eMag_Jan 2021_Dalit Andolan | Page 19

मोदी सरकार की नीतियों से हुआ परिवर्तन

मोदी सरकार की नीतियों से हुआ परिवर्तन

प्रधानमंत्ी नरेंद्र मकोदी ने जब ददूसरी बार देश की कमान संभाली तको राजय की दलित जनता में एक नयी उममीद पैदा हुई । उनहें लगा कि शायद अब मकोदी सरकार उनकी भी सुधि लेगी । और ऐसा ही हुआ । 5 एवं 6 अगसत-2019 कको संसद के उच् सदन राजयसभा और फिर लकोकसभा ने 370 और 35 ए कको समा्त करने पर अपनी अंतिम मकोहर लगा दी । मकोदी सरकार के इस निर्णय का पदूरे देश के साथ ही राजय की पीड़ित जनता और दलित समाज के लकोगों ने जमकर सिागत किया । उनहें लगा कि अब उनकी जिंदगी की नयी सुबह आयी है । यह फैसला उन सभी नेताओं और लकोगों पर बिजली बन कर गिरा , जको 370 और 35 ए की आड़ में दशकों से अपनी दुकान चला रहे थे । 2018 में राषट्रपति शासन के दौरान प्रधानमंत्ी नरेंद्र
मकोदी के नेतृति में केंद्र सरकार ने राजय में पंचायत चुनाव कराने का निर्णय लिया था । पंचायत चुनाव में जनता ने खुल कर भाग लिया । इसका लाभ यह हुआ कि राजय के हालात में परिवर्तन की प्रवरिया शुरू हको गयी ।
राजय में हुए डीडीसी चुनाव में भाजपा ने विरकोधी गुपकार गठबंधन सहित अनय दलों के अपेक्ा सर्वाधिक 75 सीट में विजय हासिल की है । इसी तरह नेशनल कांफ्ेंस कको 67 , पीडीपी कको 27 और कांग्रेस सिर्फ 26 सीट हासिल कर पायी । चुनाव में 50 निर्दलीय उममीदवार में कई उममीदवार भाजपा के समर्थन से विजयी हुए । चुनाव के आकड़े इस बात के सपषट गवाह हैं कि भाजपा कको अनय सभी दलों की अपेक्ा िकोट मिले । गौर करने लायक तथ्य यह है कि भाजपा कको हराने के लिए जिस गुपकार गठबंधन कको बनाया गया , उसमें शामिल हुए आठ दलों का एकमात् लक्य चुनाव में भाजपा कको हराना था , जिसमें कांग्रेस भी बहार से अपनी भदूवमका का
निर्वहन कर रही थी । गुपकार गठबंधन में शामिल दलों कको पता था कि वह अकेले न तको भाजपा का मुकाबला कर सकते हैं और न ही भाजपा कको हरा सकते हैं ।
फ़िलहाल राजय में डीडीसी चुनाव के परिणाम ने आम जनता में लकोकतांवत्क वयिसरा के प्रति जको विशिास पैदा किया है , वह भारतीय लकोकतंत् की बड़ी जीत है । डीडीसी चुनाव ने अलगाववादियों के मुंह पर करारा तमाचा मारा है । राजय में पहली बार ककोई ऐसा चुनाव हुआ , जिसमें सैकड़ों सितंत् उममीदवारों ने लकोकतंत् में विशिास वयकत करते हुए भागीदारी की । इससे तुबषटकरण एवं परिवारवाद की राजनीति पर लगाम लगी है । तीसरा दशक के प्रारमभ हकोने से पहले राजय में प्रारमभ हुई विकासवादी राजनीति का सकारातमक प्रभाव तीसरे दशक में अपनी पदूण्स ऊर्जा के साथ आम जनता पर नजर आएगा , इसमें किसी कको संदेह हकोना चाहिए । �
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