Sri Vageesha Priyah eSouvenir navya-smRti-deepaH Part 1 | Page 151

॥ श्रीः॥ ु ॥ श्रलक्ष्मरहयवदन लक्ष्मरनारायण वेणगोपाल परब्रह्मणे नमीः॥ ु ॥ श्र शठकोप रामानज देशशके भ्यो नमीः॥ ु ॥ श्र ब्रह्मतन्त्र स्वतन्त्र परकाल गरुपरम्परायै नमीः॥ ॥श्रमदशिनव रङ्गनाथब्रह्मतन्त्र स्वतन्त्र परकाल महादेशशकाय नमीः॥ ॥ नत्नरं गस्ततत: ॥ ू ु आद्यन्तत्यमध्यॆषु पुरातनॆषु रं गषु तनद्ां तनतरां गतॆषु । ॆ स्स्ित्यै ससर्ााऽब्र्भव: स ननं ू अतंद्रद्तं नूतनरं गमायं ॥ श्रीकृष्णब्रह्मतंत्रायाात ् परकालकललद्ववष: । प्राप्तसवाागमांताय नत्नरं गाय मंगलं ॥ ू मॊहं व्यपॊढुं भुवव य: मूढानामिासंग्रह Xb Z@