मिलती है ।
अतः वर्तमान में हिनदी दलित हवर्यक साहितयकार अपनी धारदार कलम से कविता , कहानी , उपनयास , नाटिक , संसमरण , इतिहास एवं आलोचिना आदि विधाओं के माधयम से दलित एवं शोहर्ि समाज को प्रकाश और ऊर्जा प्रदान कर रहे है । वर्तमान में हिनदी दलित हवर्यक साहितय आनदोलन हिनदी साहितय की मुखयधारा बन चिुका है । दलितों की प्रति्ठा , सममान और अशसमिा , शिक्ा , संघर््य और संगठन , तार्किक सोचि आदि सब मुद्े जो मनु्यिा की जरूरी शितें है , जिसे दलित हवर्यक साहितय उठाता है । अतः दलित हवर्यक साहितयकार जहां अपनी कृतियों में समानता , भाईचिारा और नसल या रंग के आधार पर किसी भी विभेद को नकारता है , वहीं वह धर्म , धन , सत्ा , दर्शन और जनम के आधार पर किसी श्रे्ठिा और निकृष्टता की अवधारणा को भी असवीकार है । इस प्रकार वह केवल दलित के लिए ही नहीं वरन पूरे समाज के लिए इन विभेदों को हमटिाना चिाहता है । डॉ . आंबेडकर का मानना है कि दलितों को सवयं अपना नेतृतव
विकसित करना चिाहिए । दलित हवर्यक साहितय का नेतृतव निश्चित रूप से दलितों के हाथ में होना चिाहिए अनय्ा वह अपना असली सवरूप खो बैठेगा । यही बात साहिशतयक संगठनों पर लागू होती है । आज दलित हवर्यक पत्रिकाओं , दलित सममेलनों , गोष्ठयों , सभाओं ने भी सामाजिक चिेतना के पक् में सार्थक कार्य कर परिवर्तन का मार्ग प्रशसि किया है ।
आज का दलित हवर्यक साहितयकार आधुनिकता बोध से अपने समाज , इतिहास और परमपरा का मू्यांगन करके मानतावाद के लिए संघर््य कर रहा है । आज जिन दलित हवर्यक साहितयकारों को डॉ . आंबेडकर ने जगाया , चिेताया , शिक्ा का महतव समझाया और दुनिया को बदलने के लिए उसकी प्रस्ाहपि हवर्म वयवस्ा को तोड़ने का आह्ान किया । आज दलित हवर्यक साहितय के मूल में बोधिसतव डॉ . आंबेडकर का जीवन दर्शन है । आज भिन्न-भिन्न प्रदेशों के लोग अपनी- अपनी प्रादेशिक भार्ाओं में डॉ . आंबेडकर के सभी आनदोलनों से प्रेरित होकर आतमकथा , कविता , कहानी , उपनयास , नाटिक , गीत आदि
लिखने लगे है ।
बौद्ध धर्म सवीकार करने से पूर्व ही बोधिसतव डॉ . आंबेडकर ने तीन सूत्र – हशहक्ि बनो , संगठित रहो , संघर््य करो का नारा दिया । आज दलित हवर्यक साहितय की पृ्ठभूमि में यह तीनों सूत्र विधमान है । अतः मानव मुक्ि की लड़ाई में डॉ . आंबेडकर ने भारतीय समाज वयवस्ा पर ही प्रश्न हचिनि लगा दिया । उनिोंने भारतीय समाज वयवस्ा को नकारा ही नहीं उसके विरुद्ध संघर््य भी किया । उनके इनिीं हवचिारों में दलित हवर्यक साहितय के बीज छिपे हैं । डॉ . आंबेडकर द्ारा समपाहदि एवं प्रकाशित मूकनायक , बहि्कृि भारत , समता प्रबुद्ध भारत इतयाहद पत्रिकाओं में दलित चिेतना के सवरों को प्रमुखता दी गयी । डॉ . आंबेडकर के इनिीं हवचिारों को दलित हवर्यक साहितय की आरशमभक अवस्ा कही जा सकती है । इनिीं पत्रिकाओं द्ारा दलित हवर्यक साहितय के समबशनधि बहुत सा साहितय प्रकाशन में आया । इसलिए डॉ . आंबेडकर को दलित हवर्यक साहितय का प्रेरणा स्ोि कहा जाता है । �
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