eMag_Jan 2021_Dalit Andolan | Page 17

गए , वह कशमीर में हको रहे सकारातमक परिवर्तन की कहानी सुनाने के लिए काफी है ।
जम्मू-कशमीर में रहने वाले दलित वर्ग के लकोगों के लिए प्रधानमंत्ी नरेंद्र मकोदी उममीद की नई किरण बन कर सामने आये हैं । कारण यह है कि कई दशकों से अलगाववाद , आतंकवाद , छद्म विकास प्रवरिया , बेरकोजगारी सहित अनेकों समसयाओं कको भुगतने वाले राजय में , सबसे विपरीत पररबसरवतयों का शिकार दलित समाज के वह लकोग बने , जिनहें शेख अ्दुलला एंड कंपनी स्जबाग दिखाकर अपना मैला उठाने के लिए पंजाब , सिंध , राजसरान एवं गुजरात से लेकर आयी थी । लगभग सात दशक के दौरान दलितों ने राजय के जिन तथाकथित रहनुमाओं का मैला ढकोया , उनहोंने ही उनकको राजय का अधिककृत नागरिक नहीं माना । इससे राजय में दलितों के बसरवत " मजहबी दास " वाली बन गयी । दलित वर्ग के लकोगों कको राजय का नागरिक नहीं सिीकार किया गयाI सफाई कर्म के अलावा उनहें ककोई अनय सरकारी या गैर- सरकारी नौकरी नहीं मिल सकती थी । वह पढ-लिख कर कितना भी यकोगय हको जाये किनतु उनके मैला ढकोने के काम कको छकोिकर बाकी सभी कायषों पर प्रतिबंध था । मजहबी नेताओं के भ्रामक सपनों के जाल में फंसकर दलित समाज ने अपने जिन मदूल अधिकारों कको खको दिया था , उन अधिकारों कको दिलाने की प्रारमभ हुई प्रवरिया ने उममीद के नए सपने जगाए हैं ।
नागरिकता के समबनध में राजय में लागदू की गई नयी नीति ने दलितों कको सबसे बड़ी राहत दी है । केंद्र सरकार के इस कदम से उनहें महजबी दासता से मुबकत मिल गई है । धारा-370 और 35 ए हटाए जाने से पहले राजय में रहने वाले दलितों की बसरवत बहुत चिंताजनक थी । अनुसदूवचत जाति और जनजाति कको भारतीय संविधान की ओर से उनके आर्थिक एवं शैक्वणक उतरान के लिए किए गए प्रावधान एवं आरक्ण का उनहें ककोई लाभ नहीं मिल रहा था । धारा-370 के कारण जम्मू-कशमीर राजय की विधानसभा के बनाए नियम ही राजय में लागदू हकोते थे और केंद्रीय नियम-कानदूनों कको लागदू नहीं किया जाता था ।
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