Dec 2025_DA | Seite 30

समाज

डॉ पुनीत बिसारिया vk

दिवासषी समाज वासति में एक ऐसा समाज है, जिसने अपनषी परमपराएं, संसकार और रषीवत- रिवाज संरवक्त रखे है । लेकिन अपने जल, जंगल-जिषीन में सिमटा यह समाज शैवक्क आर्थिक रूप से पिछड़ा होने के कारण राषट्र कषी विकास यात्ा के लाभों से वंचित है । यह सच है कि दलित तबका शिक्ा, विकास तथा धनार्जन के मूलभूत अधिकारों से वंचित रखा गया, किनतु ऐतिहासिक तथय यह है कि अंग्ेजों को भारत से

आरदर्ासियों के सशस्त्र रर्द्ोह की उपेक्ा

खदेड़ने के लिए पहला विद्रोह तिलका मांझषी ने 1824 में उस समय किया था, जब उनहोंने अंग्ेज़ कमिश्नर क्लीवलैणड को तषीर से मार गिराया था । 1765 में खासषी जनजाति ने अंग्ेज़ों के विरूद्ध विद्रोह किया था । 1817 में खानदेश आनदोलन, 1855 में संथाल विद्रोह तथा 1890 में बिरसा मुंडा का आनदोलन अंग्ेज़ों के विरूद्ध आदिवासियों के संघर्ष कषी गौरव गाथाएं हैं, किनतु दुर्भागय कषी बात है कि इतिहाकार 1857 को हषी नवजागरण का प्रसथान बिनदु मानते हैं और आदिवासियों के सशसत् विद्रोह कषी उपेक्ा कर
देते हैं ।
यह अतयनत क्ोभ कषी बात है कि जिन आदिवासियों ने भारतभूमि को अंग्ेज़ों के चंगुल से बचाने के लिए संघर्ष छेड़ा, उनहीं दषीन-हषीन अबोध आदिवासियों को सिाधषीनता मिलने के बाद से हषी विकास के नाम पर उनके जल, जंगल और जिषीन से खदेड़ने का अभियान शुरू कर दिया गया । परिणाम यह हुआ कि जिन जंगलों में आदिवासषी पर्यावरण के साथ एकातिता सथावपत करते हुए निवास किया करते थे, उनहें विकास कषी आवशयकता के नाम पर उजाड़
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