October 2026_DA | Page 11

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ख््य चुनाव आ्युक्त ज्ानेश कुमार के इस्तरीफे करी मांग को लेकर दिल्लरी में इं्डोरी गठबंधन के प्रदशवान ने एक बार फिर विपक् करी एकजु्टता, उसके सामाजिक आधार और नेतृत्ि करी प्राथमिकताओं पर सवाल खड़े कर दिए हैं । संसद से वनिावाचन आ्योग तक निकले माचवा में राहुल गांधरी, वप्र्यंका गांधरी वाड्ा, मक्ल्लकाजु वान खड़गे, अभिषेक बनजशी, ्डोेरिक ओ’ ब्रा्यन और समाजवादरी पार्टी प्रमुख अखिलेश ्यादव समेत विपक्षी दलों के अनेक नेता और सांसद शामिल हुए । पुलिस ने माचवा को वनिावाचन आ्योग के का्यावाल्य से पहले रोक वद्या और कई नेताओं को हिरासत में वल्या । विपक् का आरोप है कि विशेष गहन पुनररीक्र् ्यानरी एसआईआर के जरिए मतदाता सूचरी में गड़बवड़्यां हुई हैं और पात् मतदाताओं के नाम ह्टाए जाने का खतरा है ।
रिपो्टषों में किसरी बड़े दलित सामाजिक नेतृत्ि करी ऐसरी केंद्ररी्य भूमिका सामने नहीं आतरी जो इस आंदोलन को सरीधे दलित मतदाता अधिकारों के आंदोलन के रूप में स्थावपत कर सके । ्यहरी अंतर विपक् के दािों और उसके राजनरीवतक प्रदशवान के बरीच बहस पैदा करता है ।
कांग्रेस के लिए दलित मतदाता का प्रश्न इसलिए महत्िपूर््ण है क््योंकि पार्टी राष्ट्ररी्य स्तर पर संविधान, लोकतंत् और वनिावाचन प्रवरि्या करी रक्ा का राजनरीवतक नैरेव्टि बना रहरी है । ्यवद मतदाता सूचरी में कथित गड़बड़री को लोकतांवत्क अधिकार का प्रश्न बता्या जा रहा है, तो स्िाभाविक रूप से सबसे कमजोर और राजनरीवतक रूप से संवेदनशरील िगषों करी प्रत््यक् भागरीदाररी भरी दिखाई देनरी चाहिए । केवल शीर््ष नेतृत्ि के भािर् से ्यह राजनरीवतक संदेश पूररी तरह नहीं बनता । ्यहरी बात समाजवादरी पार्टी पर भरी लागू होतरी है ।
आंदोलन में विपक् वनिावाचन आ्योग पर मतदाता अधिकारों करी रक्ा न करने का आरोप लगा रहा है, उसरी आंदोलन का नेतृत्ि मुख््यतः राष्ट्ररी्य विपक्षी चेहरों के इदवा-वगदवा दिखाई वद्या । इंव्डो्यन एक्सप्रेस करी रिपोर््ट के अनुसार कररीब 200 विपक्षी सांसद संसद के मकर द्ार से माचवा में शामिल हुए थे, लेकिन बाद में राहुल और वप्र्यंका गांधरी के अकाशवार्री भवन परिसर में धरने ने आंदोलन का बड़ा हिस्सा अपने इदवा-वगदवा खींच वल्या । सह्योगरी दलों के कुछ नेताओं ने भरी महसूस वक्या कि साझा आंदोलन अंततः कांग्रेस और राहुल गांधरी केंद्रित हो ग्या ।
्यह बात इं्डोरी गठबंधन करी सबसे बड़री राजनरीवतक समस््या को उजागर करतरी है । उत्तर प्रदेश में कांग्रेस और सपा के रिश्ते पहले हरी पूररी तरह सहज नहीं हैं । कांग्रेस ने हाल में अपने उत्तर प्रदेश संगठन में बड़े बदलाव किए हैं और
इंडी गठबंधन की सबसे बड़ी राजनीतिक समस्ा को उजागर करती है । उत्तर प्रदेश में कांग्ेस और सपा के रिश्े पहले ही पूरी तरह सहज नहीं हैं । कांग्ेस ने हाल में अपने उत्तर प्रदेश संगठन में बड़े बदलाव किए हैं और सहारनपुर सांसद इमरान मसूद को कार््यकारी अध्यक्ष की जिम्ेदारी दी है ।
वनिावाचन आ्योग ने इन आरोपों को स्िरीकार नहीं वक्या है और अपनरी प्रवरि्या को वैधानिक बता्या है ।
इस पूरे आंदोलन करी राजनरीवतक तस्िरीर में एक सवाल बेहद महत्िपूर््ण है— जिस विपक् ने मतदाता सूचरी से दलित, अल्पसंख््यक और कमजोर िगषों के नाम ह्टने करी आशंका को अपने आंदोलन का हिस्सा बना्या, उसके जमरीन पर उतरे राजनरीवतक चेहरे और सामाजिक प्रतिनिधित्ि का दा्यरा कितना व््यापक था? प्रदशवान में विवभन् विपक्षी दलों के सांसद मौजूद थे, लेकिन उपलब्ध
परी्डोरीए का अथवा ्यवद केवल चुनािरी गवर्त है, तो वह एक गठजोड़ है । लेकिन ्यवद परी्डोरीए को सामाजिक न्द्ययाय का राजनरीवतक मॉ्डोल बता्या जाता है, तो उसके हर बड़े आंदोलन में पिछड़े, दलित और अल्पसंख््यक नेतृत्ि करी वास्तविक भागरीदाररी भरी दिखनरी चाहिए ।
वरना विरोधरी दलों को ्यह सवाल उठाने का अवसर मिलता है कि परी्डोरीए जमरीन पर सामाजिक प्रतिनिधित्ि है ्या चुनाव के सम्य बना्या जाने वाला राजनरीवतक सूत् ।
्यहां एक और राजनरीवतक वि्डोंबना है । जिस
सहारनपुर सांसद इमरान मसूद को कार््यकाररी अध््यक् करी जिम्मेदाररी दरी है । इससे ्यूपरी में कांग्रेस करी अपनरी राजनरीवतक जमरीन मजबूत करने करी कोशिश साफ दिखाई देतरी है । सपा दूसररी तरफ 2027 के लिए अपने संगठन और सामाजिक समरीकरर् को अपने हिसाब से तै्यार करना चाहतरी है । राज््यसभा चुनाव में तरीसरा उम्मरीदवार नहीं उतारने के बाद अखिलेश का 403 सरी्टों पर ध््यान होने का ब्यान इसरी व््यापक चुनािरी तै्याररी करी ओर संकेत करता है ।
ऐसे में सरीईसरी विरोध में अखिलेश करी मौजूदगरी
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