प्रसंगवश
कर रहा है । पिछलबे िषषों मेें डिवजर्ल सबेिाओं का वि्लतार, ऑनलाइन पंजीकरर्, इलबे्तट्ॉवनक रिकॉि्ट, आधुनिक चिकित्सा उपकरणोों की उपलब्धता तथीा अ्लपतालों के उन्यन पर विशबेष ्बल दिया गया है । इससबे लाभावथीरायों को पहलबे की तुलना मेें अधिक सुविधा वमेल रही है । सरकार का लक्षय है कि गुर्ित्ापपूर््ण ्लिा्लथ्य सबेिाएं श्रमिकोों के घर के निकर् उपलब्ध हों ।
मेोदी सरकार की ' स्बका साथी, स्बका विकास, स्बका वि्चिास और स्बका प्रयास ' की अवधारर्ा का मेहत्िपपूर््ण आधार सामेाजिक सुरक्ा भी है । सामेाजिक न्याय केवल आरक्षण या आवथीराक सहायता तक सीवमेत नहीं हो सकता । यदि गरी्ब परिवार ्बीमेारी के समेय सम्मेानजनक उपचार, आय का संरक्षण और भविष्य की सुरक्ा प्राप्त करता है, तभी वा्लतविक सामेाजिक सशक््ततकरर् संभव है । ईएसआईसी इसी सोच का सं्लथीागत ्लिरूप है ।
विशबेषज्ञों का मेानना है कि भारत को विकसित राष्ट् ्बनानबे के लिए उत्पादक श्रमेशक््तत आि्चयक है । ्लि्लथी श्रवमेक ही उद्योग, विनिर््ममाण और सबेिा क्षेत्र की वा्लतविक ताकत होतबे हैं । यदि श्रवमेक और उसका परिवार सुरवक्त रहबेगा तो उत्पादकता भी ्बढ़़ेगी और अर््थव्यि्लथीा को
भी लाभ होगा । इसलिए ईएसआईसी केवल सामेाजिक क्कयार् की योजना नहीं, ्बक््कक आवथीराक विकास का भी आधार है ।
दलित समेाज के उत्थीान की दृष््टटि सबे देखेें तो शिक्ा, ्लिा्लथ्य और सामेाजिक सुरक्ा तीनों पर समेान रूप सबे वनिबेश आि्चयक है । पिछलबे िषषों मेें छात्रवृवत्यों, कौशल विकास, ्लिरोजगार योजनाओं और सामेाजिक सुरक्ा कायरारिमेों को एक साथी आगबे ्बढ़ानबे का प्रयास किया गया है । सामेाजिक सुरक्ा संहिता इस व्यापक दृष््टटिकोर् को और मेज्बपूत करती है । इससबे श्रवमेक परिवारों की अगली पीढ़ी ्बबेहतर शिक्ा, ्बबेहतर ्लिा्लथ्य और ्बबेहतर रोजगार के अवसर प्राप्त कर सकती है ।
संसद मेें विपक् का विरोध लोकतांत्रिक व्यि्लथीा का वह्लसा है, किंतु यह भी उतना ही मेहत्िपपूर््ण है कि श्रमिकोों और गरीबोों के वहतों सबे जुड़़े सुधार समेय पर आगबे ्बढ़ें । सामेाजिक सुरक्ा संहिता और ईएसआईसी सबे जुड़़े कदमे करोड़ों परिवारों के जीवन पर प्रत्यक् प्रभाव डालतबे हैं । इसलिए इन सुधारों को केवल राजनीतिक चश््ममे सबे नहीं, ्बक््कक सामेाजिक पररितरान के व्यापक पररप्रबेक्षय मेें दबेखनबे की आि्चयकता है ।
आनबे वालबे िषषों मेें यदि ईएसआईसी का दायरा और अधिक वि्लतारित होता है, अ्लपतालों की संख्या ्बढ़ती है, चिकित्सा सबेिाओं की गुर्ित्ा मेें सुधार होता है तथीा असंगठित और नए रोजगार क्षेत्रों के श्रमिकोों को भी व्यापक सामेाजिक सुरक्ा वमेलती है, तो इसका स्बसबे ्बड़ा लाभ दलित, गरी्ब और श्रवमेक िगरा को वमेलबेगा । यही वह िगरा है जिसनबे िषषों तक असुरक्ा, ्बीमेारी और आवथीराक संकर् का ्बोझ उठाया है ।
लोकसभा मेें प्र्लतुत प्र्लताि केवल दो सांसदों के वनिाराचन की प्रवरिया भर नहीं है । यह उस व्यापक व्यि्लथीा का वह्लसा है जिसके मेाध््यम सबे भारत की सामेाजिक सुरक्ा प्रर्ाली को अधिक प्रतिनिधिक, अधिक उत्रदायी और अधिक प्रभावी ्बनाया जा रहा है । सामेाजिक सुरक्ा संहिता-2020 और कर््मचारी राज्य ्बीमेा निगमे वमेलकर ऐसबे भारत की नींव रख रहबे हैं, जहां श्रवमेक केवल उत्पादन का साधन नहीं, ्बक््कक राष्ट् निर््ममाण का सम्मेावनत भागीदार हो । और ज्ब श्रवमेक सुरवक्त होगा, त्ब उसका परिवार सुरवक्त होगा; ज्ब दलित और वंचित समेाज सुरवक्त होगा, तभी आत्मेवनभरार, समेािबेशी और विकसित भारत का सपना वा्लतविक अथीषों मेें साकार होगा । �
अगस््त 2026
25