Sri Vageesha Priyah eSouvenir Sri Krishna Brahmatantra Swatantra Parakala Mahade | Page 206

श्रीकृ ष्णब्रह्मतन्त्रस्वतन्त्र परकालमहादेशशक वैिवम ् ॥ श्रीः॥ ु ॥ श्रीलक्ष्मीहयवदन लक्ष्मीनारायण वेणगोपाल परब्रह्मणे नमः॥ ु ॥ श्री शठकोप रामानज देशशके भ्यो नमः॥ ु ॥ श्री ब्रह्मतन्त्र स्वतन्त्र परकाल गरुपरम्परायै नमः॥ ु ृ श्रीकृ ष्णब्रह्मतन्त्रपरकालमहादेशशकसम्यशमसावािौमैरनगहीताः िट्षशष्टप्रबन्धानामतोऽत्रसङ्गृह्यन्ते ॥ ु ु ु ु आद्याचम्पूलाशलता श्रीमत्परकालगरुशवजयनामा। अन्यासलशलतपदिागत्तरपरकालगरुशवजयचम्पूः॥१॥ ु नरशसांहरङ्गराजश्रीवासशवलासचम्पवशस्तस्रः। रामेश्वरशवजयाख्याचम्पूरघनाथशवजयचम्पूश्च॥२॥ ा चम्पूश्चकाशताकोत्सवदीपाख्या के शवोत्सवाख्याऽन्या। आनन्दमरन्दामृतकृ तयशस्तस्रः प्रपन्नपूवपदाः॥३॥ ु ु श्रीरामश्रीवासावशर्कृ त्य द्वेच वेदपादस्तती। श्रीदेशशके न्द्रगरुवरशवियाऽन्या वेदपादघशटतनशु तः॥४॥ े आचायावदपादस्तवस्तथान्यस्तदीयटीका च। नवरत्नहारसांज्ञास्तशु तरन्याऽन्यातदीयशववृशतश्च॥५॥ ु ु ु श्रीरङ्गेशचपेटाहशतस्ततीरामसप्रिातां च श्रीवासरङ्गनायकगोपालानाञ् सप्रिाताशन॥६॥ ु ा आचायावयागद्यां हृद्यां शनर्ूतनतजनावद्यम।् सूयोपरागदपाणसमयामृतनामनीच लघकाव्ये॥७॥ ् ु ु श्रीराजवांशरत्नाकर नामान्यच्च लघकाव्यम।् श्रीरामायणवैिवमत्तररङ्गाशर्नाथमाहात्म्यम॥८॥ ु ा मदनोपपदाकशलत श्रीमद्गोपालमाहात्म्यम