March 2026_DA | Page 42

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अवसरवादी राजनीति और सत्य इतिहास

डॉ विवेक

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मा कोरेगांव की घटना को कुछ तथाकथित बुद्धिजीवी लोग दलित और आदिवामस्यों पर हुए अत्याचार के विरुद्ध संघर्ष के रूप में दर्शाने का प्र्यास कर रहे है । सत्य ्यह है कि हमारे देश की कुछ विभाजन कारी मानसिकता को बढ़ावा देने वाली ताकतें अपना राजनीतिक भविष्य बनाने के चककर में देशवामस्यों को भड़काने के लिए किसी भी हद तक जाने को तै्यार हैं । इसके लिए चाहे उ्हें कोरेगांव की घटना का सहारा लेना पड़े । चाहे मनु्मृमत और ब्ाह्मणवाद का जुमला उछालना पड़े । उनके इस दुषप्रचार से कुछ दलित और आदिवासी( वनवासी) क्ेत्ों में रहने वाले ्युवा भ्रमित हो जाते हैं । भ्रमित ्युवाओं को न सत्य का ज्ान होता है, न ही उ्हें इसे जानने का अवसर प्रापत होता हैं । कोरेगांव ्युद्ध में बलिदान हुए महार समाज के कुछ सिपामह्यों की वीरता में अंग्रेजों ने ्मृमत ्तमभ बनवा मद्या था । इस ्युद्ध में अगर अंग्रेजों की ओर से अंग्रेज सिपाही, महार सिपाही, राजपूत और ब्ाह्मण तक लड़े थे । तो मराठा पेशवा की ओर से मराठा, राजपूत, मुस्लम, गोसाईं, महार, मतंग और मंग जैसी दलित जामत्यों के लोग भी लड़े थे । अंग्रेजों की सेना में अगर महार अग्रिम टुकड़ी में थे तो मराठा सेना की अग्रिम पंशकत में मुस्लम सिपाही सबसे अधिक थे । तो क्या कोई इसे दलित-मुस्लम ्युद्ध कहेगा? नहीं । कभी नहीं । फिर ्यह दुषप्रचार क्यों कि कोरेगांव की घटना दलित महारों की ब्ाह्मण पेशवाओं पर जीत थी । ्यह ्युद्ध तो अंग्रेजों और भारती्यों के मध्य हुआ ्युद्ध था । मब्मटश काल में ऐसे अनेक ्युद्ध और संघर्ष हुए जिसमें अंग्रेजों ने भारती्यों का बड़े पैमाने पर दमन मक्या था । हम
इस लेख में इतिहास में आदिवासी क्ेत् में हुए तीन संघर्ष गाथाओं के माध्यम से ्यह स्देश देना चाहेंगे कि अंग्रेजों का दमन की घटनाओं को जो लोग भुलाकर भारती्य समाज को सवर्ण और दलित / आदिवासी के रूप में मचमत्त करने का प्र्यास कर रहे हैं । उनका ्यह षड्यंत् असफल हो जा्ये । क्यूंकि उनकी सोच केवल विघटनकारी है । सत्य इतिहास पर आधारित नहीं है ।
1. बिरसा मु ंडा का बश्लदान
बिरसा मुंडा 19वीं सदी के एक प्रमुख आदिवासी जनना्यक थे । उनके नेतृत्‍व में मुंडा आदिवामस्यों ने 19वीं सदी के आखिरी िषयों में मुंडाओं के महान आ्दोलन उलगुलान को अंजाम मद्या । बिरसा को मुंडा समाज के लोग भगवान के रूप में पूजते हैं । सुगना मुंडा और करमी हातू के पुत् बिरसा मुंडा का ज्म 15 नवमबर 1875
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