July 2026_DA | Seite 44

साहितय

धार्मिक आधार पर बंटवारे का विचार
डलॉ अमबेडकर ने अपनरी पुसतक‘ थलॉटस ऑन पाकिसतान’ में कांग्ेस करी मुकसलम परसत राजनरीलत करी कडे श्दों में आलोचना करी है । उनहोंने मुसलमानों के भारत में रहने पर स्वाल उठाते हुए लिखा – ्रा मुसलमानों करी निष्ठा भारत के प्रति रह पाएगरी? उनका मानना था कि मुसलमान ये सोचते हैं कि अंग्ेिों ने उनसे सत्ता छरीनरी थरी, इसलिए सत्ता उनहें ्वापस चाहिए । बाबासाहेब को यह चिंता थरी कि दुनिया भर में मुकसलमों करी जो सोच रहरी है, अगर उसरी सोच के तहत भारत के मुसलमानों का भरी होगा तो आने ्वाला समय मुकशकल भरा होगा । उनहें लगता था कि अगर भारतरीर मुकसलम अपने आपको देश करी धरतरी से जोड नहीं सका और मुकसलम साम्राजर सथालपत करने के लिए ल्वदेशरी मुसलमान देशों करी ओर सहायता के लिए देखने लगा, तो इस देश करी स्वतंत्ता पुन: खतरे में पड जाएगरी ।
समान नागरिक संहिता पर एकमत
बाबासाहेब अमबेडकर समान नागरिक संहिता के प्रबल समर्थक थे, लेकिन कांग्ेस और ्वामपंथरी इसका हमेशा ल्वरोध करते रहे हैं । लेकिन बाबासाहेब ने संल्वधान सभा में कहा था,” मैं समझ नहीं पा रहा हूं कि समान नागरिक संहिता का इतना ल्वरोध ्रों हो रहा है? यह स्वाल ्रों पूछा जा रहा है कि भारत जैसे देश के लिए समान नागरिक संहिता लागू करना संभ्व है?’’ उनहोंने कहा समान नागरिक संहिता एक ऐसा कानून होगा जो हर धर्म के लोगों के लिए समान होगा और उसका धर्म से कोई लेना-देना नहीं होगा । इस कानून में परर्वार, ल्व्वाह, संपत्ति और मूलभूत नागरिक अधिकार के मामलों में बराबररी होगरी । राजर का यह कर्तवर होगा कि ्वह लोगों के वरक्तगत अधिकार को सुलनकशचत करेगा और समुदाय के नाम पर उनका हनन नहीं होगा ।
अनुचछेद-370 का प्बल विरोध
भारतरीर संल्वधान के अनुचछेद-370 जिसमें कश्मीर को कई ल्वशेष अधिकार प्रापत हैं, उनके खिलाफ बाबासाहेब ने काफरी मुखर होकर अपने ल्वचार रखे थे । उनहोंने अनुचछेद 370 के बारे में शेख अ्दुलला को लिखे पत् में कहा था,” आप चाहते हैं कि भारत जममू-कश्मीर करी सरीमा करी सुरक्षा करे, यहां सडकों का निर्माण करे, अनाज करी सपलाई करे साथ हरी कश्मीर के लोगों को भारत के लोगों के समान अधिकार मिले । आप अपनरी मांगों के बाद चाहते हैं कि भारत सरकार को कश्मीर में सरीलमत अधिकार हरी मिलने चाहिए । ऐसे प्रस्ताव को भारत के साथ ल्वश्वासघात होगा जिसे भारत का कानून मंत्री होने के नाते मैं कतई स्वरीकार नहीं करुंगा ।“ गौरतलब है कि जिस दिन यह अनुचछेद बहस के लिए आया उस दिन बाबा साहब ने इस बहस में हिससा नहीं लिया ना हरी उनहोंने इस अनुचछेद से संबंधित किसरी भरी स्वाल का ि्वाब दिया । राष्ट्रवाद करी अ्वधारणा का समर्थन संघ और बाबासाहेब के बरीच ्वैचारिक सामर ये भरी है कि दोनों अखंड राष्ट्रवाद के पक्षधर रहे । डलॉ. आंबेडकर समपूर्ण ्वांगमर के खंड 5
में लिखा है,” डलॉ अमबेडकर का दृढ़ मत था कि मैं हिंदुसतान से प्रेम करता हूं । मैं िरीऊंगा तो हिंदुसतान के लिए और मरूंगा तो हिंदुसतान के लिए । मेरे शररीर का प्रतरेक कण और मेरे िरी्वन का प्रतरेक क्षण हिंदुसतान के काम आए, इसलिए मेरा जनम हुआ है ।’’
वामपंथ की विचारधारा का विरोध
25 न्वमबर 1949 को संल्वधान सभा में बोलते हुआ बाबासाहेब ने कहा था,” ्वामपंथरी इसलिए इस संल्वधान को नहीं मानेंगे ्रोंकि यह संसदरीर लोकतंत् के अनुरूप है और ्वामपंथरी संसदरीर लोकतंत् को मानते नहरी हैं ।’’ बाबा साहेब के इस एक वक्तवर से यह जाहिर होता है कि बाबा साहेब जैसा लोकतांलत्क समझ का वरक्तत्व ्वामपंथियों के प्रति कितना ल्वरोध रखता होगा!
पंथ निरपेषि राष्ट्र पर समान विचार
बाबासाहेब का स्पष्ट मत था कि भारत धर्म निरपेक्ष राष्ट् नहीं होगा, लेकिन कांग्ेस ने संल्वधान के मूल प्रस्तावना में हरी संशोधन कर दिया है । इसमें कांग्ेस ने धर्मनिरपेक्षता,
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