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ईसाई तर्शनरियों के निशाने पर दलित वर्ग

डॉ विवेक आर्य va

ग्रेजों द्ारा भारत छोड़ने पर अंग्रेज पादरर्यों ने अपना बिसतर-बोररी समेटना आरमभ हरी कर लद्या था क्योंकि उनका अनुमान था कि भारत अब एक हिनदू देश घोषित होने ्वाला है । तभरी भारत सरकार द्ारा घोषणा हुई कि भारत अब एक सेक्यूलर देश कहला्येगा । मुरझा्यें हुए पादरर्यों के चेहरे पर ख़ुशरी कि लहर दौड़ गई । क्योंकि सेक्यूलर राज में उनहें कोई रोकने ्वाला नहीं था । लद्तरी्य ल्वश्व ्युद्ध के पशचात संसार में शसकत का केंद्र ्यूरोप से हटकर अमेरिका में सथालपत हो ग्या । ऐसे में ईसाई्यों ने भरी अपने केंद्र अमेरिका में सथालपत कर लिए । उनहीं केंद्रों में बै्ठकर ्यह ल्वचार लक्या ग्या कि भारत में ईसाइ्यत का का्य्ष कैसे लक्या जा्ये । भारत में बसने ्वाले ईसाई्यों में 90 प्रतिशत ईसाई दलित
समाज से धर्म परर्वत्षन कर ईसाई बने थे । इसलिए भारत के दलित को ईसाई बनाने के लिए रणनरीलत बनाई गई । ्यह का्य्ष अनेक चरणों में आरमभ लक्या ग्या ।
शोध के माधयम से शैक्षिक प्दूषण
ईसाई पादरर्यों ने सोचा कि सबसे पहले दलितों के मन से उनके इषट दे्वता ल्वशेष रूप से श्रीराम और रामा्यण को दूर लक्या जा्ये । क्योंकि जब तक श्रीराम भारलत्यों के दिलों में जरील्वत रहेंगे तब तक ईसा मसरीह अपना घर नहीं बना पाएंगे । इसके लिए उनहोंने सुलन्योजित तररीके से शैक्षिक प्रदूषण का सहारा लल्या । ल्वदेश में अनेक ल्वश्वल्वद्याल्यों में शोध के नाम पर श्रीराम और रामा्यण को दलित और नाररी ल्वरोधरी सिद्ध करने का शोध आरमभ लक्या ग्या । ल्वदेशरी
ल्वश्वल्वद्याल्यों में उन भारतरी्य छात्ों को प्र्वेश लद्या ग्या जो इस का्य्ष में उनका साथ दे । रोमिला थापर, इरफ़ान हबरीब, कांचा इलै्यह आदि इसरी रणनरीलत के पात् हैं । शमबूक ्वध करी कालपलनक और मिला्वटरी घटना को उछाला ग्या और श्रीराम जरी के शबररी भरीलनरी और निषाद राजा के्वट से समबनध को अनदेखरी जानकर करी गई । श्रीराम को नाररी ल्वरोधरी सिद्ध करने के लिए सरीता करी अलनिपररीक्षा और अहिल्या उद्धार जैसे कालपलनक प्रसंगों को उछाला ग्या जबकि दासरी मंथरा और महारानरी कैक्यरी के साथ ्वन्वास के पशचात लौटने पर लक्ये गए सदव्य्वहार और प्रेम करी अनदेखरी कररी गई । इस प्रकार से ल्वलभन्न नकारातमक खेल खेलकर भारतरी्य ल्वशेष रूप से दलितों के मन से श्री राम करी छल्व को बिगाड़ा ग्या ।
वेदों के समबन्ध में भ्ामक प्िार
इस चरण का आरमभ तो बहुत पहले ्यूरोप में हरी हो ग्या था । इस चरण में ्वेदों के प्रति भारतरी्यों के मन में बसरी आसथा और ल्वश्वास को भ्रासनत में बदलकर उसके सथान पर बाइबिल को बसाना था । इस चरण में मुख्य लक््य दलितों को रखकर निर्धारित लक्या ग्या । ईसाई मिशनररी भलरी प्रकार से जानते है कि गोरक्षा एक ऐसा ल्वर्य है जिस से हर भारतरी्य एकमत है । इस एक ल्वर्य को समपूण्ष भारत ने एक सूत् में उग्र रूप से पिरो्या हुआ हैं । इसलिए गोरक्षा को ल्वशेष रूप से लक््य बना्या ग्या । हर भारतरी्य गोरक्षा के लिए अपने आपको बलिदान तक करने के तै्यार रहता है । उसकरी इसरी भा्वना को मिटाने के लिए ्वेद मनत्ों के भ्रामक अर्थ
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