हैं । पुरुलिया जिले में दो दलित युवकों त्रिलोचिन महतो और दुलाल कुमार की हतया सिर्फ इसलिए कर दी गयी ्योंकि दोनों युवक भारतीय जनता पार्टी के कार्यकर्ता थे । राजय में लगातार हो रही हिंसक घटिनाओं के कारण नगरीय से लेकर ग्ामीण क्ेत्रों में रहने वाले दलित भय के साये में जी रहा है । दलित उतपीिन के प्रति उदासीन ममता सरकार का लक्य सिर्फ अपने उस मुशसलम वोटि बैंक को बनाये रखने का है , जो मुशसलम वोटि बैंक तथाकथित दलित-मुशसलम गठजोड़ के नाम पर दलितों का उतपीिन करने में जुटिा हुआ है । सत्ा बचिाने के लिए तृणमूल कांग्ेस ने हतया , उतपीिन और हिंसा को आधिकारिक रूप से अपना राजनीतिक हथियार बना लिया है और इसके बल पर ममता बनजजी
राजय में लोकतंत्र को कलंकित करने में जुटिी हुई हैं ।
भयभीत है दलित समाज
2011 के जनगणना के अनुसार पश्चिम बंगाल में दलितों की आबादी लगभग 1.85 करोि है , जिसमें 80 लाख मतुआ संप्रदाय के लोग हैं । राजय में 84 विधानसभा सीटिें अनुसूहचिि जाति और जनजाति के लिए आरहक्ि हैं । देश का यह वह राजय भी है , जहां हिंदू जनसंखया दूसरे दजदे के नागरिकों के रूप में रह रही हैं । अपरोक् रूप से ममता सरकार ने राजय को उदारतापूर्वक उग्वादी और आरिामक इसलामवादियों के हाथों में सौंप दिया गया है । इसलाहमक उतपीिन और दमन का शिकार
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