Dec 2025_DA | Page 29

85 लाख उज्िला गैस और 75 लाख आयुषिान कार्ड दिए हैं । किसान समिान निधि द्ारा 85 लाख किसानों को 17 हजार करोड़ रुपये कषी मदद और गरषीब कलयाण योजना से 8.7 करोड़ परिवारों को मुफत राशन दिया है । गरषीब कलयाण के इन प्रयासों से आठ िषगों में बिहार कषी‘ आकांक्षी’ जनता अब‘ लाभार्थियों’ में परिवर्तित होकर मजबूतषी के साथ नरेनद्र मोदषी के साथ खड़षी है । धयान रहे कि केंद्रषीय योजनाओं के अधिकांश लाभाथजी पिछड़े और दलित समाज से आते हैं ।
महागठबंधन के पक् में एक तर्क उसके सामाजिक आधार को लेकर दिया जाता है, जिसमें 13 प्रतिशत सिणगों को छोड़ सभषी जातियों और मुससलिों को महागठबंधन के खाते में डालकर 15-85 कषी लड़ाई का नारा दिया जाता है । इस आकलन के अनुसार लगभग 30 प्रतिशत मुससलि और यादव के ऊपर नषीतषीश कुमार के कारण महागठबंधन में लगभग 53 प्रतिशत पिछड़ों और दलितों के अतिरिकत वोट जोड़े जाते हैं । जिषीनषी हकषीकत भिन्न है, कयोंकि 2014 के आम चुनावों में अकेले लड़ने पर जदयू का मत प्रतिशत 15.8 प्रतिशत रहा था और 2020 में भाजपा के साथ चुनाव लड़ने
के बावजूद जदयू को अपनषी सषीटों पर सिर्फ 32.8 प्रतिशत वोट मिले, जबकि भाजपा के हिससे 10 प्रतिशत अधिक 42.8 प्रतिशत वोट आए । इससे सपषट है कि जदयू का कथित पिछड़ा, अतिपिछड़ा और दलित जनाधार जुमले के सिवा और कुछ नहीं । उपचुनावों में भाजपा को मोकामा और गोपालगंज में रििशः 42.2 और 41.6 प्रतिशत वोट मिले, जबकि यहां सिणगों कषी संखया 18 और 15 प्रतिशत हषी है । सपषट है बड़ी संखया में पिछड़ों और दलितों ने भाजपा को वोट दिया ।
राजनषीवत में सामाजिक सिषीकरण अंकगणित नहीं, बसलक रसायनशासत् के आधार पर बनते हैं । 1990 से 2005 के बषीच बिहार कषी राजनषीवत में यादव और मुससलि समाज का दबदबा रहा, जिसके कारण अनय सभषी वर्ग हाशिये पर रहे । नषीतषीश कुमार का उदय इसषी पृष्ठिभूमि में गैर- यादव और मुससलि के समर्थन से हुआ । दूसरषी ओर 2005 से 2022 तक( बषीच में 2015-17 को छोड़कर) यादव और मुससलि हाशिये पर रहे । राजद और जदयू के मिलन से उनके सामाजिक आधार का मिलन सामाजिक अंतर्विरोध के कारण संभव नहीं है ।
बिहार में एक लंबे समय तक भाजपा को
सिणगों कषी पाटजी बताकर अनय िगगों में भ्रांति पैदा कषी गई, लेकिन 2014 के आम चुनाव के बाद भाजपा ने इस भ्रांति को दूर करने के प्रयास किए हैं । आज भाजपा के प्रदेश अधयक् और विधान परिषद में नेता प्रतिपक् पिछड़े वर्ग के हैं । पिछलषी सरकार में दोनों उपमुखयिंत्री पिछड़े थे और 2015 कषी विधानसभा में नेता प्रतिपक् भषी पिछड़े थे । भाजपा टिकट वितरण में भषी लगातार पिछड़ों कषी भागषीदारषी बढ़ा रहषी है । पिछड़े वर्ग से आने वाले भाजपा के सिवोच्च नेता नरेनद्र मोदषी के नेततृति में आज बिहार भाजपा का कलेवर पूरषी तरह बदला दिखता है । यह विपक् कषी पिछड़ों के ध्रुवीकरण कषी रणनषीवत को कुंद करने में सक्ि है ।
नषीतषीश कुमार कषी पषीएम पद के लिए विपक् के साझा उम्मीदवार कषी दावेदारषी के विफल प्रयास के बाद 2024 में वोटरों के पास भाजपा के अतिरिकत कोई और विकलप नहीं बचता । उपचुनावों के परिणाम और पिछले सात िषगों में बिहार कषी राजनषीवत में आए आमूलचूल परिवर्तन के आधार पर यह कहा जा सकता है कि आगािषी लोकसभा चुनावों में महागठबंधन द्ारा भाजपा को कमजोर करके आंकना बहुत बड़षी भूल होगषी ।
( साभार)
fnlacj 2025 29