन्यम भरी कहा ग्या था और जिसे स्वतंत् भारत में असपृश्यता खतम करने और असपृश्यता को असं्वैधानिक घोषित करने के लल्या ला्या ग्या और इसके द्ारा असपृश्यता को अपराध करार लद्या ग्या और इसका प्रचार-प्रसार करने ्वालों को दंड का भागरीदार भरी माना जा्येगा । ्वहीं अनुसूचित जाति और जनजाति( अत्याचार) लन्वारण अलधलन्यम अनुसूचित जाति ए्वं जनजाति के सदस्यों के ल्वरुद्ध किए गए अपराधों
के लन्वारण के लिए ला्या ग्या, ्यह अलधलन्यम ऐसे अपराधों के संबंध में मुकदमा चलाने, परीलडत व्यक्तियों को राहत और पुन्वा्षस का प्रा्वधान भरी करता है ।
इसके साथ हरी साथ भारतरी्य संल्वधान के अन्य अनुचछेद में भरी अनुसूचित जाति और जनजालत्यों के लिए सुरक्षातमक और संरक्षणातमक उपा्य अथ्वा उपबंध किए गए हैं । अनुचछेद-15 जो भेदभा्व को व्याख्याल्यत करता है और भेदभा्व से सं्वैधानिक सुरक्षा प्रदान करता है । अनुचछेद-17 असपृश्यता को खतम करने करी बात करता है । अनुचछेद-46 अनुसूचित जालत्यों और समाज के कमजोर वर्गों के शैक्षिक और आर्थिक हितों को समर्थन देने और सभरी प्रकार के अन्या्य और शोषण से मुसकत करी ्वकालत ।
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