चोट के कारण उ्हें मड्चाजथा कर मद्या ग्या । वहीं तरुण कुमार की अगले दिन ्यानि 5 मार्च को इलाज के दौरान मौत हो गई ।
पुलिस के मुताबिक गिरफतार आरोमप्यों की पहचान सा्यरा उर्फ काली( 40), सरिफन( 50), सलमा( 36), सुहैल उर्फ साहिल( 21), समीर( 20), फिरोज( 22) और इ्माइल( 50) के रूप में हुई है । गिरफतार आरोमप्यों में एक नाबालिग भी शामिल है । इससे पहले पुलिस उमरदीन( 49), जुममादीन( 36), कमरुद्ीन( 36), मु्ताक( 46), मुजफिर( 25) और ताहिर( 18) को गिरफतार कर चुकी है । दो नाबालिग भी इस मामले में पकडे गए हैं ।
तरुण कुमार की मौत के बाद मामले ने तूल पकड मल्या और कुछ असामाजिक तति माहौल को बिगाडने की कोशिश करने लगे । शुक्रवार को इलाके में तनाव काफी बढ़ ग्या और हिंदू संगठनों ने घटना का विरोध करते हुए नारेबाजी शुरू कर दी । इतना ही नहीं सडक को भी जाम कर मद्या ग्या । वहीं सभी आरोमप्यों
को नहीं पकडने तक, इलाके की दुकानों को बंद रखने का ऐलान मक्या ग्या । इसके बाद हालत बिगडते हुए देख इलाके में बडी संख्या में पुलिस और अर्धसैनिक बल के जवान पहुंचे और उ्हें तैनात कर दिए गए । आरोमप्यों के खिलाफ सखत कार्रवाई करते हुए पुलिस उनकी धरपकड शुरू कर दी ।
तरुण हत्यकांड की मास्टर माइंड है एक महिला
बता दें कि दिलली पुलिस ने इस हत्याकांड में शामिल तीन महिलाओं को भी गिरफतार मक्या है । इस तीन महिलाओं में सा्यरा नाम की ्युवती इस पूरे हत्याकांड की प्रमुख्य आरोपी है । जिसने अपने समुदा्य के लोगों को पूरा मामला गलत तरीके से बता्या और अपने परिवार को बुलाकर उकसाते हुए खूनी संघर्ष शुरू करवा्या था । दिलली सरकार और पुलिस ने ्यूपी की तर्ज पर उसके घर को रविवार को बुलडोजर से ढहा मद्या । सा्यरा के अलावा हिरासत में ली गईं दो अन्य महिलाएं शरीफ और सलमा शामिल हैं ।
वहीं इस पूरे मामले में तरुण के पिता का कहना है कि हमने गुबबारे लगने के बाद दूसरे
समुदा्य से माफी भी मांग ली थी । कहा था बच्ी है गलती हो गई । लेकिन इसके बावजूद महिला ने हंगामा खडा कर मद्या और उसके परिजन और रर्तेदारों को लाठी-डंडों से बुला मल्या । इसके बाद आरोमप्यों ने मेरे बेटे तरुण को घेर मल्या और क्रिकेट बैट, लामठ्यों और पतररों से हमला कर मद्या ।
कौन था दिल्ली के उतिम नगर का तरुण कु मार?
बता दें कि 26 वर्षीय तरुण कुमार दिलली के उत्म नगर की ह्तसाल जेजे कलॉलोनी में अपने परिवार के साथ रहता था । परिजनों का कहना है कि वह परिवार का सहारा बनने के लिए डिजिटल माककेटिंग की पढ़ाई कर रहा था । हमारे परिवार की उससे बहुत उममीदें थीं । लेकिन उन लोगों ने हमारे बेटे की बेरहमी से मार डाला ।
देखा जा्ये तो उत्म नगर की ्यह दुखद घटना ्यह दिखाती है कि त्योहारों के दौरान छोटी-सी बात भी ्यमद समझदारी से न संभाली जाए तो वह बडी त्ासदी का रूप ले सकती है । एक मासूम गलती के कारण हुई हिंसा ने न केवल एक ्युवा की जान ले ली बशलक पूरे समुदा्य को शोक और भ्य में डाल मद्या है । �
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