समाज
वर््तमान समय में कांग्ेस के ने्ता चाहे नक्तिी ही डींगें मार लें कि उनके ने्ता महात्मा गांधी ने दलितोों के उद्ार के लिए विशेर् काय्ष किया ्था । पर सच यह है कि दनल्त समाज का उद्ार करना कांग्ेस का मौलिक चिं्ति ििीं ्था । महात्मा गांधी भी अपने मौलिक चिं्ति में अछूतोों के प्रन्त किसी प्रकार से भी उदार ििीं ्थे । जब कयोई व्यष्क््त या कयोई संग्ठि किसी उधारी मानसिक्ता या सयोच या चिं्ति के आधार पर काय्ष कर्ता है ्तयो उसके चिं्ति का कयोई उल्लेखनीय प्रभाव दिखाई ििीं दे्ता है । यही कारण रहा कि कांग्ेस के महात्मा गांधी के दनल्त कल्याण के काययों का कयोई विशेर् प्रभाव दिखाई ििीं दिया ।
तो यह है कि यदि किसी जाति विशबेष के उत्थीान और उद्धार के लिए यह वोर् मेांगतबे हैं तो समेाज की विसंगवतयों को वमेर्ानबे का कामे भी इन्हीं का है । इसके अतिरर्तत दपूसरी ्बात यह है कि अ्ब सबे पूर््व भी दबेश के अनबेक राजा मेहाराजा ऐसबे रहबे हैं, जिन्होंनबे सामेाजिक विसंगवतयों के विरुद्ध ्लियं अभियान चलाया और उन्हें तोड़नबे का साहस करके दिखाया । ्बड़ौदा के आयरा नरबेश सयाजीराव गायकवाड नबे अपनबे शासनकाल मेें ऐसबे छह राजनियमे ्बनाए थीबे, जिनसबे सामेाजिक विसंगवतयों को उखाड़नबे मेें सहायता वमेली थीी ।
वह आयरा सन्यासी ्लिामेी नित्यानंद के उपदेशोों सबे इतनबे प्रभावित हुए कि सामेाजिक आंदोलन के क्षेत्र मेें ्लियं उतर गए । उन्होंनबे 1908 मेें वैदिक विद्ान मेास््टर आत्मेारामे अमेृतसरी को ्बड़ौदा मेें आमेंत्रित किया थीा और उनके नबेतृत्ि मेें दवलतों के क्कयार् के लिए लगभग चार सौ पाठशाला ्लथीावपत करवाई थीीं, जिनमेें ्बीस हजार दलित समेाज के ्बच्चों को शिक्ा दी जाती थीी । इस संदभरा मेें यह भी ध्यान रखना चाहिए डा. आं्बबेिकर को छात्रवृवत् दबेनबे वालबे भी यही ्बड़ौदा नरबेश थीबे, जो मेपूल रूप सबे आयरा समेाज
की विचारधारा सबे प्रभावित थीबे ।
वर््तमान समेय मेें कांग्रेस के नबेता चाहबे कितनी ही िींगें मेार लें कि उनके नबेता मेहात्मेा गांधी नबे दवलतों के उद्धार के लिए विशबेष कायरा किया थीा । पर सच यह है कि दलित समेाज का उद्धार करना कांग्रेस का मेौलिक चिंतन नहीं थीा । मेहात्मेा गांधी भी अपनबे मेौलिक चिंतन मेें अछूतों के प्रति किसी प्रकार सबे भी उदार नहीं थीबे । ज्ब कोई व्यक््तत या कोई संगठन किसी उधारी मेानसिकता या सोच या चिंतन के आधार पर कायरा करता है तो उसके चिंतन का कोई उ्कलबेखनीय प्रभाव दिखाई नहीं दबेता है । यही कारर् रहा कि कांग्रेस के मेहात्मेा गांधी के दलित क्कयार् के कायषों का कोई विशबेष प्रभाव दिखाई नहीं दिया ।
कांग्रेस को दवलतों के उद्धार के लिए प्रबेरित करनबे वालबे आयरा समेाज के ्बड़़े नबेता मेहात्मेा मेुंशीरामे अथीारात ्लिामेी श्रद्धानंद जी मेहाराज थीबे, जिन्होंनबे 1913 मेें दलितोद्धार सभा का गठन किया थीा । अमेृतसर के कांग्रेस अवधिबेशन मेें 27 दिसं्बर 1919 को उन्होंनबे इस विषय को कांग्रेस के मेंच सबे मेुख्य रूप सबे उठाया थीा और गांधी जी को इस ्बात के लिए प्रबेरित किया थीा कि वह दवलतों के उद्धार के लिए विशबेष कायरा
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अगस््त 2026