Jankriti International Magazine / जनकृ सत अंतरराष्ट्रीय पसिका ISSN: 2454-2725
ममट्टी की सुगंध नामक कहानी संग्रह संपामदत कर उर्षा राजे सक्सेना ने युनाइटेड मकं गडम के कथाकारों को पहली बार एक संगमठत मंच प्रदान मकया । वे `पुरवाई ' पमत्रका की सह-संपामदका हैं । उर्षा राजे सक्सेना के सामहत्य पर भारत में एम. मफल. की जा चुकी है । उर्षा राजे सक्सेना की नवीनतम पुस्तक मिटेन में महन्दी ने पहली बार यू ॰ के ॰ में महन्दी भार्षा और सामहत्य को एक ऐमतहामसक पररपेक्ष्य में रखने का प्रयास मकया है । उनकी इस पुस्तक का भारत एवं मिटेन में समान स्वागत हुआ है ।
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उर्षा वमाा मिटेन मे बसी भारतीय मूल की लेखक है । राजधानी लंदन की चहल-पहल से दूर यॉका जैसे छोटे शहर में रहते हुए सामहत्य साधना में लगी हुई उर्षा वमाा का रचना संसार छोटा है, पर वह मानव मनोमवज्ञान से सुपररमचत एक मसद्धाथा लेमखका हैं । उनकी मसमद्ध का आधार मानवीय करुिा और अन्याय के प्रमत तीका मवरोध का भाव है । उनकी कमवताएं तथा कहामनयां सजीव और सस्पंद हैं, मजनमें प्रश्न है, पीड़ा है और एक ईमानदार पारदशी अमभव्यमक्त है । सामहत्य अमृत, समकालीन भारतीय सामहत्य, आजकल, कथन, कादमम्बनी आमद पमत्रकाओं में आपकी कमवताएं तथा कहामनयां छपती रहती हैं । आप `पुरवाई ' में समीक्षा कॉलम मलखती हैं । उनके द्वारा संपामदत कहानी संग्रह सांझी कथा यात्रा की काफ़ी चच ा रही है ।
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कादंबरी मेहरा का नाम मिटेन के उन प्रवासी कथाकारों के साथ मलया जाता हैं मजन्होंने मपछले दशक में अपनी उपमस्थमत से समस्त महंदी सामहत्यकारों का ध्यान अपनी ओर खींच । उनके लेखन की शुरुआत वारािसी के ' आज ' अखबार से हुई और बाद में वे स्कू ल व कॉलेज की सामहमत्यक गमतमवमधयों से जुडी रहीं ।
अंग्रेजी सामहत्य से स्नातकोत्तर उपामध लेने के बाद वे लंदन चली गयीं जहां अध्यापन को अपना कायाक्षेत्र बनाया और 25 वर्षों तक इससे जुडी रहीं ।
अवकाश प्रामप्त के बाद अब मफर से कहानी और उपन्यास की दुमनया में प्रवेश मकया है । ' कु छ जग की ' शीर्षाक से उनका एक कहानी संग्रह भी प्रकामशत हुआ है ।
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जन्म- १ जनवरी, १९३४ को उत्तर प्रदेश के उन्नाव मज़ले के नईमपुर गाँव में एक कायस्थ पररवार में उनका जन्म हुआ था । कीमता चौधरी का मूल नाम कीमता बाला मसन्हा था ।
मशक्षा- उन्नाव में जन्म के कु छ बरस बाद उन्होंने पढ़ाई के मलए कानपुर का रुख़ मकया । १९५४ में एम. ए. करने के बाद ' उपन्यास के कथानक तत्व ' जैसे मवर्षय पर उन्होंने शोध भी मकया ।
Vol. 3, issue 27-29, July-September 2017. वर्ष 3, अंक 27-29 जुलाई-सितंबर 2017