Sri Vageesha Priyah eSouvenir Sri Krishna Brahmatantra Swatantra Parakala Mahade | Page 28

॥ श्रीः॥ ु ॥ श्रीलक्ष्मीहयवदन लक्ष्मीनारायण वेणगोपाल परब्रह्मणे नमः॥ ु ॥ श्री शठकोप रामानज देशशके भ्यो नमः॥ ु ॥ श्री ब्रह्मतन्त्र स्वतन्त्र परकाल गरुपरम्परायै नमः॥ ॥श्री कृ ष्ण ब्रह्मतन्त्र स्वतन्त्र परकाल महादेशशकाय नमः॥ श्रीमच्छ्रीकृ ष्णब्रह्मतन्त्रस्वतन्त्रपरकालसांयशमसावािौममहादेशशकशवियक ु . मिकश्लोकाः . ् ् ु लक्ष्मीप्रेमसमाशश्लश्टोरसमानन्ददां रसम । ध्यात्वा प्रकाशयामोऽद्य सार्शसद्धान्तपद्धशतम ॥ ु ु ु श्रीकृ ष्णब्रह्मतन्त्रपरकालगरूत्तमैः । परा शनणीत एवाथाः पनरत्रप्रकाश्यते ॥ यत्पादाम्भोज तीथाामत रसकशणकासेवना देशतलोपां ृ ् पापां सांसगालिां शनजमशप च मनःकायवागाशद मूलम । ् ताने ताञ्छ्रीहयास्यान खलजनदुशरतर्ध्ांस नायावतीणाान ् श्रीकृ ष्णब्रह्मतन्त्राशदमपदकशलशजद्देशशके न्द्रान्प्रपद्ये ॥ - परमहम्सेत्याशद श्रीवागीश ब्रह्मतन्त्र स्वतन्त्र परकाल स्वाशमनः ् ु ा यत्कृ शतबोर्ाबोर्ौ शवद्वदशवद्वशद्विाजको