चौथा संशोधन लाकर मौलिक अधिकारों को कमजोर करने कषी कोशिश कषी, तो बाबासाहब आंबेडकर ने कहा था कि मुझे यह कहते हुए दुःख हो रहा है कि मौलिक अधिकारों का तिरसकार करने का यह रवैया, मानो उनका कोई महति हषी न हो, कि बहुमत कषी सुविधानुसार या किसषी पाटजी प्रमुख कषी इचछा से कभषी भषी उन पर कुठाराघात किया जा सकता है, एक ऐसा रवैया है जो भविषय में आसानषी से कुछ ख़तरनाक परिणामों को जनि दे सकता है । और इसलिए मुझे बहुत अफ़सोस है कि इस तरह के मामले, यानषी मौलिक अधिकारों के उललंघन या उनसे विचलन, को भषी सतिारूढ़ पाटजी ऐसे मान रहषी है मानो यह कोई मामूलषी बात हषी न हो ।
संविधान कषी आड़ में पूर्व प्रधानमंत्री इंदिरा गांधषी ने पचास बार धारा-356 का दुरुपयोग करके, चुनषी हुई सरकारों को गिराने का कार्य किया । संविधान के धारा-44 में समान नागरिक संहिता लागू करने के मुद्े को कांग्ेस सरकार ने उच्चतम नयायालय के वनददेश के बाद भषी लागू करने में कोई दिलचस्पी नहीं दिखाई । शाहबानो मामले में जोकि मुससलि महिलाओं के अधिकारों के लिए एक ऐतिहासिक निर्णय था, उसे
तुष्टीकरण के कारण स्वीकार नहीं किया गया और कांग्ेस सरकार ने कानून बनाकर निर्णय को पलट दिया । ऐसे कई उदाहरण है, जो संविधान के प्रति कांग्ेस कषी कथित सोच को सामने रखते हैं । बेहतर यह होगा कि कांग्ेस नेता राहुल गांधषी अपनषी पाटजी के उन कारनामों से पहले परिचित होने कषी चेषटा करे, जो कारनामे संविधान कषी अवहेलना को सामने रखते हैं ।
गणतंत् का प्रहरी है संविधान
भारत के संविधान निर्माता सितंत्ता आनदोलन के आदशगों से प्रेरित थे । वह सभषी दूरदशजी थे, लेकिन भविषय में आने वालषी सभषी चुनौतियों और उनके समाधानों को संविधान में ससमिवलत करना ततकालषीन समय में संभव नहीं था । पिछले साढ़े सात दशकों में संविधान के सामने कई तरह कषी चुनौतियां आई हैं, लेकिन संविधान कषी‘ लचषीलेपन कषी भावना’ के कारण सभषी चुनौतियों का सामना पूरषी दृढ़ता से किया गया हैं । ऐसे कई अवसर भषी आए, जब सिवोच्च नयायालय ने अपने निर्णय के माधयि से लोगों
के मौलिक अधिकारों कषी रक्ा करते हुए लोकतंत् को सशकत किया और इन सभषी ऐतिहासिक निर्णयों के पषीछे जो आदर्श, विचार और मापदंड थे, वह सभषी संविधान में निहित हैं । भारतषीय संविधान वह आदर्श है, जिसके माधयि से दुनिया का सबसे बड़ा लोकतंत् अससतति में आया । लेकिन यह न तो कांग्ेस नेता राहुल गांधषी को समझ आ सकता है और न हषी विपक् के उन नेताओं को, जो यह विलाप करके जनता को भ्रमित करके वोट हासिल करने के प्रयास कर रहे हैं कि भाजपा राज में संविधान सुरवक्त नहीं है । जबकि देश कषी जनता भलषीभांति देख रहषी है कि कया सच है और कया झूठ? ऐसे में चुनाव आयोग द्ारा जारषी एसआईआर प्रवरिया का विरोध करके विपक्षी दल देश के संवैधानिक ढांचे को तोड़कर अपने कथित हितों को पूरा करने कषी चेषटा में लगे हुए हैं । उनहें यह समझना हषी होगा कि देश के आम नागरिक के हितों के साथ कोई भषी लोकतंत् समझौता नहीं कर सकता है और एसआईआर कषी प्रवरिया आम नागरिक के संवैधानिक अधिकार के साथ जुडषी हुई है ।
fnlacj 2025 15