जन्मदिन पर विशेष
आदि द्रजवड कहा जाता था) को हिनदुओं के साथ अर्थात संयु्त निर्वाचकों में शामिल करने पर गांधी जी के बल देने का उनका विरोध उग्, कठोर और अनुचित था । अनुसूचित जातियों के लिए पृथक निर्वाचन पद्धति के पक् में रामसे मेकडोनालि अवार्ड के विरुद्ध गांधी जी के पुणे में उपवास के दौरान उसकी बदले की भावना
से सभी राष्ट्वादियों की भावनाओं को ठछेस पहुंची थी । यद्यपि हिनदू रूढ़िवादी नेताओं को संयु्त निर्वाचन पद्धति में सथानों के आरक्ण से अनुसूचित जाति के संरक्ण की मांग को सवीकार करना पडा । वैलोर जेल में सहकैदियों को उनके मौलिक विचारों को समझाने में मुझे काफी कठिनाई का सामना करना पडता था । बाद में,
उनहें गांधी जी के उदारपूर्ण समर्थन और राजाजी की राजनीतिक प्शंसा प्ापत हुई, जिनहें उनहोंने एक कलम भेंट किया, जिससे उनहोंने प्जसद्ध पुणे संधि पर हसताक्र किए ।
युद्ध के समय डा. आंबेडकर ने जरिटिश सरकार को मजबूर किया कि वह उसे अनुसूचित जाति के एक प्जतजनजध के रूप में नहीं अपितु उनकी राजनीतिक हैसियत को खुले रूप से मानयता प्दान करके वायसराय काउंसिल में शामिल होने के लिए आमंत्रित करे । यह मेरा सौभागय था कि जब आजादी मिली, तब मैं राष्ट्ीय नेताओं को सफलतापूर्वक राजी कर सका कि डा. आंबेडकर को मंत्रिमंडल में शामिल करने के लिए आमंत्रित किया जाए । मैंने उस समय भी अपना समर्थन दिया, बाद में उनहें संविधान सभा में कार्यभार सौंपने का और संविधान निर्माण के उस ऐतिहासिक काल में उनकी उत्कृष्ट भूमिका निभाने के लिये राष्ट्ीय नेताओं ने उनहें आमंत्रित करने का निर्णय लिया था ।
उनहोंने आंध्र प्देश के अपने सहयोगी वकील रामासवामी की भांति ही भारतीय पुराण विद्या और महाकावयों में काफी शोध कार्य किया । वह इतिहास के उस दुर्भागयपूर्ण परिवर्तन से अतयजधकं रिुद्ध थे जिसमें उन हारे हुए और दलित वयक्तयों ने कर्म के सिद्धांत के आधार पर अपने निम्न सामाजिक सतर, राजनीतिक शक्त की समाकपत और पद् जलत आर्थिक और सामाजिक अकसततव को सवीकार किया । प्िजलत सामाजिक वयवसथा के विरुद्ध जनसाधारण में विद्रोह पैदा करने के लिये वह आंध्र प्देश के वकील रामासवामी, तमिलनाडु के ई. वी. आर. तथा अन्ना की ही भांति अथक प्यास करने के लिए दृढ़ संकलप थे । वह गांधीजी और हमारे में से कई लोगों के संरचनातमक और रिांजतकारी कायषों से इतने अधिक असनतुष्ि थे कि उनहोंने तथाकथित सामाजिक विशवासों और धार्मिक सिद्धांतों की समीक्ा करने सनातनियों को मानवतावाद, जिसमें असपृशयता, गुलामी नहीं है और कुछ के लिए सामाजिक, आर्थिक या राजनीतिक श्ेष्ठता या विशेषाधिकार हो और अनयों के लिए
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