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स्वयं ही अपने अधिकारों को छोड देती हैं । सामाजिक और मानसिक दबाब की पराकाषठा
का ्तर दो माह पूर्व राज्य्रान मे हुई घटना से लगा्या जा सकता है जहां रक्ाबंधन पर बहनों से भाई के लिए पिता की संपमत् पर अपने अधिकारों का ्िेचछा से त्याग करने की अपील तहसीलदार का्याथाल्य से जारी प्रेस नोट के माध्यम से की गई ।
सियासत में महिलाओं को हक की तलाश
भारत में राजनीति के दृशषटकोण से महिलाओं की स्रमत को देखा जाए तो आज भी उ्हें विधाम्यका में हर ्तर पर आरक्ण का लाभ देने पर राजनीतिक दलों के बीच आम सहमति नहीं बन पाई है । कहने को तो हर दल महिलाओं को संसद में आरक्ण देने के पक् में है लेकिन इस घोषणा में ईमानदारी कम और दिखावा ही अधिक रहता है । ्यही वजह है कि महिला आरक्ण विधे्यक आज भी संसद की दहलीज पर धूल फांक रहा है । राजनीति में महिलाओं को झांसा देने की परंपरा आजादी के बाद गठित पहली संसद से ही शुरू हो गई थी । आजादी के बाद पहली सरकार पंडित जवाहरलाल नेहरू की थी जिसमें 20 केन्द्रीय मंत्ाल्यों में से केवल एक ्िा््थ्य मंत्ाल्य ही अमृत कौर को मिला । बाकी सभी पदों पर पुरुषों की ही मन्युशकत हुई । इसके बाद लाल बहादुर शा्त्ी की सरकार में
महिलाओं को एक भी मंत्ाल्य नही मद्या ग्या । इंदिरा गांधी के नेतृति में गठित देश की पांचवी, छठी व नवीं कैबिनेट मे एक भी महिला केन्द्रीय मंत्ी नही थी । राजीव गांधी के मंमत्मंडल में भी केवल एक महिला मोहसिन किदवई को ही शामिल मक्या ग्या था । इस मामले में मौजूदा मोदी सरकार मे महिलाओं की स्रमत में सुधार हुआ है । 2014 में मोदी सरकार के का्यथाकाल में कुल नौ महिला सांसदो को कैबिनेट और राज्यमंत्ी बना्या ग्या । 16वीं लोकसभा में कुल 61 महिला उममीदवार जीती हैं । इस बार प्रधानमंत्ी मोदी ने अपनी सरकार में ग्यारह महिलाओं को मंत्ी बना्या है जो कि निश्चत तौर पर एक बडी उपलशबध है ।
राजनमीतिक तौर पर जागरूक होने की जरूरत
बेशक मौजूदा मोदी सरकार ने महिलाओं पर बहुत अधिक भरोसा जता्या है और पहले का्यथाकाल में विदेश और मानव संधासन सरीखे महतपूणथा विभागों की जिममेदारी महिलाओं को देने के बाद इस दूसरे का्यथाकाल में भी वित् सरीखा सबसे महतिपूर्ण विभाग निर्मला सीतारमण के रूप में एक महिला के हवाले करने में उ्होंने हिचक नहीं दिखाई है । लेकिन फिर भी इसे ्यह मान लेना गलत होगा कि महिलाओं को उनका पूरा अधिकार मिल ग्या है । इसे ध्यान में रखने के जरूरत है कि देश की आधी आबादी महिलाओं की है और वे बढ़— चढ़कर मतदान के अधिकार का उप्योग भी कर रही हैं । चुनाव दर चुनाव महिला मतदाताओ की संख्या में लगातार वृद्धि हुई है और 1980 मे महिला मतदाताओं की संख्या 51 प्रतिशत थी जबकि 2014 में 66 प्रतिशत महिला मतदाताओं ने अपने मताधिकार का इ्तेमाल मक्या । लेकिन इस स्रमत को बहुत बेहतर नहीं माना जा सकता क्योंकि ्यह आंकडा अभी भी कम है । साथ ही महिला किस पाटजी को वोट देंगी ्यह फैसला आज भी अधिकांशत: घर के पुरुषों द्ारा ही मक्या जाता है और वह उसी पाटजी को वोट देने के लिए बाध्य हो जाती है । हालांकि गुपत मतदान की व्यि्रा के कारण
महिलाएं जिसे चाहें उसे वोट दे सकती हैं लेकिन कहीं ना कहीं राजनीतिक तौर पर महिलाओं को अभी अधिक जागरूक होने की जरूरत है वर्ना मतदान के अपने अधिकार का पूरा सदुप्योग वे कैसे कर पाएंगी? राजनीतिक क्ेत् में महिला सशशकतकरण की अवधारणा को किस हद तक जमीनी ्तर पर साकार मक्या जा सका है इसके उदाहरण के रूप में हम ग्राम पंचा्यतों को देखते हैं तो पाते हैं कि महिलाएं मुमख्या और सरपंच तो बन जाती हैं परंतु उसके कामकाज घर के पुरुषों द्ारा संपादित किए जाते हैं । महिला केवल नाम मात् की जन— प्रतिनिधि बनकर रह जाती है जबकि अधिकारों और हनक का इ्तेमाल मुमख्यापति और सरपंचपति करते देखे जाते हैं ।
सशततिकरण के श्लए बनाना होगा वातावरण
्यमद हम सही मा्यने में महिला सशशकतकरण करना चाहते है तो हमे सामाजिक व मानसिक वातावरण बनाने की जरूरत है जिसमें महिलाओं की आधी जनसंख्या को अपना पूरा हक हासिल करने के लिए अलग से सोचना ्या कुछ करना ना पडे । ्यमद सभी माता पिता अपनी लड़कियों को खुद ही अपनी समपमत में से उनका हक देना आरंभ कर दें और इसे परंपरा के तौर पर समाज द्ारा अपना मल्या जाए तो लैंगिक ्तर पर आर्थिक विषमता धीरे धीरे स्वयं ही समापत हो जाएगी । तब महिलाएं अपने अधिकारों का उप्योग कर एक नए और बेहतर समाज की नींव रख पाएंगी जिसमे लिंग के आधार पर समाज का विकास प्रभावित व संचालित नहीं होगा बशलक समाज का हर वर्ग सुरमक्त व आतममनभथार होगा । इस दिशा में एक पहल ' बेटी बचाओ बेटी पढाओ ' अमभ्यान के रूप में अवश्य हुई है लेकिन अभी इस दिशा में बहुत कुछ करने की आवश्यकता है । भारत को लैंगिक भेदभाव रहित देश बनाने के लिए सरकार और समाज के साथ ही परिवार और व्यशकत को भी अपनी भूमिका ईमानदारी से निभानी होगी और इस दिशा में जो प्र्यास हो रहे हैं उसकी गति बेशक धीमी है लेकिन दिशा एकदम सही है । �
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