गतिविमध्यों पर लगाम लगाने के एजेंडे को लेकर चल रही पाटजी विधानसभा चुनाव में और ज्यादा शशकतशाली होकर सामने आएगी ।
के रल में बदलाव की लहर
वामपंथी इतिहासकारों ने ऐसा प्रचारित मक्या है कि केरल देश का वह राज्य है, जहां ईसाई धर्म और मुस्लम धर्म सबसे पहले पहुंचा था । आम जनता को शा्यद ्यह नहीं पता होगा कि भारत में बनने वाला पहला चर्च और पहली मस्जद केरल में ही मौजूद हैं । दुर्भाग्य ्यह है कि जिन मह्दू राज्यों ने ईसाई और मुस्लम धर्म को अपने राज्य में शरण दी थी, उ्हीं दोनों धमों ने सुमन्योजित रूप से मह्दू जनसंख्या को धमाथा्तरित करने में कोई कसर बाकी नहीं छोडी । भ्य, उतपीडन और लालच के बल पर मह्दुओं के
धमाांतरण का सिलसिला आज भी जारी है और इसका बडा शिकार दलित वर्ग की जनता हुई है ।
राजनीति की आड में मजहब, चर्च और वामपंथी नेताओं की कारगुजारर्यों से त््त मह्दुओं ने निका्य चुनावों में भाजपा के लिए मतदान करके भविष्य के ्पषट संकेत दे दिए हैं । आगामी विधानसभा चुनाव में वामपंथी राजनीति को प्रतिउत्र देने के लिए भाजपा लगातार समक्र्य है । एलडीएफ और कांग्रेस की अगुआई वाले ्यूडीएफ सुमन्योजित ढंग से सत्ा हासिल करके आम जनता को ठगने का काम करती आ रही हैं । वामपंथी कंधों पर बैठकर कांग्रेस राज्य में अपना अस्तति बचाने में लगी हुई है । दुर्भाग्य ्यह है कि जिन मह्दू राज्यों ने ईसाई और मुस्लम धर्म को अपने राज्य में शरण दी थी, उ्हीं दोनों धमयों ने सुमन्योजित रूप से मह्दू जनसंख्या को धमाथा्तरित करने में कोई कसर बाकी नहीं छोडी । भ्य, उतपीडन और लालच के बल पर मह्दुओं के धमाांतरण का सिलसिला आज भी जारी है और इसका बडा
शिकार दलित वर्ग की जनता हुई है । राज्य में भाजपा को जिस तरह से ईसाई समुदा्य का समर्थन मिल रहा है, उससे राज्य में नए समीकरण बनने के स्रमत पैदा हो रही है । पाटजी राज्य में अपने संगठन को मजबूत करने के लिए दिन-रात काम कर रही है । वामपंथी अपने वजूद को बचाने की कोशिश में राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ, अखिल भारती्य विद्ारजी परिषद और भाजपा का्यथाकर्ताओं पर हमले करने जुटे हुए हैं । राज्य में िषयों से जारी राजनीतिक हिंसा के अधिकांश शिकार वही तथाकथित निर्धन, निर्बल, दलित और पिछडे लोग बने हैं, जो कभी कट्टर वामपंथी थे, लेकिन वामपंथ की असमल्यत और खोखलेपन को देखकर वह संघ परिवार से जुड गए । ऐसे में भाजपा का बढ़ता जनाधार ्यह दर्शाता है कि आम जनता विकास, सुरक्ा और अस्मता के प्रश्न पर अब कोई समझौता करने के लिए तै्यार नहीं है । आगामी विधानसभा चुनाव के परिणाम राज्य में बदलाव की नई कहानी लिखेंगे, ऐसा ्पषट रूप से दिखने लगा है ।
ekpZ 2026 13