eMag_Jan 2021_Dalit Andolan | Seite 13

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हलाल तंत्र से हिन्ू

हो रहे हैं बेरोजगार होटल वालों को बताना होगा-मांस हलाल का है या झटके का

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दे की राजधानी दिलली में मांसाहारी भकोजन

बेचने वाले हकोटलों एवं रेस्टोरेंट कको अब
यह बताना ही हकोगा कि उनके यहां बिकने वाला मांस हलाल है या फिर झटका । दवक्ण दिलली नगर निगम ने अपने क्ेत्ावधकार वाले इलाके में मौजदूद सभी हकोटलों के लिए अनिवार्य करने जा रहा है । अब हकोटल संचालकों कको हलाल या झटका मांस की जानकारी सार्वजानिक रूप से ग्राहकों कको देनी हकोगी । दवक्ण दिलली नगर निगम की सरायी समिति ने इस प्रसताि कको मंजदूरी दे दी है । प्रसताि में रेसतरां या दुकानों से इसका अनिवार्य प्रदर्शन करने के लिए कहा गया है कि उनके द्ारा बेचा या परकोसा जा रहा मांस ' हलाल ' या ' झटका ' विधि का उपयकोग करके काटा गया है ।
जानकारी के अनुसार दवक्ण दिलली नगर निगम के अंतर्गत आने वाले चार जकोन के 104 वािषों में हजारों रेसतरां हैं । इनमें से लगभग 90 प्रतिशत रेसतरां में मांस परकोसा जाता है । लेकिन ग्राहकों कको यह नहीं बताया जाता है कि परकोसा जा रहा मांस ' हलाल ' विधि से काटा गया है या ' झटका ' विधि से । इसी तरह मांस की दुकानों में भी यह जानकारी ग्राहकों कको नहीं दी जाती है ।
नगर निगम ने यह निर्णय हिंददू धर्म और सिख धर्म के उन लकोगों कको धयान में रखकर उठाया है , जको ' हलाल ' मांस नहीं खाते हैं । हिंददू और सिख धर्म के अनुसार , ' हालाल ' मांस खाना मना है और यह धर्म विरुद्ध भी हैं । ऐसे में हिन्दू
और सिख जनता की मांग कको देखते हुए निगम ने रेसतरां और मांस की दुकानों के लिए यह अनिवार्य करने जा रही हैं कि वह उनके द्ारा बेचे जाने और परकोसे जाने वाले मांस के बारे में अनिवार्य रूप से लिखें कि यहां ' हलाल ' या ' झटका ' मांस उपल्ध है ।
फ़िलहाल यह निर्णय दवक्णी दिलली नगर नियम लेने जा रही है । लेकिन जानकर आशचय्स हकोगा कि हलाल के नाम पर देश के अंदर एक ऐसी सामानांतर अर्थ वयिसरा पैदा कर दी गयी है , जिसका नकारातमक प्रभाव हिन्दू जनता पर
जानकारी के अनुसार दक्षिण दिल्ी नगर निगम के अंतर्गत आने वाले चार जोन के 104 वाडडों में हजारों रेस्तरां हैं । इनमें से लगभग 90 प्तिशत रेस्तरां में मांस परोसा जाता है । लेकिन ग्राहकों को यह नहीं बताया जाता है कि परोसा जा रहा मांस ' हलाल ' विधि से काटा गया है या ' झटका ' विधि से । इसी तरह मांस की दुकानों में भी यह जानकारी ग्राहकों को नहीं दी जाती है ।
पड़ा है । हलाल वयिसरा के नाम पर मुबसलमों ने सुनियकोवजत तरीके से एक ऐसा तंत् विकसित कर दिया है कि वयापार करने वाले हिन्दू भी हलाल और हराम के चरिव्यूह में फंस कर रह गए हैं । हलाल के तहत मारे जाते समय जानवर कको मुबसलमों के पवित् सरल मकका की तरफ़ ही चेहरा करना हकोता हैं । हलाल मांस के काम में ‘ कावफ़रों ’ ( हिन्दू ) कको रकोज़गार नहीं दिया जाता । हलाल के नाम पर केवल एक भकोजन पद्धति ही नहीं , एक पदूरी समानांतर अर्थवयिसरा पैदा कर दी गयी है , जिसके माधयम से गैर- मुबसलमों कको न केवल हाशिये पर धकेल दिया गया है , बबलक वह मांस के कारकोबार से भर हको गए हैं । यहां धयान देने लायक बात यह भी कि हलाल कारकोबार से आने वाले धनराशि का एक हिससा जिहादी गतिविधियों पर भी खर्च किया जा रहा हैं ।
हलाल मांस के कारकोबार के कारण झटका मांस का काम करने वाले हिनदुओं में भी आम तौर पर खटिक आदि अनुसदूवचत जाति के लकोगों के लिए आर्थिक संकट पैदा हको गए हैं । बसरवत यह हको गयी कि दिलली के झटका मांस के ्लांट चलाने वाली कई संसरा हलाल तरीके से ही जानवरों कको मार कर हलाल मांस बेच रही है । हलाल के नाम पर खाद्पदाथ से लेकर सौंदर्यप्रसाधन तक एक उतपाद से उपभकोकता तक की संपदूण्स शंखला में इसलामी वयिसरा कको सरावपत करने का काम किया जा रहा है । फ़िलहाल अब हलाल तंत् कको तकोड़ने की मुहिम प्रारमभ हको चुकी है , इसके सकारातमक परिणाम जलद ही सामने आएंगे । �
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