Dec 2025_DA | Seite 35

ओबीसी नायकों ने किया दलित चेतना का रर्कास

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मारे देश में जितने भषी सांसकृवतक आंदोलन हुए, उनमें ओबषीसषी नायकों कषी भूमिका बहुत महतिपूर्ण रहषी है । सामाजिक परिवर्तन में उनके योगदान को नकारना बेमानषी होगा । बहुजन समाज के प्रवकता और आधारसतंभ दोनों डलॉ आमबेडकर रहे हैं । इसके मद्ेनजर अगर डलॉ आमबेडकर से पहले के ओबषीसषी नायकों पर बात कषी जाए तो उनहोंने दलित आंदोलन के जरिए जो सबसे पहला काम किया वह धार्मिक
वर्चसि को तोडऩे का था । चूंकि तब समाज में जाति, धर्म, संप्रदाय कषी श्रेषठता के बोध तले रिाह्मणवादषी वयिसथा कायम थषी, इसलिए सामाजिक, आर्थिक और धार्मिक विषमता बहुत बुरषी तरह फैलषी हुई थषी । ओबषीसषी समाज से जो नायक निकले, उनहोंने इस विषमता को तोडऩे के लिए रिाह्मणवाद और सामंतवाद के खिलाफ आवाज उठायषी । चूंकि रिाह्मणवादषी विचारधारा कषी पोषक सामंतवादषी वयिसथा होतषी है, इसलिए सामाजिक विषमता को खति
करने के लिए इसके खिलाफ आवाज उठनषी भषी जरूरषी थषी । रिाह्मणवाद वर्ण वयिसथा का समर्थन करने के साथ-साथ मनुषय के ऊपर मनुषय कषी श्रेषठता का समर्थन करता था और आदिषी को आदिषी से अलग करता था । इसषी कारण धार्मिक, सामाजिक और आर्थिक शोषण के खिलाफ आंदोलन कषी जरूरत महसूस हुई ।
एक होता है राजनषीवतक आंदोलन और दूसरा होता है सांसकृवतक आंदोलन । राजनषीवतक आंदोलन समय-समय पर लोगों ने किया ।
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