Dec 2025_DA | Page 14

कवर स्टोरी

जनता को भ्रमित करने की रणनीति
विपक्षी दल लगातार सुनियोजित रूप से यह भ्रम फ़ैलाने का प्रयास कर रहे हैं कि भाजपा संविधान विरोधषी है और बाबा साहब डा. भषीि राव आंबेडकर के संविधान को नषट करना चाहतषी है । जेब में संविधान कषी प्रति लेकर चलने वाले कांग्ेस नेता राहुल गांधषी ऐसा पहलषी बार नहीं बोल रहे हैं । इससे पूर्व 2024 में हुए लोकसभा चुनाव के दौरान डा. आंबेडकर और संविधान को लेकर भ्रम का वातावरण बनाने कषी कोशिश पूरे देश में कषी गई । भ्रम कषी आड़ में कांग्ेस ने दलित, पिछड़े, वंचित वर्ग का कुछ वोट तो हासिल कर लिया, लेकिन इसका कोई बड़ा राजनषीवतक लाभ कांग्ेस को नहीं मिला । इसके बाद भषी डा. आंबेडकर, संविधान और हिनदू धर्मवालंबियों को लेकर झूठ बोलने के साथ हषी आम जनता को भ्रमित करने का काम निर्लज्जता के साथ किया जा रहा है । कांग्ेस नेता राहुल गांधषी का कहना है कि भाजपा एक दिन संविधान को खति करने के लिए काम कर रहषी हैं और संविधान जिस दिन खति हो जाएगा,
इस देश में गरषीबों, दलितों, आदिवासियों और ओबषीसषी के लिए कुछ नहीं बचेगा । उनके आरोप पर गंभषीर प्रश्न यह है कि कया वासति में ऐसा है?
संविधान को रौंदा कांग्ेस ने
कांग्ेस नेता राहुल गांधषी उसषी पाटजी के नेता हैं, जिसने संविधान को रौंद डाला था । ऐसे में संविधान कषी रक्ा समबन्धी उनके दावों पर भरोसा नहीं किया जा सकता है । इंदिरा गांधषी के आपातकाल के दौरान संविधान 21 माह के लिए निलंबित रहा । वासति में देखा जाए 25 जून 1975 कषी आधषी रात को ततकालषीन प्रधानमंत्री इंदिरा गांधषी ने आंतरिक अशांति के नाम पर आपातकाल थोप कर देश के संविधान कषी हतया कर दषी थषी । आपातकाल के पचास वर्ष से अधिक समय बषीतने के बाद बाद कांग्ेस उसषी मानसिकता के साथ चल रहषी है, उसकषी नषीयत आज भषी वैसषी हषी तानाशाहषी वालषी है ।
सच यह भषी है कि कांग्ेस ने सिर्फ संविधान संशोधन के माधयि से दुर्भावना के साथ धषीरे- धषीरे संविधान बदलने का प्रयास किया है । जवाहरलाल नेहरू के कार्यकाल में 17 बार
संविधान संशोधन किया गया, जबकि इंदिरा गांधषी के कार्यकाल में लगभग 28 बार संविधान में बदलाव किया गया । इसषी तरह राजषीि गांधषी के कार्यकाल में लगभग 10 बार और मनमोहन सिंह के कार्यकाल में 7 बार संविधान में हुआ । हद तो यह है कि कांग्ेस सरकारों द्ारा किए गए अधिकांश संवैधानिक संशोधन या तो विरोधियों और आलोचकों को चुप कराने के लिए या गलत नषीवतयों को लागू करने के लिए किए गए ।
वर्तमान में संविधान रक्ा का राग अलापने वालषी कांग्ेस ने मई 1951 में पहले संवैधानिक संशोधन करके, नागरिकों के भाषण और अभिवयसकत कषी सितंत्ता को कुचल दिया था । उस समय देश में पहला आम चुनाव भषी नहीं हुआ था और न हषी कांग्ेस के पास कोई जनादेश था । लेकिन पहला संविधान संशोधन करके आलोचकों को चुप कराने के लिए अभिवयसकत कषी सितंत्ता को कुचल दिया गया । संविधान निर्माता डा. आंबेडकर संविधान लागू होने के बाद कांग्ेस सरकार द्ारा मौलिक अधिकारों को कमजोर करने के प्रयासों के विरुद्ध हमेशा लड़ते रहे थे ।
कांग्ेस सरकार ने 1954 में संविधान में
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