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विश्िेषर्

में कई अभूतपूिवा घ्टनाएं घ्टरी । एक तरफ तो नासिक के कालाराम मन््ददिर प्रवेश का आन्ददोलन 2 माचवा 1930 से लेकर 1934 तक पूरे चार साल लगातार चला । इस आन्ददोलन में महाराष््ट, गुजरात, कनावा्टक और अन्द्य राज््यों व देश के विवभन् भागों से 10 हजार से अधिक महिला पुरूष सत््याग्राहरी शामिल हुए, दूसरे इन सत््याग्रावह्यों करी पूररी देखभाल जैसे खाने-परीने- ठहरने आदि का इंतजाम पहलरी बार दलित महिलाओं ने जिस निष्ठा और मेहनत से वक्या वह अपने आपमें एक मिसाल है । इस आन्ददोलन द्ारा दलित महिलाओं करी चेतना कितने प्रखर रूप में विकसित हो गई थरी । इस बात को समझने के लिए केवल एक उदाहरर् हरी काफरी है । जब 1 अप्रैल 1930 में मन््ददिर प्रवेश के दौरान पुजाररी द्ारा दलित महिलाओं को परीछे धक्का देने पर एक दलित महिला ने उस पुजाररी के मुंह पर सनसनाता थप्पड़ रसरीद कर वद्या( फड़के पं. दि. कृत कालाराम मन््ददिर प्रवेश सत््याग्रह)
कालाराम मन््ददिर सत््याग्रह में महिलाओं करी सभा में भाग लेते हुए राधा बाई ब्डोाले नामक एक सत््याग्राहरी ने अपने ओजस्िरी भािर् में कहा कि हमें मंवदरों मे जाने का, पनघ्ट से पानरी परीने का भरने का अधिकार मिलना चाहिए । ्यह हमारा समाजिक हक है । शासन करने का राजनरीवतक अधिकार भरी हमें मिलना चाहिए । हम कठोर सजा करी वचन्दता नहरी करतीं । हम देश भर करी जेलों को भर देंगें । हम लाठरी-गोलरी
खाएंगे । हमें हमारा हक चाहिए । ्योद्धा कभरी अपनरी जान करी वचन्दता नहीं करता । गुलामरी करी जिन््दगरी से मृत््यु बेहतर है । हम अपनरी जान दे देगें मगर अधिकार छरीन कर रहेंगे ।( ्डोॉ. आंबे्डोकर और महिला जागरर्-्डोॉ कुसुम मेधवाल पृष्ठ 91)
कालाराम मन््ददिर प्रवेश आन्ददोलन में रमाबाई आंबे्डोकर, सरीताबाई, गरीताबाई गा्यकवाड़, रमाबाई गा्यकवाड़, रमाबाई जाधव, तुलसरी रामजरीकाले करी माताजरी, अमृतराव शरर् खाबें करी माताजरी सौ. ताराबाई, ्यमुना बाई, भिकूबाई, सुमना राव, ठकूबाई सालवे, सरूबाई भालेराव, फुंदाबाई धनाजरी दार्री, गंगूबाई पगारे और अनेक अनाम-अज्ात औरतों ने भाग वल्या । जिसमें अन््ततः ्डोॉ. आंबे्डोकर और उनकरी महिला साथियोों करी जरीत हुई । 1930 में हरी बाबा साहब ने नागपुर में अखिल भारतरी्य शेड्ूल््डो कास््ट फे्डोरेशन करी स्थापना के साथ हरी‘ दलित महिला परिषद’ भरी आ्योजित करी । इस सभा में दस हजार से अधिक महिलाओं ने भाग वल्या । इस सभा करी अध््यक्ा सुलोचना ठोगरे तथा स्िगताध््यक् करीवतवा पाव्टल और मुख््य सचिव इन््ददिरा पाव्टल थरी । ्यह सभा अत््यन््त सफल रहरी । नागपुर में 8 से 10 अगस्त 1930 में अखिल भारतरी्य दलित कांग्रेस के प्रथम अधिवेशन में दलित महिलाओं का प्रतिनिधित्ि करते हुए जाईबाई चौधररी ने कहा‘ लड़कियोों को भरी लड़कों के समान पढ़ने के पूरे-पूरे अवसर
उपलब्ध कराने चाहिए । एक लड़करी करी शिक्ा से से पूरा परिवार वशवक्त हो जाता है ।’ कांग्रेस के इस पहले अधिवेशन के दौरान हरी सगुर्ाबाई गावेकर करी अध््यक्ता में दलित महिला परिषद का आ्योजन हुआ जिसमें दलित महिलाओं करी शिक्ा पर विशेष जोर वद्या ग्या ।( कुसुम मेघवाल भारतरी्य नाररी के उद्धाराक ्डोॉ. अम््बबेडकर पृष्ठ 91 से उद्धृत)
पहलरी और दूसररी गोलमेज सभा में पृथक वनिावाचन क्ेत् और पृथक प्रतिनिधित्ि के सवाल पर बाबा साहब ने दलित और दलितो वहतों करी जोरदार वकालत करी । उस सम्य कांग्रेस व मरीव्डो्या द्ारा ्डोॉ. आंबे्डोकर व दलित महिला- पुरूष कार््यकतावाओं एवं पूरे दलित समाज के प्रति घृर्ा का वातावरर् पैदा कर वद्या ग्या था । परन्दतु उस घृर्ापरक और हिंसात्मक माहौल में भरी दलित महिलाएं ्डोॉ. आंबे्डोकर के समथवान में सभाएं करतरी रहीं । 14 अगस्त 1931 को सर कौब्बजरी जहांगरीर हाल में महिलाओं ने रांउ्डो ्टेबल कांफ्ेस में भाग लेने के लिए ्डोॉ. आंबे्डोकर के प्रस्थान से पूिवा संध््या पर एक विदाई समारोह आ्योजित वक्या । एक वृद्ध महिला को संम्बोवधत करते हुए ्डोॉ. आंबे्डोकर ने कहा,‘ ्यवद तुम अपनरी गुलामरी को समूल उखाड़ फेंकने के लिए दृढ़ संकल्प हो तथा उसके लिए साररी कठिनाई्यां और मुसरीबतें बरदाश्त करने के लिए कव्टबद्ध हो, तो इस जिम्मेदाररी के कार््य में समथवा होने पर जो भरी श्रे्य और सफलता प्राप्त होगरी वह सब तुम्हाररी होगरी ।‘( सामाजिक न्द्ययाय के पुरस्कतावा ्डोॉ. भरीमरावआंबे्डोकर ्डोॉ. ब्रजलाल िमावा पृष्ठ 202) बाबा साहब के गोलमेज सम्मेलन से वापस आने के बाद 1932 में कामठरी में हुई परिषद में भरी 200 से अधिक महिलाएं शामिल हुई । उस सम्य सौ. शाताबाई औगले और अंजनरी बाई देशभ्रतार आदि दलित महिला नेताओं ने अपने जोरदार जोशरीले भाषणोों द्ारा गोलमेज परिषद में अम््बबेडकर के रोल को समथवान वद्या व उनकरी भूररी-भूररी सराहना करी । इसरी अधिवेशन में कुमाररी विरेन्दद्राबाई तीर््थकर को प्रान्दतरी्य महिला संगठन का सचिव बना्या ग्या । �
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