मोदी सरकार की नीतियों से हुआ परिवर्तन
प्रधानमंत्ी नरेंद्र मकोदी ने जब ददूसरी बार देश की कमान संभाली तको राजय की दलित जनता में एक नयी उममीद पैदा हुई । उनहें लगा कि शायद अब मकोदी सरकार उनकी भी सुधि लेगी । और ऐसा ही हुआ । 5 एवं 6 अगसत-2019 कको संसद के उच् सदन राजयसभा और फिर लकोकसभा ने 370 और 35 ए कको समा्त करने पर अपनी अंतिम मकोहर लगा दी । मकोदी सरकार के इस निर्णय का पदूरे देश के साथ ही राजय की पीड़ित जनता और दलित समाज के लकोगों ने जमकर सिागत किया । उनहें लगा कि अब उनकी जिंदगी की नयी सुबह आयी है । यह फैसला उन सभी नेताओं और लकोगों पर बिजली बन कर गिरा , जको 370 और 35 ए की आड़ में दशकों से अपनी दुकान चला रहे थे । 2018 में राषट्रपति शासन के दौरान प्रधानमंत्ी नरेंद्र
मकोदी के नेतृति में केंद्र सरकार ने राजय में पंचायत चुनाव कराने का निर्णय लिया था । पंचायत चुनाव में जनता ने खुल कर भाग लिया । इसका लाभ यह हुआ कि राजय के हालात में परिवर्तन की प्रवरिया शुरू हको गयी ।
राजय में हुए डीडीसी चुनाव में भाजपा ने विरकोधी गुपकार गठबंधन सहित अनय दलों के अपेक्ा सर्वाधिक 75 सीट में विजय हासिल की है । इसी तरह नेशनल कांफ्ेंस कको 67 , पीडीपी कको 27 और कांग्रेस सिर्फ 26 सीट हासिल कर पायी । चुनाव में 50 निर्दलीय उममीदवार में कई उममीदवार भाजपा के समर्थन से विजयी हुए । चुनाव के आकड़े इस बात के सपषट गवाह हैं कि भाजपा कको अनय सभी दलों की अपेक्ा िकोट मिले । गौर करने लायक तथ्य यह है कि भाजपा कको हराने के लिए जिस गुपकार गठबंधन कको बनाया गया , उसमें शामिल हुए आठ दलों का एकमात् लक्य चुनाव में भाजपा कको हराना था , जिसमें कांग्रेस भी बहार से अपनी भदूवमका का
निर्वहन कर रही थी । गुपकार गठबंधन में शामिल दलों कको पता था कि वह अकेले न तको भाजपा का मुकाबला कर सकते हैं और न ही भाजपा कको हरा सकते हैं ।
फ़िलहाल राजय में डीडीसी चुनाव के परिणाम ने आम जनता में लकोकतांवत्क वयिसरा के प्रति जको विशिास पैदा किया है , वह भारतीय लकोकतंत् की बड़ी जीत है । डीडीसी चुनाव ने अलगाववादियों के मुंह पर करारा तमाचा मारा है । राजय में पहली बार ककोई ऐसा चुनाव हुआ , जिसमें सैकड़ों सितंत् उममीदवारों ने लकोकतंत् में विशिास वयकत करते हुए भागीदारी की । इससे तुबषटकरण एवं परिवारवाद की राजनीति पर लगाम लगी है । तीसरा दशक के प्रारमभ हकोने से पहले राजय में प्रारमभ हुई विकासवादी राजनीति का सकारातमक प्रभाव तीसरे दशक में अपनी पदूण्स ऊर्जा के साथ आम जनता पर नजर आएगा , इसमें किसी कको संदेह हकोना चाहिए । �
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