( एचएचपी ) का इसतेमाल हुआ है , जको इन खेतों में काम करने वाले दलित बच्ों के सिास्थय कको बुरी तरह प्रभावित कर रहा है ।
अमेरिका , नीदरलैंड , यदूनाइटेड किंगडम , जर्मनी और यदूनाइटेड अरब अमीरात आदि वह गंतवय देश हैं , जहां भारतीय फूल उद्योग सबसे जयादा फूलों का निर्यात करता है । फूलों के खेत से हकोने वाली आमदनी कको देखते हुए कई छकोटी जकोत वाले किसान , भदू-सिामी और कॉरपकोरेशन फूलों की खेती की तरफ आकर्षित हको रही हैं । मांग के अनुरूप आपदूवत्स करने के लिए इन फूलों में जबरदसत तरीके से कीटनाशकों का इसतेमाल किया जाता है । बच्ों , किसानों और खुदरा दुकानदारों के जरिए कुल 109 कीटनाशकों में से 82 फीसदी अतयवधक खतरनाक कीटनाशकों की पहचान की गई है ।
वहीं , कुल 44 अतयवधक खतरनाक कीटनाशकों में से 32 ऐसे कीटनाशक पाए गए जको एक या उससे अधिक देशों में प्रतिबंधित हैं । इनमें से अधिकतर कीटनाशक मधुमबकखयों
के लिए बेहद ही घातक हैं । यहां तक की यदि इनहें सदूंघा जाए तको बेहकोशी तक आ जाए । खेती में जिन कीटनाशक का प्रयकोग किया जाता है , उसके कारन प्रजनन कको विषाकत करने वाले , कैंसर पैदा करने वाले , इंडोक्राइन यानी हॉमयोन कको बिगाड़ने वाले और जमीन व पानी में दृढ़ता के साथ टिके रहने वाले हैं । इनमें पीएएनएपी के जरिए नौ ऐसे कीटनाशकों की पहचान की गई है जको कि बच्ों के लिए बेहद घातक हैं । इनमें साइपरमेवरिन , लैमबिासैलोथ्रिन , क्लोरपाइरीफकोस , मकोनकोरिकोटकोफकोस , पैराकिाट , गलाइफकोसेट , डाइक्लोरकोस , मैन्कोजेब और पममेवरिन शामिल हैं । जानकारी हको कि पैराकिाट और क्लोरपाइरीफकोस दको ऐसे कीटनाशक हैं जको सेंट्रल इंसेकटीसाइड बकोि्ड एंड रवजसट्रेशन कमेटी के जरिए फूलों की खेती में इसतेमाल करने के लिए प्रतिबंधित हैं । इसके बावजदूद इनका इसतेमाल खेतों में पाया गया जहां बच्े काम करते हैं ।
इस मसले पर एसआरईडी की कार्यकारी निदेशक डॉ फातिमा बर्नड ने कहा , '' हम 21 वीं सदी में हैं और दुनिया के विकास की कीमत फूलों के खेतों में काम करने वाले दलित बच्ों के शकोषण पर आधारित है । यह राषट्रीय और अंतरा्सषट्रीय बाल अधिकार मानकों का सपषट उललंघन है । मुनाफाखकोर दलित बच्ों का खदून चदूस रहे हैं । ये एग्रकोकेमिकल निगम अपने सिास्थय और शिक्ा पर कीटनाशकों के कारण हकोने वाले नुकसान के साथ दलित बच्ों के भविषय कको नषट कर रहे हैं ।
अतयवधक खतरनाक कीटनाशक ( एचएचपी ) बनाने वाली कंपनियों के माल और दुकानों की सुरक्ा जांच की गई तको पाया गया कि फूलों की खेती के खेतों में उपयकोग किए जाने वाले एचएचपी के अग्रणी निर्माता सरानीय और ट्रांसनैशनल एग्रकोकेमिकल कंपनियां हैं जिनमें धानुका एग्रीटेक , सिनजेनटा , बेयर रिॉप साइंस , डॉव एग्रकोसाइंस और रैलिस इंडिया शामिल हैं । अधययन रिपकोट्ड के मुताबिक कीटनाशकों से जुड़े खुदरा दुकानों में बहुत ही सीमित जगह वयबकतगत सुरक्ा उपकरण
( पीपीई ) पाए गए जबकि केवल पांच कीटनाशक उतपादों में सरानीय भाषा में लिखित उपयकोग के वनदमेश थे ।
पैन इंडिया के सहायक निदेशक दिलीप कुमार ने कहा कि जमीनी हकीकत यह है कि फूलों की खेती में किए जा रहे खतरनाक कीटनाशकों का इसतेमाल राषट्रीय और अंतरराषट्रीय मानकों का खुला उललंघन है । खतरनाक कीटनाशकों के जद में आने वाले बच्ों के पुराने सिास्थय प्रभावों कको यह बढ़ाने वाला साबित हको सकता है । इस वर्ष के शुरुआत में सरकार ने अपने मसौदे में कुछ खतरनाक रसायनों के प्रतिबंध की बात कही थी , जको कि वनबशचत एक अचछा कदम था लेकिन यह कब लागदू हकोगा अभी तक पता नहीं है । पीएएनएपी के मुताबिक , कीटनाशक कंपनियों कको बाल अधिकारों पर संयुकत राषट्र कनिेंशन के उललंघन के लिए जवाबदेह ठहराया जाना चाहिए , जैसे कि जीवन का अधिकार , शिक्ा का अधिकार , और सिास्थय के उच्तम मानक का आनंद लेने का अधिकार हैं ।
अधययन रिपकोट्ड में सिफारिश करते हुए कहा गया है कि बालश्रम कको रकोका जाना चाहिए और ऐसे कीटनाशकों पर ततकाल रकोक लगनी चाहिए जिनका सिास्थय पर गंभीर परिणाम पड़ रहा है । इसके लिए एकशन ्लान भी बनना चाहिए । साथ ही लेबलिंग , सेफटी प्रीकॉशन और ट्रेनिंग सटैंडर्ड कको भी सखती से जांचा जाना चाहिए । सरकार कको बच्ों के सिास्थय का खयाल करते हुए वैकबलपक गैर रसायनिक फावमांग अभयास पर जकोर देना चाहिए । साथ ही उचित प्रयास नीति के जरिए उठाए जाने चाहिए । जानकारी हको कि इस अधययन में तिरवललुर जिले के 24 किसान परिवार से जुड़े बच्ों ने अधययन में भागीदारी की । यह बच्े फूलों की खेती में प्रतयक् भागीदार हैं और कीटनाशक रसायनों के सप्रे से लेकर फूलों कको तोड़ने व ढ़ोने आदि का काम आदि करते हैं । भागीदारी करने वाले बच्े दलित वर्ग से ताललुक रखते हैं ।
( साभार ) tuojh 2021 Qd » f ° f AfaQû » f ³ f ´ fdÂfIYf 27