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बांगलादेश बनाने पर तुली हुई हैं । ममता बनजजी की वोटि बैंक की राजनीति के कारण बंगाल के कई इलाके मुशसलम बहुल हो चिुके हैं और हिंदुओं का इन इलाकों में जीना भी दूभर हो गया है । राजय में अवैध रूप से रहने वाले बांगलादेशी घुसपैठियों की संखया एक करोड़ से भी जयादा हो चिुकी है । अवैध घुसपैठ ने राजय की जनसंखया का समीकरण बदल दिया है । मुशसलम तुष्टिकरण के लिए 2014 में ममता बनजजी ने अहमद हसन इमरान नाम के एक कुखयाि जिहादी को अपनी पार्टी के हटिकटि पर राजयसभा सांसद बनाकर भेजा । हसन इमरान प्रतिबंधित
अब महज 8 प्रतिशत हो गई है । जबकि पश्चिम बंगाल में मुसलमानों की आबादी 27 प्रतिशत से अधिक हो चिुकी है । इतना ही नहीं कई जिलों में तो यह आबादी 63 प्रतिशत तक है । मालदा , मुर्शिदाबाद और उत्री दिनाजपुर जिलों से बिी संखया में हिंदुओं का पलायन हो रहा है । यह वह जिले हैं , जहां हिंदू अ्पसंखयक हो चिुके हैं । 2011 की जनगणना ने खतरनाक जनसांशखयकीय तथयों को उजागर किया है । जब अखिल सिर पर भारत की हिनदू आबादी 0.7 प्रतिशत कम हुई है तो वहीं सिर्फ बंगाल में ही हिनदुओं की आबादी में 1.94 प्रतिशत की गिरावटि दर्ज की गई है , जो कि बहुत जयादा
की वह भावना सत्ा में आने के बाद सविः समापि हो गयी । लगभग 34 वर््य के वामपंथी शासन के दौरान राजय में जिस राजनीतिक हिंसा और उतपीिन की विरुद्ध अभियान चिलाकर ममता को 2011 में सत्ा हासिल हुई थी , उसी राजनीतिक हिंसा और उतपीिन को अब तृणमूल कांग्ेस अपनी सत्ा बचिाने के लिए इसिेमाल कर रही है । ममता की नीतियों में आये बदलाव का ही परिणाम है कि वह सभी नेता अब तृणमूल कांग्ेस को छोड़ने के लिए उठ खड़े हो रहे हैं , जिनिें लगता था कि शायद दीदी के नेतृतव में राजय विकास की नयी राह पर चिलने के लिए तैयार हो जायेगा ।
आतंकी संगठन सिमी का सह-संस्ापक रहा है । हसन इमरान पर आरोप है कि उसने शारदा हचिटिफंड घोटिाले का पैसा बांगलादेश के जिहादी संगठन जमात-ए-इसलामी तक पहुंचिाया , ताकि वो बांगलादेश में दंगे भिका सके । हसन इमरान के खिलाफ एनआईए और सीबीआई की जांचि भी चिल रही है ।
तुष्टिकरण के कारण घट रही है हिन्ू आबादी सविंत्रता के समय पूवजी बंगाल में हिंदुओं
की आबादी 30 प्रतिशत थी , लेकिन यह घटिकर
है । रा्ट्रीय सिर पर मुसलमानों की आबादी में 0.8 प्रतिशत की बढ़ोिरी दर्ज की गई है , जबकि सिर्फ बंगाल में मुसलमानों की आबादी 1.77 फीसदी की दर से बढ़ी है । राजय के लगभग आठ हजार से अधिक ग्ामों में एक भी हिनदू नहीं रहता अर्थात उनिें वहां से भगा दिया गया है और यह सब सिर्फ इसलिए हो रहा है कि चिुनाव में जीत हासिल करके सत्ा को कैसे बचिाया जाये ?
तृणमूल में मची भगदड़
ममता बनजजी ने जिस तरह से जनक्याण के नाम पर सत्ा हासिल की थी , जनक्याण
लेकिन मोहभंग होने के बाद रबीनद्रनाथ भट्टाचिाजजी , सुवेंदु अधिकारी सरीखे कई वरर्ठ नेता अब ममता से दूर होने लगे हैं और इसका असर जमीनी सिर पर सहरिय रहने वाले कार्यकर्ताओं में भी देखा जा रहा है । तृणमूल के वरर्ठ नेताओं का के इसिीफों ने देकर राजय की राजनीति में वह तूफान खिा कर दिया है , जिसकी आिटि पिछले कई माह से सुनाई पि रही थी और अब विधानसभा चिुनाव से पहले ममता से नाराज तृणमूल नेता जिस तरह से एक के बाद एक करके तृणमूल कांग्ेस को छोड़ रहे हैं , उससे लगता है कि राजय की नयी सरकार भाजपा के नेतृतव में ही बनेगी ।
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